हर शाख़ पे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा!!!

Posted by

S Perveen
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दोस्ती के नाम पर ठगी का गोरखधंधा!

पहले फ्रेंड रिक्वेस्ट, फिर मैसेंजर पर चैटिंग (कितना भी इग्नोर करो), फिर व्हाट्सऐप नम्बर चाहिए(क्यों? क्या मैसेंजर पर बात कम हो पा रही है, जी नहीं व्हाट्सऐप का नम्बर मतलब कॉल करने के लिए नम्बर मिल जायेगा),

चलो अगर दोस्त मानकर (कि सही व्यक्ति लग रहा है, गलत फायदा नहीं उठाएगा) नम्बर भी दे दिया। फिर रोज बात करनी है (क्यों जनाब महिलाओं को और कोई काम नहीं होता या उनकी फैमिली नहीं होती),

नम्बर मिल गया तो मिलने की जिद (क्यों, अपनी वाइफ को किसी से भी मिलने भेज देते हैं क्या आप सब, कोई अजनबी आपके घर सिर्फ आपकी वाइफ से मिलने आता है तो कैसा लगेगा आपको), अरे कैसी बात करती हैं मेरी वाइफ तो कहीं आती जाती नहीं (नहीं जातीं कि आप ले नहीं जाते हैं) आप दूसरी औरतों के साथ एन्जॉय करने का मंसूबा बांधे रहते हैं और आपकी वाइफ से कोई मिले भी न (ऐसा तो हो नहीं सकता) जैसे आप उनसे झूठ बोल रहे हैं वो भी तो …। हम आपसे आपके घर पर नहीं बल्कि बाहर मिलना चाहते हैं (क्यों जनाब, आपको क्या औरतें बेवकूफ नजर आती हैं जो आप बुलाएँगे तो दौड़ी चली जाएँगी आपसे मिलने। क्यों मिलने जाएं आपसे? होटल बाजी करनी है या पैसा कमाना है उन्हें, समझते क्या हैं आप लोग??? किस फ़िराक में रहते हैं लोग हमको तो समझ में ही नहीं आता।

क्या पुरुष और स्त्री अच्छे दोस्त नहीं बन सकते? क्या उनकी फैमिली आपस में मिलकर नहीं रह सकतीं? क्या दोस्ती के नाम पर लोग सिर्फ मौज मस्ती और फ़्लर्ट करना चाहते हैं लोग?

इसका तो सीधा सा अर्थ है कि कोई भी स्त्री, महिला, लड़की किसी भी अपरिचित पुरुष पर विश्वास ही न करे क्योंकि विश्वास में तो ठगे जाने का डर है। अगर आप किसी को नम्बर देने से इंकार करो तो ऐसे घिसेंगे जैसे मोबाइल नम्बर नहीं अमृत हो। ज्यादा बात बढ़ती देख फिर एकमात्र आप्शन रह जाता है कि ब्लॉक करो ऐसे लोंगों को(तब कैसा लगता होगा जैसे किसी ने एक तमाचा जड़ दिया हो)
किसी से भी मैसेंजर पर बात करने की जरूरत ही क्या है, इग्नोर करते रहो अपने आप ही मैसेज आने बंद हो जायेगे। नम्बर तो बिलकुल भी मत दो (क्योंकि कब कोई धोखा दे दे कोई नहीं जानता),
मत करो दोस्ती की अपेक्षा, क्योंकि कोई भी दोस्ती का मतलब ही नहीं जानता, हर कोई सिर्फ स्वार्थ सिद्ध करना चाहता है। लड़के तो सिर्फ बदनाम हैं, बड़ी उम्र वाले सज्जन टाइप लोग (जिनकी फैमिली, बीवी, बच्चे, यहां तक कि दामाद, बहू और नाती, पोतो वाले खासतौर पर) होते हैं जिन्हें बीवी में तो कोई इंटरेस्ट होता नहीं और दूसरी औरतों के पीछे पड़े रहते हैं अपना उल्लू सीधा करने की फ़िराक में, कि दस को आजमाएंगे एक तो फंस ही जायेगी।
अरे बंधुवर, ऐसा न हो कि फंसने वालों में आपकी बीवी, बहन और बेटी भी तो हो सकती हैं जिनको कोई और फंसाने में लगा होगा।

🤔 सावधानी हटी,👁 दुर्घटना घटी
हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा
दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाले खुद भी उसी गड्ढे में गिर सकते हैं

ये लेख इसलिए नहीं कि मैं पुरुष वर्ग की दुश्मन हूँ, नहीं जी, हम तो हमेशा से दोनों वर्गों की हिमायत करते हैं मगर आप विश्वास तो बनाओ, छिछोरी हरकतों से बाज तो आओ, काहे को दोस्ती का नाम बदनाम करते हो?

काहे को अपनी इज्जत खुद नीलाम करते हो? शर्म नहीं आती दूसरों को फंसाते हुए।

ऐसा न हो कि कहीं फंसाने के चक्कर में फेक आईडी से अपनी ही बेटी को न फंसा लो। बुरा लगा न?
हमें भी बुरा लगता है जब कोई हमारे लिए या किसी भी बहन, बेटी के लिए ऐसा सोचता है।

नोट: ये पोस्ट सिर्फ उनके लिए जो दोस्ती के महत्व को नहीं समझते। हमारे भाइयों से क्षमाप्रार्थी हूँ वो मेरी इस पोस्ट को अन्यथा न लें क्योंकि ये पोस्ट उनके लिए नहीं….🙂🙂