हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार और लोकप्रिय कवि पंडित सुरेश नीरव के ज्येष्ठ पुत्र सृजन चतुर्वेदी हुए पंचतत्वों में लीन

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Poonam Matia
सृजन चतुर्वेदी हुए पंचतत्वों में लीन
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ग़ाज़ियाबाद – हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार और लोकप्रिय कवि पंडित सुरेश नीरव के ज्येष्ठ पुत्र सृजन चतुर्वेदी का आज हिंडन श्मशान घाट पर दाह संस्कार कर दिया गया। सृजन पहले भी गंभीर चोटों से लड़ कर उभरे हैं अपनी फाइटिंग स्पिरिट की वजह से किन्तु इस बार बीमारी जीत गयी|
उल्लेखनीय है कि वे टायफ़ाइड और जौनडिस से त्रस्त चल रहे थे।

स्वर्गीय सृजन चतुर्वेदी(लगभग चालीस वर्ष) को मूर्धन्य साहित्यकार आचार्य निशांत केतु, साहित्यकार डॉ. क्षमा शर्मा, ग़ज़लकार दीक्षित दनकौरी, गोविंद गुलशन, पी पी श्रीवास्तव रिंद,व्यंग्यकार सतपाल, हास्य व्यंग्य कवि प्रदीप चौबे, सुप्रसिद्ध गीतकार संतोषानंद, डॉ. धनंजय सिंह, प्रवासी संसार के संपादक राकेश पांडेय, फिल्म-निर्माता-निर्देशक प्रदीप जैन, वीररस के कवि भुवनेश सिंघल,कवि नीरज नैथानी, मुंबई के पत्रकार हरीश पाठक, ग्वालियर से आए गीतकार राम वरण ओझा, मैनपुरी के योगेन्द्र कुमार लल्ला, भोपाल के जहीर कुर्रेशी, डॉक्टर वागीश दिनकर, डॉ. पुष्पा जोशी, डॉ. सतीश वर्धन, डॉ. वीणा मित्तल, स्नेह भारती, सुलभ साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. अशोक कुमार ज्योति, हिंदुस्तान टाइम्स की पत्रिका कादम्बिनी से अरुण कुमार जैमिनी, बलराम दुबे, नंदन के पूर्व सहायक संपादक विमल कांत चतुर्वेदी, पालागन डॉट कॉम के ज्ञानेंद्र सिंह चतुर्वेदी, डॉ. पुष्पा बिसैन, मनोज कामदेव शर्मा, दैनिक ट्रू टाइम्स के रोशन राय, डाटला एक्सप्रेस के पंकज तोमर,ट्रू मीडिया के संपादक ओमप्रकाश प्रजापति, विष्णु विराट, कवयित्री कल्पना कौशिक, तूलिका सेठ, डॉ. जय प्रकाश मिश्र, , रजनी कांत राजू, अमर नाथ झा, राजेश मंडार और दैनिक हिंट के संपादक कमल सेखरी, व्यंग्यकार हरीश नवल और मसूरी से जय प्रकाश पांडेय, मुंबई से डॉक्टर दमयंती शर्मा, अजय भारत से राज श्रीवास्तव, दुर्गेश अवस्थी और विनोद यादव तथा आप सभी( मेरी पोस्ट पर) के सहित नरेश माटिया और मैंने (पूनम माटिया)इस अवसर पर सृजन चतुर्वेदी के लिए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
एक दिवस पहले ही मृत्यु को प्राप्त साहित्यिक पत्रिका ’प्रेक्षा’ के संपादक जगदीश ठकराल की पुत्री हेमा ठकराल और उनकी पारिवारिक मित्र श्रीमती खन्ना भी इस दुःख की घडी में शामिल हुईं|

सुरेश नीरव और मधु चतुर्वेदी, दोनों ही तथा उनके कनिष्ट पुत्र मनन के लिए पुत्र वियोग की यह पीड़ा हृदय विदारक है और समय ही इस क्षति को सहने की शक्ति देगा| आप सभी का नीरव दम्पति की ओर से हार्दिक आभार|
ॐ शांति
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पूनम माटिया