एयर स्ट्राईक में नॉनटेक्निकल पीएम से टेक्निकल गाईडेंस लेने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए

एयर स्ट्राईक में नॉनटेक्निकल पीएम से टेक्निकल गाईडेंस लेने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए

Posted by

Mohd Sharif

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किसी देश के ख़िलाफ़ फौजी कार्रवाई की सफलता युद्ध कौशल के साथ ही उसमें प्रयोग किये जाने वाले हथियारों तथा दूसरे उपकरणों के ज्ञान व प्रशिक्षण पर निर्भर करती है। इसीलिये आधुनिक हथियारों और दूसरे उपकरणों की उपलब्धता तभी उपयोगी होती है जब उनको प्रयोग करने वाले कर्मचारी प्रशिक्षित हों। वायु सेना की सारी कार्रवाई चूंकि लड़ाकू विमानों और दूसरे उपकरणों पर ही निर्भर करती है इसलिए किसी हवाई हमले के समय प्रशिक्षित वायु सेना कर्मियों द्वारा कार्य को बहुत ही कुशलता पूर्वक सम्पन्न किया जाता है। यदि ऐसा न हो तो मामूली सी चूक भी सबकुछ चौपट कर सकती है और कामयाबी नाकामी बन जाती है।

बालाकोट एयर स्ट्राईक की गई इसमें शक करने की गुंजायश नहीं है और इसकी ख़बर भी भारत से पहले पाकिस्तान ने ही दी थी। इसकी कामयाबी का श्रेय भारतीय वायुसेना को जाता है लेकिन प्रधानमन्त्री मोदी ने इसकी कामयाबी का श्रेय ख़ुद को देते हुए बयान दिया है कि, “मौसम अचानक खराब हो गया था। 12 बजे एक पल मन में आया कि इस मौसम में क्या करेंगे। एक्सपर्ट्स का विचार आया कि तारीख बदल दी जाए। मुझे गोपनीयता का खयाल आया। मैंने सोचा कि इतने बादल हैं तो एक फायदा है कि हम रेडार से बच सकते हैं और बादलों का फायदा भी मिल सकता है। मैंने कहा ठीक है इसी मौसम में जाइए।”

इस बयान पर विचार करने से पहले यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि किसी रोगी का इलाज यदि कोई झोला छाप डॉक्टर करता है तो यह दण्डनीय अपराध माना जाता है। यह भी जानना ज़रूरी है कि चाहे झोला छाप डॉक्टर सही दवाई दे तब भी वह अपराधी होता है। इसी प्रकार किसी वायु सेना की कार्रवाई, जहां हर चीज़ उच्च स्तर की टेक्नॉलोजी पर आधारित होती है, में किसी नॉनटेक्निकल व्यक्ति की दख़लअन्दाज़ी झोला छाप डॉक्टर के इलाज से भी ज़्यादा हानिकारक हो सकती है क्योंकि झोला छाप डॉक्टर के इलाज से तो केवल एक व्यक्ति ही प्रभावित होता है जबकि एयर स्ट्राईक के अभियान में किसी नॉनटेक्निकल व्यक्ति की दख़लअन्दाज़ी से पूरा अभियान ख़तरे में पड़ सकता है और उससे पूरा देश प्रभावित होता है।

मोदी के उपरोक्त बयान पर विचार करें तो एक सवाल तो यह पैदा होता है कि एयर स्ट्राईक वाले अभियान में बादलों के पीछे राडार की नज़रों से वायुयानों के छिपने की बात मोदी ने किस हैसियत से कही थी? क्या किसी एक्सपर्ट की हैसियत से कही थी या किसी जाहिल की हैसियत से कही थी?
दूसरा सवाल यह है कि यदि राडार वाली यह बात सही है तो इतनी छोटी सी बात को वायुसेना के एक्सपर्ट्स क्यों नहीं जानते थे?
यह सवाल तो जांच का विषय हैं।

एक बात यह भी विचार करने योग्य है कि जब एक्सपर्ट्स खराब मौसम के कारण तारीख़ बदलने पर विचार कर रहे थे तो इसका सीधा सा अर्थ यह है कि उनका ज्ञान मोदी से भी कम था और उनको राडार से सम्बन्धित प्रारम्भिक ज्ञान भी नहीं था तो ऐसे अल्पज्ञानी अधिकारियों को ऐसी ज़िम्मेदारी के स्थान पर नियुक्त किया जाना देश की सुरक्षा को ख़तरे में डालने के समान है।

ऐसी स्थिति में यही कहा जा सकता है कि एयर स्ट्राईक में नॉनटेक्निकल पी एम से टेक्निकल गाईडेंस लेने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसी ज़िम्मेदारी के स्थान पर उपकरणों की पूरी जानकारी रखने वाले कर्मचारियों ही की नियुक्ति सुनिश्चित होनी चाहिए।