सीरिया में क्या होने वाला है?

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संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका की राजदूत निकी हेली ने कहा कि उनकी सरकार ने सीरिया से फ़ोर्सेज़ को बाहर निकालने का फ़ैसला बदल दिया है, अमरीकी सैनिक सभी वांछित लक्ष्य पूरे होने तक सीरिया में मौजूद रहेंगे।

इसका मतलब यह है कि अमरीका की नीति में बदलाव हुआ है जो युद्ध हार जाने का यक़ीन कर चुका था। अब अमरीका सीरिया में नए सिरे से विवाद को हवा देने की कोशिश में है।

सीरिया में अमरीकी सैनिकों की संख्या 2000 से ज़्यादा नहीं है। यह सैनिक फ़ुरात नदी के पूरब में तैनात हैं और वहां से वह कुर्द फ़ोर्सेज़ की मदद कर रहे हैं। इस बात की संभावना को ख़ारिज नहीं किया जा सकता कि इस इलाक़े में अमरीकी सैनिकों की संख्या बढ़ा दी जाए और कुर्दों के साथ अमरीकियों का एलायंस और मज़बूत हो जाए तथा पूर्वोत्तरी सीरिया में जो हसका और क़ामेशली से शुरू होता है और कूबानी और जराबलस तक फैला हुआ है अमरीका कुर्दों का अलग देश बनाने की कोशिश करे।

जब पिछले सात साल के दौरान अमरीका ने सीरिया में 70 अरब डालर ख़र्च कर दिए और राष्ट्रपति बश्शार असद की सरकार को गिरा नहीं पाया हालांकि उस समय समीकरण उन संगठनों के पक्ष में थे जिन्हें अमरीका का समर्थन प्राप्त था तो अब जब हालात बदल गए हैं और सीरिया के समर्थन के लिए रूस और ईरान पूरी ताक़त से मौजूद हैं तो क्या अमरीका अपनी योजना में सफल होगा?

यह बौखलाहट की निशानी है, यह उन लक्ष्यों को प्राप्त करने की निराश कोशिश है जिनके प्राप्त होने की कोई आशा बाक़ी नहीं रह गई है। मगर इस बीच चिंता का विषय यह है कि इस लड़ाई में सीरिया की जनता को नुक़सान होगा।

अमरीका ने इराक़ में 1 लाख 70 हज़ार सैनिक तैनात किए थे जबकि इसके साथ ही उसने ब्लैक वाटर जैसी कंपनियों की भी मदद ली थी। इसके बावजूद अमरीका टिक नहीं पाया। वहां जो प्रतिरोध हुआ उससे अमरीका को भारी जानी और माली नुक़सान उठाना पड़ा। अमरीका का यह माली नुक़सान 3 ट्रिलियन डालर तक पहुंच गया जबकि 5 हज़ार से अधिक अमरीकी सैनिक मारे गए और 30 हज़ार से अधिक घायल हुए। तो क्या अब सीरिया में अमरीका के 2 हज़ार सैनिक उन्हीं प्रतिरोधक फ़ोर्सेज़ का मुक़ाबला कर पाएंगे?

राष्ट्रपति ट्रम्प आग से खेल रहे हैं। वह अपने सैनिकों की जान ख़तरे में डाल रहे हैं कि अपने आंतरिक स्कैम से लोगों का ध्यान हटाएं और अपनी कुर्सी बचाएं मगर दोनों ही स्थितियों में उन्हें विफलता ही मिलने वाली है।

सीरिया में ज़मीनी हालात तेज़ी से बदल रहे हैं। सीरिया, ईरान, रूस और हिज़्बुल्लाह का गठबंधन लगातार मज़बूत हो रहा है। इस एलायंस ने बड़ा महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त कर लिया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि आने वाले महीने अमरीका के लिए बहुत कठिन होंगे केवल सीरिया में ही नहीं बल्कि इराक़ में भी उसे भारी नुक़सान उठाना पड़ेगा।

सीरिया के बारे अमरीका के रणनीति में आने वाला बदलाव संभावित रूप से इस्राईल तथा उसकी समर्थक लाबियों के दबाव का नतीजा है, क्योंकि इस्राईल बहुत बुरी तरह डरा हुआ है इसलिए कि हालिया दिनों टी-4 छावनी पर हमला करने के बाद से इस्राईल के संबंध रूस से बहुत ख़राब हो गए हैं और सीरिया की धरती पर ईरान के क़दम और भी मज़बूत हो गए हैं। यहां एक सवाल यह है कि अमरीका अपनी इस नई योजना का ख़र्चा कहां से प्राप्त करेगा? इसका जवाद पाठकों के विवेक पर छोड़ते हैं। वैसे यह जवाब बिल्कुल ज़ाहिर है बहुत सोचने और मंथन करने की ज़रूरत नहीं है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार
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जीत की ख़ुशी या खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने घटकों के साथ मिलकर सीरिया में किए गये हमलों को सफल कार्यवाही क़रार दिया है जबकि इस हमले के बाद रूस और उसके घटकों के साथ शीत युद्ध में वृद्धि हो गयी है।

रूस की मांग पर इस हवाले से संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद की बैठक भी बुलाई गयी जबकि अमरीका और उसके घटकों ने इस कार्यवाही को पूर्वी ग़ोता के दूमा क्षेत्र में होने वाले कथित हमले का जवाब क़रार दिया है।

रूस और सीरिया के अधिकारियों ने इससे पहले सचेत किया था कि आतंकवादी रासायनिक हमला करने की योजना बना रहे हैं जबकि कथित हमले के बाद रूस ने कहा कि हमला हुआ ही नहीं और सीरियाई अधिकारियों ने हमले का कड़ाई से खंडन किया था।

अमरीकी राष्ट्रपति ने ट्वीट किया कि पिछली रात एक संपूर्ण कार्यवाही की गयी, फ़्रांस और ब्रिटेन को उनकी होशियारी और उनकी बेहतरीन सैन्य शक्ति पर अभार व्यक्त करता हूं।

उन्होंने कहा कि इससे बेहतरीन परिणाम नहीं निकल सकता था, मिशन पूरा हो गया।

पेन्टागन के प्रवक्ता डाना वाइट ने पत्रकारों को बताया था कि हमने सफलता से हर लक्ष्य को निशाना बनाया।

ज्ञात रहे कि अमरीका और पश्चिमी देश ऐसी स्थिति में सीरिया में सफलता का ढिंढोरा पीट रहे हैं कि सीरिया की सेना के साथ ही रूस ने भी घोषणा की है कि सीरिया पर 103 मिसाइल फ़ायर किए गए जिनमें 71 से अधिक मिसाइलों को मार गिराया गया है और यह बहुत बड़ी कामयाबी है।

रूस के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सीरिया के एयर डिफेन्स सिस्टम ने बहुत अच्छी उपलब्धियां अर्जित की हैं और लाज़ेक़िया तथा तरतूस में स्थित रूस के एयर डिफ़ेन्स सिस्टम ने भी मिसाइलों को ध्वस्त किया है। 

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