♡♡एक मर्तबा अबू जहल ने सोचा की मोमिनों का इम्तेहान लिया जाये रे♡♡

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Anees Husain Ansari
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एक मर्तबा अबू जहल ने सोचा की मोमिनों का इम्तेहान लिया जाये अबू जहल ने सुना था कि हज़रत अली (रजि0) के घर में फाके पे फाके हो रहे हैं रोज़े पे रोज़े रखे जा रहे हैं ऐसी घड़ी में कोई मुआमला पेश आ जाये तो मज़ा आ जाये अबू जहल सोच ही रहा था कि इतने मे एक फकीर आ गया फकीर ने अबू जहल से कहा की बच्चे भूखे हैं कुछ दे ?

अबू जहल ने फकीर से कहा बिल कुल सही समय पर आये हो तुम्हारे लिये एक मुआमला सोच कर रखा है

फकीर ने पूछा क्या ?

अबू जहल ने कहा इसी शहर मे एक घर है एक दरवाजा है उस दरवाजे पर चले जाओ फिर किसी और के दरवाजे पर जाने की ज़रूरत नही पड़ेगी फकीर ने कहा नाम बताओ पता बताओ ?

अबू जहल ने कहा वहाँ जाना तो पूछेंगे भेजा किसने है तो मेरा नाम मत बताना फकीर ने कहा नाम बताओ पता बताओ हमे आपका नाम बताने की क्या ज़रूरत अबू जहल ने कहा उनका नाम मौला अली शेरे खुदा है पता भी बता दिया फकीर जब हज़रत अली (रजि0)के दरवाजे पर गया तो दरवाजे कुन्ढी बजाई हज़रत अली(रजि0)अन्दर से बाहर निकले फकीर हज़रत अली (रजि0)को देखते ही बोला ऐ अली तुम सलामत रहो तुम्हारा खानदान सलामत रहे तुम्हारी रईशी सलामत रहे वो भी अरब के सबसे बड़े रईश हज़रत अली (रजि0)ने पूछा तुम को बताया किसने है कि मै अरब का सबसे बड़ा रईश हूँ फकीर ने कहा जिसने बता कर भेजा है उसने अपना नाम बताने से मना किया है ?

हज़रत अली(रजि0)ने कहा जब तक नही बतायेगा नाम तब नही बनेगा तेरा काम फकीर ने इधर देखा उधर देखा सोचा अबू जहल थोड़े ही देख रहा है बता दिया

अबू जहल का नाम सुन कर आप मुस्कुराये और कहा ,

उसने भेजा है तो ज़रूर दूँगा और इतना दूँगा कि तुम्हारी हाजत भी पूरी हो जायेगी और आदत भी फकीर ने कहा दीजिए अली आप ने कहा हाथ फैलाओ फकीर ने कहा पहले अन्दर से कुछ लाओ आप ने कहा मैं अली हूं अली मुझे अन्दर बाहर की जाने की जरूरत नही है

फकीर सोचने लगा कि न सर पे कुछ न जेब मे कुछ कहते है हाथ फैलाओ फकीर ने हाथ फैला दिया आप कुछ पढ़ रहे थे पढ़ कर फकीर के हाथ मे छू कर दिया और कहा हाथ को बन्द कर और जा हाथ को खोल कर न तू देखना न रास्ते मे किसी को दिखाना जिसने तुझको मेरे पास भेजा है सबसे पहले उसी को दिखाना

फकीर सोचता हुआ जा रहा है कि दिखायेंगे क्या हाथ मे सिर्फ छू है उधर अबू जहल मज़ाक उड़ाने के लिए बड़े बड़े रईशो को बुला लिया और कहा कि अली के घर मे खाने को नही मिलेगा क्या ? उधर फकीर को हाथ मलता हुआ आते देखा तो पूछा क्या मिला ? फकीर ने कहा न मुझे देखने की इजाजत है न किसी को सबसे पहले तुझी को देखने की इजाजत है अबू जहल सोचने लगा कि क्या मिल गया जो पहले मै ही देखूँगा ? जब फकीर ने हाथ को खोला तो अबू जहल ने आँख फाड़ कर देखा तो एक शानदार चमकदार कीमती मोती मौजूद है अबू जहल ने फकीर से पूछा उनके घर मे खाने को नही है तुमको कहाँ से ला के दे दिया फकीर ने कहा अबू जहल सुन अली ने इस मोती को न किसी दुकान से दिया है न मकान से अली ने इस मोती को अपने ज़ुबान से दिया है। अबू जहल ने कहा कैसे ?

फकीर ने कहा ,जैसे ही मैने कहा दीजिए अली आप ने कहा हाथ फैलाइये मै सोच रहा था न सर पे कुछ न जेब मे कुछ कह रहे है हाथ फैलाइये मगर मैने अख्तियार देखा अली का कि मौला ए क़ायनात कुछ पढ़ रहे हॅ हाथ मे छू कर दिया फकीर कहने लगा कि ऐ अली तुम्हारे छू का ये आलम है तो तुम्हारे अल्लाहू का आलम क्या होगा जब अली का ये मर्तबा है तो अली के नबी (सल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम) का मर्तबा क्या होगा । जब उनके गदा भर देते है शाहाने ज़माने की झोली; अरे अली का जब ये आलम है, मुख्तार का आलम क्या होगा”,,,,,
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“””सुबहानअल्लाह”””

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