ग़लत फैमियाँ कैसे जन्म लेकर फ़साद की जड़ बन जाती हैं!

ग़लत फैमियाँ कैसे जन्म लेकर फ़साद की जड़ बन जाती हैं!

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Javed Khan
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आज बड़ी कशमाकश हुई जब मैच के अंतिम चरण में मुझे पटाखों की आवाज़ आई, मुझ से रहा नही गया ,मुझे उस गद्दार को देखने का बड़ा मन था । पता तो चले ,देश के दुश्मन कौन हैं।जब वहां पहुँचा तो देखा एक उल्लू घोड़े पर बैठा है । DJ के सामने नाच गाना चल रहा है। मतलब उसकी शादी थी। वहां से आगे बढ़ा तो एक टोटल मुस्लिम इलाके से पटाखों की आवाज़ आ रही थी। अब पक्का यकीन हो गया कि कोई शर फैलाना चाहता है। क्योंकि अमूमन मुस्लिमो में रमज़ान माह में शादियां नही होती। रहा नही गया उस सूरत के दीदार करने ।वहां मैं देखकर दंग रह गया ,एक मौलाना पटाखे पे पटाखे चलाये जा रहे हैं। मैं कुछ बोलता उससे पहले ही मुझे समझ आ गया कि बहुत सी मस्जिदों में तरावीह खत्म हैं। इस लिए पटाखे चलाना उनके लिए वो कारण है, न कि मैच।
खैर मुझे पता चल गया कि गलत फैमियाँ कैसे जन्म लेकर फसाद की जड़ बन जाती हैं।
जावेद खान