#ममता बनर्जी_की_मानसिक_ताक़त_को_सलाम_करता_हूँ : अतुल सिंह का लेख

#ममता बनर्जी_की_मानसिक_ताक़त_को_सलाम_करता_हूँ : अतुल सिंह का लेख

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बिल्कुल ठीक, बहुत जरूरी और बेहद सामयिक ट्रीटमेंट दे रही हैं वे इन दंगाइयों को। उनकी ये बात बिल्कुल सही है कि ये जहां भी जाते हैं, अपने साथ अश्वमेध का घोड़ा लेकर चलते हैं। ताकत आजमाने, दो दो हाथ करने और हिंसा का तांडव मचाने की योजना लेकर ही निकलते हैं घर से। देश के किसी भी प्रदेश में इनके प्रवेश का इतिहास देख लीजिए, ये जहां पहुंचते हैं वहीं आग बरसने लगती है। वही खून बहने लगता है। वही दो चार जाने-अनजाने गरीब गुरबा लड़कों की जान का हवन करते हैं और बाद में राग धर के रोते हैं, मेरा कार्यकर्ता मार डाला रे। लोकतंत्र की हत्या हो गयी रे। और ये सारा घमासान केवल इसलिए कि जैसे तैसे, ऐसे या वैसे, येन केन प्रकारेण कुर्सी पर कब्जा करें और लोकतंत्र की हत्या करने या चीर उतारने का मौका इन्हें मिले। पूरा देश अपनी शराफत का मारा इनकी गुण्डागर्दियाँ देख रहा है, सह रहा है। कोउ नृप होय हमै का हानी। चेरी छाँडि न होबै रानी।ये दंगाई आजमा चुके हैं देश की इस खामोश मानसिकता को। देश का लोकतांत्रिक मिजाज इनकी बदतमीजियों को नजरअंदाज करता गया, सभ्य समाज इन्हें सिर पर बैठाता गया और ये अपने मुंह मियां चाणक्य बनते गए, हवा में मूंछें ऐंठते गए। इनकी गुंडई वाली हिंसक और हत्यारी मानसिकता को जैसे को तैसा वाला जवाब देने वाली देवी तो बंगाल में प्रकटी है।

बंगाल का मिजाज बदल रहा है शाह साहब, अब रोते क्यो हो! करो मुकाबला। तुमको चूहा साबित करके बबूल के कांटों में टांग देगी ममता दीदी, लिख के रख लो। लोकतंत्र का ताना खाली उसके लिए है? तुम्हारे लिए पैतृक जागीर है बंगाल और भारत? चिल्लाओ जय श्री राम, वो कह रही है कि बंगाल का नारा जय श्री दुर्गा है। तुम चीखो भारत माता की जय, वो कह रही है कि नेता जी ने हमे जय हिंद का नारा दिया था। तुम बिलबिलाओ बंगाल की जनता बंगाल की जनता, वो कह रही है कि यूपी बिहार गुजरात के लोग हैं ये। तुम टेसुए बहाओ कि मेरी जान चली जाती, वो कह रही है कि ईश्वरचंद विद्यासागर की प्रतिमा तुमने तोड़ी है। तुम करो अपनी नफरती राजनीति, उसने तुम्हारी प्रतिरोधी राजनीति खड़ी कर दी है। ईश्वर चंद विद्यासागर, जय हिंद और दुर्गा, ये ममता दीदी के वे प्रतीक हैं, जिनके पीछे बंगाल की अस्मिता खड़ी है। बिल्कुल वैसे ही जैसे राम और राष्ट्रवाद की अकेली ठेकेदारी तुमने ली हुई है। करो तुम अपनी घिसी पिटी हिंसक राजनीति, वो तुम्हे चारो खाने चित करने जा रही है। और बुलाओ दूसरे राज्यों से भीड़, खड़ा करो एक और महाराष्ट्र, एक और गुजरात, देखना तुम्हारी इस घटिया राजनीति का परिणाम ये होगा कि अब यूपी बिहार वाले बंगाल से भी भगाए जाएंगे। यही दे सकते थे तुम यूपी बिहार को। अब सोचो यूपी बिहार के लड़कों, क्या होना है तुम्हारा। क्या सोचते हो कि प्रियंका शर्मा की गिरफ्तारी यूँ ही हो गयी? ममता दीदी अपना दीर्घकालिक जवाबी गेम खेलने उत्तर रही है अब। देशभर को पहचान करायी है ममता बनर्जी ने कि देख लो ये हैं बाहर से लाये हुए लोग। प्रियंका शर्मा अब बीजेपी की कार्यकर्ता नही, ममता बनर्जी की जवाबी राजनीति का टूल बनेगी। दो चार पीढ़ियों पहले से बंगाल में बसे यूपी बिहार वालों के लिए भी मुश्किल घड़ी आ खड़ी होने वाली है। करना पड़ सकता है बंगाल से भी पलायन। ये तुम्हारी देन है दंगाइयों! अब रोओ चाहे घिघियाओ, तुम्हारी घिनौनी पॉवर पोलटिक्स का सही जवाब ममता बनर्जी ही हैं
Prem Prakash Sir…

Atul Singh की वाल से साभार..