😂😂56 इंच का सीना है, जुठ बोल कर जीना है : बंगाल की शेरनी ने भारत के सबसे पावरफुल गुंडे को पज़ामे में मूतवा दिया😂😂

😂😂56 इंच का सीना है, जुठ बोल कर जीना है : बंगाल की शेरनी ने भारत के सबसे पावरफुल गुंडे को पज़ामे में मूतवा दिया😂😂

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मोदी के “87-88 में डिजिटल कैमरा, ईमेल” और “बादलों के पार न देख पाने वाले राडार” जैसे बयानों का कारण:

एहसान जाफरी, इशरत जहां, अखलाक, पहलू खान, जज लोया दिन रात मोदी का पीछा करते हैं. मोदी की इमेज 2002 में कैद हो चुकी है और वो इससे निकलने की कोशिश में तमाम गलतियां करते हैं. बीच बीच में करन थापर और टाइम मैगज़ीन का महाविभाजनकारी का टाइटिल उनकी तमाम कोशिशों पर पानी फेर देते हैं.

मोदी की टीस है कि इतने बड़े बहुमत से प्रधानमंत्री बनने के बाद भी बुद्धिजीवी ने सभ्य समाज में इनकी स्वीकर्यता नहीं बनने दी. इसी वजह से वो खान मार्केट गैंग और लुटियन डेल्ही जैसे जुमले इस्तेमाल करते हैं. पोस्ट ट्रूथ या उत्तर सच काल के सभी नेताओं के साथ यही समस्या है. डोनाल्ड ट्रंप की भी यही समस्या है और उनका भी झगड़ा बुद्धिजीवी से ही है.

1984 का अतीत कांग्रेस का भी पीछा करता है लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस उससे निबट लेते है क्योकि वो गलती मानने में देर नहीं करते, जैसा सैम पित्रोदा के बयान के बाद राहुल गांधी ने किया. कांग्रेस सिखों को प्रतिनिधित्व देने में कभी पीछे नहीं हटी. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाना हो या सिख विरोधी हिंसा वाले क्षेत्र से अरविंदर सिंह लवली को पार्टी का उम्मीदवार बनाना हो.

मोदी यही नहीं कर पाये और आलोचना के दबाव में उन्होने शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सर गाड़ कर अपना एक कम्फर्ट ज़ोन बना लिया और उसी में रहते हैं. अपनी बनाई इस दुनिया से बाहर निकालने की जब भी कोशिश करते हैं उन्हे करन थापर दिखाई दे जाता है और वो वापिस उसी दुनिया में लौट जाते हैं जहां उनकी फकीरी, थकते क्यों नहीं है और आम कैसे खाते हैं पर बात होती है.

इसी कम्फर्ट ज़ोन के सहारे 2002 की इमेज का तोड़ निकालने के लिए मोदी बड़ी लकीर खींचने की कोशिश करते हैं और जग हंसाई का कारण बन जाते हैं. मोदी 2002 की छवि से बाहर निकलने के लिये गलत टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं.

Prashant Tandon सर के सौजन्य से


Wasim Akram Tyagi

पक्षकारः आप इतना काम करते हैं, थकते नहीं? कौनसा टाॅनिक लेते हैं? आपने देश में ‘विकास’ की गंगा बहा दी अभी और क्या क्या करेंगे?
प्रधानसेवकः कहावत है कि अमेरिका चांद पर गया था, लेकिन मैं सूरज पर जाऊंगा।
पक्षकारः लेकिन सूरज पर तो बहुत गर्मी होती है?
प्रधानसेवकः इग्जेक्टली इसीलिए मैं रात में जाऊंगा।

Saleem Akhter Siddiqui

मोदी यह बताना भूल गए थे कि डिजिटल कैमरा से तस्वीर लेने के बाद उन्होंने तस्वीर को 100 जीबी वाली पेन ड्राइव में सेव किया था। तस्वीर को पेन ड्राइव में लेने के बाद मोदी ने तस्वीर को डीवीडी में कॉपी किया था। फिर उन्होंने डीवीडी को कंप्यूटर के डीवीडी राइटर से उसकी हजारों डीवीडी बनार्इं और उन्हें वितरित किया।

Rofl Sinha

@RoflSinha

फोन का अविष्कार करने के बाद जैसे ही मेने उसे चालू किया, तो देखा उस पर मोदी जी के दो मिस्ड कॉल आये हुए थे : ग्रॉहम बेल (फोन अविष्कारक)

💞 Ridzi 💞 ‏ریڈزی

@RidziSpeaks_

अमित शाह बादलों में छिपकर भी तो #बंगाल जा सकता था,

खामखाँ #दीदी के #रडार में आ गया !
😂😂😂


Faisal Khan
ये जो नीले फूल की साड़ी में बैठी है l ख़ुदाई ख़िदमतगाऱ डोमेस्टिक वर्कर्स यूनिट की मेंबर है बूढ़ी है,बीमार है अब पहले जैसा काम भी नहीं कर पाती l कल इफ्तार से पहले “सबका घर’ आई पानी को पुछा तो बोली मेरा रोज़ा है l बाद में पूछने पर कैसे आना हुआ तो बेहद दर्द भरे लहजे में बोली पन्नी डाल कर जिस झोपड़ी में रहती हूँ वो जल गई है l धूप में वक़्त गुज़रता है,और उस पर रोज़े l मैंने कहा आप बेफिक्र रहिये झोपड़ी बन जायगी इसके बाद उनको थोड़ी तसल्ली हुई,और देर तक दुआए देती रही l “सबका घर” में ये रोज़ के किस्से है, ऐसे ही मुख्तलिफ परेशानिया लेकर सुबह से शाम तक लोग आते रहते है बीमारी,कानूनी मदद ,ज़ुल्म ज़्यादती,घर टूट गया ,राशन नहीं है वैगराह l और “सबका घर”टीम अपनी हैसियत भर मदद भी करती है l ऐसे में ज़रूरी है,उन सबका शुक्रिया किया जाये जिन्होंने “सबका घर” के वजूद में आने में मदद की है l

Wasim Akram Tyagi

मोसाद का ऐजेंट बता रहा है कि 1987 मे उसके पास डिजिटल कैमरा था और वह ई मेल भी इस्तेमाल करता था। आप हंस सकते हैं, मगर हंसिए मत सोचिए! मोसाद के ऐजेंट के लिए यह कोई बहुत बङी बात नही रही होगी।


Saleem Akhter Siddiqui
1984 में मेरे पास बजाज की स्कूटी थी। एप्पल का समार्ट फोन था। स्मार्ट एलईडी टीवी था 80 इंच का। मेरे पास टाटा स्काई की डिश थी। उस पर मैं जी न्यूज देखता था। स्टार प्लस पर क्योंकि कभी बहु थी सीरियल देखता था। मेरे शहर में कई मल्टीप्लेक्स थे। सभी में डिजिटल तकनीक थी। कंप्यूटर का मॉनीटर डिजिटल था, माऊस और की बोर्ड वायरलेस थे। कंप्यूटर की रैम 10 जीबी थी, हार्ड डिस्क 1 टीबी की थी। अक्षय कुमार की फिल्में देखने का बहुत शौक था। उसकी कोई भी फिल्म मैं नहीं छोड़ता था। सब कुछ था, बस इतना जरूर था कि तब कोई मूर्ख देश पर शासन नहीं करता था। ाढ़ी लिखी जनता किसी मूर्ख की पीछे पागल नहीं थी।


योगिता आनंदपाल सिंह

@Yogita_singh11
पाकिस्तान भेजने वालो को अपने ही मुल्क में
बंगाल जाने में डर लग रहा है,

ओर अंधभक्त बोल रहे हमारे पप्पा शेर हैं..

अरे शेर नहीं शेर की खाल मे डरपोक गधा..तो नहीं बोलूगी..लेकिन #डरपोक_कायर है..

आगे से ध्यान रखें!
संतों को आदर से बुलाएं।

संत श्री आसाराम बलात्कारी जी
संत श्री रामराहीम बलात्कारी जी
संत श्री वीरेंद्र दीक्षित बलात्कारी जी
संत श्री दाँती महाराज बलात्कारी जी
संत श्री रामदेव कारोबारी जी
संत श्री श्री श्री लाचारी जी
संत श्री योगी अत्याचारी जी…….

Ahmed Patel

Verified account

@ahmedpatel
If situation in Bengal is so severe that campaigning must be stopped, why is EC waiting until tomorrow? Is it because PM has scheduled rallies tomorrow?

Bullet Raja

@BuletRaja8329
भारत के सबसे बड़े पावरफुल गुंडे को भी पजामे में
मूतवा दिया

बंगाल शेरनी ने 😂😂

अंजु यदुवंशी ● انجو 🇮🇳

@anjuydv
अमित शाह की रैली में बवाल मचा तो ममता बनर्जी जिम्मेदार,

वहीं यूपी के रायबरेली विधायक अदिति सिंह पर “गुण्डों” द्वारा किया गया हमला नौटंकी था।

काकावाणी کاکاوانی

@AliSohrab007
बंगाल में 80% तक मतदान हो रहे हैं,
बस यही देख BJP व BJP का साइलेंट “पार्टनर” चुनाव आयोग भी पगला गया है…
और तड़ीपार अमित शाह बंगाल को आग में झोंकने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा ताकि लोग कम से कम वोट करें और ये अपना उल्लू सीधा कर करें…

Disclaimer : लेख सोशल मीडिया में वॉयरल है, लेखक/लेखिका के निजी विचार हैं, तीसरी जंग हिंदी का कोई सरोकार नहीं है!