गांधी की हत्या में गोडसे के साथ जिस दूसरे आदमी को सज़ा हुई थी उसका नाम नारायण आप्टे था

गांधी की हत्या में गोडसे के साथ जिस दूसरे आदमी को सज़ा हुई थी उसका नाम नारायण आप्टे था

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Satyendra PS

यूपी के बारे में चुनावी अनुमान लगा रहे लोगों के ध्यानार्थ।

अम्बेडकर नगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, फैजाबाद, बाराबंकी, बहराइच, गोंडा, बस्ती, डुमरियागंज वगैरा में कुर्मियो ने भाजपा को वोट नहीं किया। यहां तक कि बरेली में संतोष कुमार गंगवार को भी कुर्मी वोट नहीं मिला है, भले वह चुनाव जीत जाएं। तराई बेल्ट के खेतिहर कुर्मी भाजपा को बाय बाय कर चुके हैं।

कुर्मी वोट मोटे तौर पर यूपी में 50 प्रतिशत वोट सपा बसपा में गया है। 30% भाजपा में और 20% कांग्रेस में।

Pradeep Kasni

गांधी की हत्या में गोडसे के साथ जिस दूसरे आदमी को सज़ा हुई थी उसका नाम नारायण आप्टे था।

वह ब्रिटिश गुप्तचर संगठन का एजेंट था और उसे इस काम के लिये नियमित पैसे मिलते थे। वह एक दुश्चरित्र व्यक्ति था। उसने एक सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाये जिसके फलस्वरूप वह बालिका गर्भवती हो गई थी।

गांधी को मारने में भले ही गोली गोडसे ने चलाई थी लेकिन उसका गुरु नारायण आप्टे ही था। गांधी की हत्या ब्रिटिश गुप्तचर संगठन ने इसलिये करवाई थी क्योंकि गांधी ने बिहार और बंगाल के दंगे जादुई तरीके से शांत करवा दिये थे और इसके बाद गांधी ने घोषणा करी थी कि अब वे भारत से हिंदुओं को वापिस पाकिस्तान लेकर जायेंगे और पकिस्तान से मुसलमानों को वापिस भारत लेकर आयेंगे और आबादी के इस स्थानातंरण को वो स्वीकार नहीं करेंगे।

गांधी की इस योजना से अंग्रेज घबरा गये क्योंकि पकिस्तान को तो पश्चिमी साम्राज्यवादी खेमे ने अरब के तेल क्षेत्र और एशिया पर अपना दबदबा बनाये रखने के लिये एक फौजी अड्डे के रूप में बनाया था, उन्हें लगा कि गांधी हमारा बना बनाया खेल बिगाड़ सकता है इसलिये उन्होंने अपनी ही पैदाइश हिन्दू महासभा और संघ में अपने लोगों को गांधी को खत्म करने का आदेश दे दिया।
— हिमांशुकुमार साभार

Satyendra PS

गांधी के प्रति यह व्यापक सम्मान ही है कि जब चितपावन ब्राह्मण आतंकी नाथूराम गोडसे ने उन्हें गोली मारी तो दिल्ली की सड़क पर कम्युनिष्टों का एक बड़ा जुलूस निकला और वो नारे लगा रहे थे कि हत्या का बदला लिया जाएगा।

उस समय पटेल ने कहा कि बदला लेने की मानसिकता गांधी के सिद्धांतों के खिलाफ है। हत्या करने वाले पागल और वैसी मानसिकता वाले शैतानों की झुंड हैं। इनको चिह्नित करें और उनका बहिष्कार करें। ऐसी मानसिकता रखने वालों की सूचना सरकार को दें और सरकार उनसे निपट लेगी। हमें पागलों के पीछे पागल नहीं बनना है।


Asif Hussain

ध्रुव त्यागी की बेटी को माइग्रेन का दर्द उठा। जिन्होंने झेला है, उन्हें पता है कि इस दर्द में क्या हाल होता है। वे बेटी को लेकर अस्पताल गए। वापस लौट रहे थे कि आलम ने अपने तीन-चार साथियों के साथ उनका रास्ता रोका। पिता छेड़खानी का विरोध नहीं करेगा तो कौन करेगा? बहस को टालकर वे किसी तरह अपनी बीमार बेटी को घर छोड़कर आलम के पिता से उसकी शिकायत करने उसके घर गए। वहाँ पर बजाय अपने आवारा लड़के को डाँटने के पूरे परिवार ने उन पर हमला कर दिया। आलम की कुमाता ने घर के अंदर से चाकू लाकर दिया। उसके बाद आलम के भाइयों ने ध्रुव को पकड़ लिया और आलम ने उनपर चाकू से ताबड़तोड़ वार किया। आलम की बहनों ने पत्थर से उनके हाथ-पैर कुचले। उनके नाखून उखाड़े गए। अपने पिता पर हमला होते देख लड़की का भाई अपने पिता के ऊपर लेट गया। इस पर भी चाकू से वार हुए। दस से अधिक जगह चाकू गोदे जाने से ध्रुव की मृत्य हो गई। 11 लोगों ने मिलकर एक बूढ़े पिता को सिर्फ इसलिए बेरहमी से मार डाला कि वे अपनी बेटी को दरिंदों से बचा रहे थे। ध्यान दीजिएगा कि, वे लड़ नहीं रहे थे बल्कि लड़के के पिता से शिकायत करने गए थे। अभी उनका बेटा icu में है। पता नहीं है कि बचेगा या नहीं!

(साभार)

कुछ लोग इसे कम्युनल रंग दे रहे हैं, पर पता होना चाहिए आलम जैसे दरिंदे कमला या जमीला में फर्क नही करते वो तो हर किसी के लिए घातक होता है।

जान अब्दुल्लाह

इसकी इंजीनियरिंग आपको खुद करनी पड़ेगी कि जब जितेन्द्र मेज़ पर खाना खाने के लिए मारा जाता है और पूरी शादी में कोई एक गवाह नही मिलता

और

जब भाजपा का माध्यम वर्गीय नेता धर्मेंद्र सिलानी अपने भाई राजा सिंह को कांग्रेस को वोट देने पर तीन गोलियां चलाकर मार डालता है

और

जब एक बाप अपनी बेटी समेत उसके पति को जला देता है

तब Chandan Pratihast और इंडिया गेट पर रोने वाले रोतडु ऐसी पोस्ट क्यो नही बना पाते है जैसी पोस्ट या रुदाली वह ध्रुव त्यागी की मौत पर करते है??

आखिर क्यों शुरू की 3 वारदातों में हुई 4 मौतों के कारण उनको यह नही दिखा कि मारने वाले का धर्म क्या था?? अगर इंडिया गेट पर पढ़ लिख चुका वर्ग यह कहता है कि हिन्दू के मरने पर सन्नाटा क्यों? तो इसी वर्ग से यह पूछा जाना चाहिए कि क्या उन्होंने शोर मचाकर सन्नाटा तोड़ा था जब नोटबन्दी में 100 से ज़्यादा हिन्दू भाई मरे थे, ऊपर के 3 कांडो में 4 लोग मारे गए थे।

यह इंजीनियरिंग आपको करनी है कि 50 के आसपास हुई लिंचिंग में, 2002 में ,1984 में , 2013 में 1989 में जब किसी दलित, सिख और मुस्लिम ने आज तक यह नही कहा कि ” हिन्दुओ ने मारा” इसकी जगह वह कहते है ” एक संघटन के गुंडों ने मारा”” तो फिर चंदन जैसे लोग चंदन लगाकर कैसे यह कहते है कि ध्रुव को मुस्लिमो ने मारा।

यह इंजीनियरिंग आप नही करेंगे तो आपकी इंजीनियरिंग हो जाएगी और फिर आप रोयेंगे जैसे किसान और जव….

खैर छोड़ो , मैं चाहता हूँ आपके कलेजे ठंडे हो ही जाए जैसा कि आपकी मांग है

 

Disclaimer : लेख सोशल मीडिया में वॉयरल है, लेखक/लेखिका के निजी विचार हैं, तीसरी जंग हिंदी का कोई सरोकार नहीं है!