अमरीका का बग़दाद व तेहरान के विरुद्ध मानसिक युद्ध

अमरीका का बग़दाद व तेहरान के विरुद्ध मानसिक युद्ध

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अमरीकी सरकार ने अपनी ईरान विरोधी कार्यवाहियों और पश्चिम एशिया के क्षेत्र में हस्तक्षेप की कोशिशों के अंतर्गत अपने ताज़ा क़दम के तौर पर ईरान व इराक़ के संबंधों के ख़िलाफ़ मानसिक लड़ाई छेड़ दी है।

अमरीकी सरकार ने वैसे तो इस्लामी गणतंत्र ईरान की स्थापना के समय से ही इस देश के ख़िलाफ़ कार्यवाहियां की हैं लेकिन पिछले एक साल में उसकी इन कार्यवाहियों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। अमरीका के ये कार्यवाहियां प्रत्यक्ष भी हैं और परोक्ष भी। अमरीकी सरकार ईरान के ख़िलाफ़ कुप्रचार करके और मानसिक युद्ध छेड़ कर यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह ईरान के साथ अपने टकराव को सैन्य टकराव की दिशा में ले जाना चाहती है। मानसिक युद्ध के अंतर्गत अमरीका की एक अन्य कार्यवाही बग़दाद में अपने दूतावास और अरबील में अपने कोन्सलेट से अनावश्यक कर्मियों को वापस बुलाना है। अमरीका के इस क़दम का मुख्य लक्ष्य ईरान पर मानसिक दबाव डालना और इराक़ सरकार को स्वयं सेवी बल हश्दुश्शाबी को सीमित व नियंत्रित करने के लिए बाध्य करना है।

ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की परोक्ष कार्यवाहियों के संबंध में इराक़ के पूर्व प्रधानमंत्री इयाद अल्लावी के बयान की ओर संकेत किया जा सकता है। यह बयान पूरी तरह वाॅशिंग्टन सरकार से समन्वित है। अल्लावी ने अश्शरक़िया टीवी से बात करते हुए दावा किया है कि अमरीकी अधिकारियों ने उन्हें सूचना दी है कि ज़ायोनी शासन की गुप्तचर सेवा ने ईरान, सीरिया व ग़ज़्ज़ा में बैलिस्टिक मीज़ाइलों के एेसे लांचरों का पता लगाया है जिनका निशाना फ़ार्स की खाड़ी के अरब देशों की ओर है। अल्लावी का यह बयान इस बात का सूचक है कि अमरीका, अपने ईरान विरोधी लक्ष्यों के लिए इराक़ के वर्तमान अधिकारियों को इस्तेमाल करने की ओर से निराश हो चुका है और अब वह एेसे लोगों को इस्तेमाल कर रहा है जिनका कोई विशेष राजनैतिक स्थान नहीं है।