ख़िलाफ़ते उस्मानियाँ ने इस्तम्बुल से मक्का मुक़र्रमा तक रेलवे लाइन बनाई थी

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कुस्तुन्तुनिया शहर को ही इस्तम्बुल नाम दिया गया जो तुर्की की राजधानी है, यह शहर दुनियां के प्राचीनतम शहरों में से एक है, कुस्तुनतुनिया विश्व में अपना अलग स्थान रखता है, यह बिज़नेस के ऐतबार से दुनियां का केंद्र हुआ करता था, यह विश्व के तीन महाद्वीपों पर इस्लामी राज का केंद्र रहा है, तुर्की की राजधानी इस्तम्बुल के समय में विश्व की राजधानी सामान थी, उस समय तुर्की विश्व की एक मात्र शक्ति हुआ करता था और उसका साशन तीन महाद्वीपों तक फैला हुआ था, यह शहर विकास का मॉडल है|

खिलाफत उस्मानियाँ ने इसताम्बुल से मक्का मुकर्रमा तक रेलवे लाइन की तामीर की थी जो तुर्की से शाम वहां से उर्दन और फिर मदीना मुनव्वरा और मक्का तक जाती थी बर्तानिया ने बागियों को असलहा फ़राहम कर के इस रेलवे को तबाह करने का हुक्म दिया. जिसकी वजह से फौज जजीरा अरब पहुंचाना मुश्किल हो गया और जजीरा अरब खिलाफत के हाथ से निकल कर बर्तानिया के हाथ में चला गया.

उस्मानी सलतनत १२९९ में पश्चिमोत्तर अनातोलिया में स्थापित एक तुर्क राज्य था. महमद द्वितीय द्वारा १४९३ में क़ुस्तुंतुनिया जीतने के बाद यह एक साम्राज्य में बदल गया. प्रथम विश्वयुद्ध में १९१९ में पराजित होने पर इसका विभाजन करके इस पर अधिकार कर लिया गया.

स्वतंत्रता के लिये संघर्ष के बाद २९ अक्तुबर सन् १९२३ में तुर्की गणराज्य की स्थापना पर इसे समाप्त माना जाता है. उस्मानी साम्राज्य सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी में अपने चरम शक्ति पर था. अपनी शक्ति के चरमोत्कर्ष के समय यह एशिया, यूरोप तथा उत्तरी अफ़्रीका के हिस्सों में फैला हुआ था.

यह साम्राज्य पश्चिमी तथा पूर्वी सभ्यताओं के लिए विचारों के आदान प्रदान के लिए एक सेतु की तरह था. इसने १४५३ में क़ुस्तुन्तुनिया (आधुनिक इस्ताम्बुल) को जीतकर बीज़ान्टिन साम्राज्य का अन्त कर दिया. इस्ताम्बुल बाद में इनकी राजधानी बनी रही. इस्ताम्बुल पर इसकी जीत ने यूरोप में पुनर्जागरण को प्रोत्साहित किया था.

एशिया माइनर में सन् १३०० तक सेल्जुकों का पतन हो गया था. पश्चिम अनातोलिया में अर्तग्रुल एक तुर्क प्रधान था. एक समय जब वो एशिया माइनर की तरफ़ कूच कर रहा था तो उसने अपनी चार सौ घुड़सवारों की सेना को भाग्य की कसौटी पर आजमाया.

उसने हारते हुए पक्ष का साथ दिया और युद्ध जीत लिया. उन्होंने जिनका साथ दिया वे सेल्जक थे. सेल्जक प्रधान ने अर्तग्रुल को उपहार स्वरूप एक छोटा-सा प्रदेश दिया. आर्तग्रुल के पुत्र उस्मान ने १२८१ में अपने पिता की मृत्यु के पश्चात प्रधान का पद हासिल किया.

उसने १२९९ में अपने आपको स्वतंत्र घोषित कर दिया. यहीं से उस्मानी साम्राज्य की स्थापना हुई. इसके बाद जो साम्राज्य उसने स्थापित किया उसे उसी के नाम पर उस्मानी साम्राज्य कहा जाता है (इसी को अंग्रेजी में ऑटोमन एम्पायर भी कहा जाता है).

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