नियेन्दरथाल मोदी परिन्द बचित्तर को अपने राहडार पर लाते हुए

नियेन्दरथाल मोदी परिन्द बचित्तर को अपने राहडार पर लाते हुए

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Pradeep Kasni

सट्टाख़ोरों और फ़ीडबैक के हवाले से गणना से क़ब्ल कांग्रेस की सीटें कम से कम बताने का एक खेल चल रहा है और सुन सुनकर काफ़ी लोग कुछ कुछ परेशान भी हुए जा रहे हैं।

हरयाणा में ही पहले कहा गया कि कांग्रेस तो तीन, और हद से हद चार जीत रही है। फिर कहा, एक बाब्बू-बेटा ही जीत रहे हैं और बाक़ी सब हार रहे हैं। लेटेस्ट यह आयी कि रोहतक भी हार रहे हैं।

इससे पहले कि वे सोनीपत को भी डाउटफ़ुल कहने लग पड़ें, आप यूं करो कि इन फ़िगरों का शीर्षासन करवा दो, उसके बाद पढ़ोगे तो सच्चाई और सही आंकड़े के ज़्यादा नज़दीक रहोगे।

बहरहाल, हम अब भी कहते हैं 6+, अर्थात् छह या छह से ज़्यादा।

“छह से ज़्यादा” क्या, एक दोस्त पूछते हैं।

छह से ज़्यादा सात, आठ, नौ, और दस।

तो दस बटा दस (10/10) भी रह सकती है कांग्रेस ?

क्यों नहीं, आज बीजेपी के पास एक भी साबुत और साबित कैन्डिडेट है क्या ? ऐसा एक भी नाॅमिनी जिसका अपना नाम अपना चेहरा भी कुछ बचा हुआ हो? राव इन्दरजीत भी नहीं, राव साहब भी चौकीदार होकर रह गये ! …तो लोगों पर भरोसा करो, और हां, काउन्टिंग एजेन्ट पढ़े-लिखे और मज़बूत लोग हों और 23 मई तक मशीनों का सेंधमारों से चौकीदारा भी ज़रूरी होगा क्योंकि —

है तो चौकीदार चोर ही। राफ़ाएल का ही नहीं, लोकशाही का भी !


Mohammad Arif Dagia

बंगाल हिंसा : EC की कार्रवाई से भड़कीं ममता, मोदी-शाह पर लगाया गंभीर आरोप ।

चुनाव आयोग ने बंगाल में हुई हिंसा के बाद बड़ी कार्रवाई की है. चुनाव आयोग की कार्रवाई के बाद बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि यह सब भाजपा के कहने पर हुआ है. सातवें चरण के चुनाव के पहले पश्चिम बंगाल में अजीबो-गरीब स्थिति उत्पन्न हो गई है. चुनाव आयोग ने राज्य के प्रधान सचिव और गृह सचिव को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है. फैसला आने के बाद सीएम ममता बनर्जी ने बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने शाह के इशारे पर फैसला दिया है. ममता ने आरोप लगाया कि मुकुल रॉय सारी साजिश रच रहे हैं. ममता ने कहा कि मोदी-शाह ने चुनाव आयोग से यह फैसला करवाया है. ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का फैसला अनैतिक और संवैधानिक है और इसका जमकर विरोध किया जाएगा ///

जब बीजेपी नेताओं पर कार्रवाई करने की बात आती है तो चुनाव आयोग अपनी बेबसी का प्रदर्शन करने लगता है और कहता है कि उसके पास बहुत ” सीमित अधिकार ” हैं ,लेकिन बात बंगाल की आती है तो वह राज्य के प्रधान सचिव और गृह सचिव तक को हटा देता है।चुनाव आयोग से पूछा जाना चहिए कि उसके पास अचानक से ये वृहत अधिकार कहाँ से आ गए कि उसने इतनी बड़ी कार्रवाई कर दी?
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मोदी के शासन में बहुत सारी संवैधानिक संस्थाओं ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है और चुनाव आयोग का नाम इस फेहरिश्त में पहले नम्बर पर लिखा जाना चाहिए ///

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ईश्वरचन्द्र बन्दोपाध्याय उर्फ़ ईश्वरचन्द्र विद्यासागर (१८२०-१८९१) बंगाल के पुनर्जागरण के स्तम्भों में से एक थे। ब्राह्मण थे, विद्वान थे, सो विद्या(के)सागर कहलाने लगे थे।

बंगाल में पहली बार लड़कियों के पढ़ने के लिये स्कूलों की ज़रूरत समझनेवाले। अनेक ऐसे स्कूल खोले भी।

उनकी कोशिशों से ही विधवा-पुनर्विवाह कानून (१८५६) बना। वह बच्चियों की शादी की कुप्रथा को रोकने को भी आगे आये थे।

वह एक लिखने-पढ़नेवाले, भला सोचनेवाले और कुल मिलाकर आगे की ओर देखनेवाले पंडित थे।

संघ को उनके काम से और नाम से नफ़रत ही हो सकती थी ! सो है।

Pardeep Sharma