💐💐💐ग़ज़ल💐💐💐अगर नींद उसने चुराई न होती

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Ashkara Khanam Kashf
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💐💐💐ग़ज़ल💐💐💐

ग़मे ज़िंदगी से रिहाई न होती
अगर आतिशे दिल बुझाई न होती

जो आँँखों से उसने पिलाई न होती
मिरी इस तरह जग हँसाई न होती

यूँ आवाज़ रब को लगाई न होती
घड़ी जो मुसीबत की आई न होती

सज़ा जो ये शैताँ ने पाई न होती
कहीं भी ज़मीं पर बुराई न होती

अगर नींद उसने चुराई न होती
तो ख़्वाबों से अपनी लड़ाई न होती

नज़र आइने से मिलाई न होती
तो फिर ख़ुद से ये आशनाई न होती

फ़लक से जमीं की रसाई न होती
अगर बीच उनके जुदाई न होती

हमें साथउनका जो न’कश्फ़’मिलता
कभी शामे ग़म मुस्कुराई न होती।

💐💐कश्फ़💐💐