हम सभी को अभी या बाद मे इस्लाम धर्म स्वीकार करना ही होगा, यही असली धर्म है,,,*जोहान गीथ*

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“इस्लाम ही एक दिन दुनिया पर राज करेगी, क्योंकि इसी में ज्ञान और बुद्धि का संयोजन है”

हर्बर्ट वेल्स (1846 – 1946): “इस्लाम का प्रभावीकरण फिर होने तक अनगिनत कितनी पीढ़ियां अत्याचार सहेंगी और जीवन कट जाएगा । तभी एक दिन पूरी दुनिया उसकी ओर आकर्षित हो जाएगी, उसी दिन ही दिलशाद होंगे और उसी दिन दुनिया आबाद होगी । सलाम हो उस दिन को “।

अल्बर्ट आइंस्टीन (1879 – 1955) : “मैं समझता हूँ कि मुसलमानो ने अपनी बुद्धि और जागरूकता के माध्यम से वह किया जो यहूदी न कर सके । इस्लाम मे ही वह शक्ति है जिससे शांति स्थापित हो सकती है”।

हस्टन स्मिथ (1919): “जो विश्वास हम पर है और इस हम से बेहतर कुछ भी दुनिया में है तो वो इस्लाम है। अगर हम अपना दिल और दिमाग इसके लिए खोलें तो उसमें हमारी ही भलाई होगी”।

माइकल नोस्टरैडैमस (1503 – 1566): “जो विश्वास हम पर है और इस हम से बेहतर कुछ भी दुनिया इस्लाम ही यूरोप में शासक धर्म बन जाएगा बल्कि यूरोप का प्रसिद्ध शहर इस्लामिक स्टेट राजधानी बन जाएगा ”।

बर्टरेंड रसेल (1872 – 1970) : “मैंने इस्लाम को पढ़ा और जान लिया कि यह सारी दुनिया और सारी मानवता का धर्म बनने के लिए है। इस्लाम पूरे यूरोप में फैल जाएगा और यूरोप में इस्लाम के बड़े विचारक सामने आएंगे । एक दिन ऐसा आएगा कि इस्लाम ही दुनिया की वास्तविक उत्तेजना होगा ”।

गोस्टा लोबोन (1841 – 1931) : “ इस्लाम ही सुलह और सुधार की बात करता है। सुधार ही के विश्वास की सराहना में ईसाइयों को आमंत्रित करता हूँ ”।

बरनार्ड शा (1856 – 1950) : “सारी दुनिया एक दिन इस्लाम धर्म स्वीकार कर लेगी। अगर यह वास्तविक नाम स्वीकार नहीं भी कर सकी तो रूपक नाम से ही स्वीकार कर लेगी। पश्चिम एक दिन इस्लाम स्वीकार कर लेगा और इस्लाम ही दुनिया में पढ़े लिखे लोगों का धर्म होगा ”।

जोहान गीथ (1749 – 1832) : “हम सभी को अभी या बाद मे इस्लाम धर्म स्वीकार करना ही होगा। यही असली धर्म है। मुझे कोई मुसलमान कहे तो मुझे बुरा नहीं लगेगा, मैं यह सही बात को स्वीकार करता हूँ ”