#मैं उस बहन का भाई हूं जिसके बाप ने अपनी बेटी की इज़्ज़त के ख़ातिर तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया

#मैं उस बहन का भाई हूं जिसके बाप ने अपनी बेटी की इज़्ज़त के ख़ातिर तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया

Posted by

Torab Niazi

#ध्रुव_त्यागी की बेटी को माइग्रेन का दर्द उठा। जिन्होंने झेला है, उन्हें पता है कि इस दर्द में क्या हाल होता है। वे बेटी को लेकर अस्पताल गए। वापस लौट रहे थे कि #आलम ने अपने तीन-चार साथियों के साथ उनका रास्ता रोका। पिता छेड़खानी का विरोध नहीं करेगा तो कौन करेगा? बहस को टालकर वे किसी तरह अपनी बीमार बेटी को घर छोड़कर आलम के पिता से उसकी शिकायत करने उसके घर गए। वहाँ पर बजाय अपने आवारा लड़के को डाँटने के पूरे परिवार ने उन पर हमला कर दिया। आलम की कुमाता ने घर के अंदर से चाकू लाकर दिया। उसके बाद आलम के भाइयों ने ध्रुव को पकड़ लिया और आलम ने उनपर चाकू से ताबड़तोड़ वार किया। आलम की बहनों ने पत्थर से उनके हाथ-पैर कुचले। उनके नाखून उखाड़े गए। अपने पिता पर हमला होते देख लड़की का भाई अपने पिता के ऊपर लेट गया। इस पर भी चाकू से वार हुए। दस से अधिक जगह चाकू गोदे जाने से ध्रुव की मृत्य हो गई। 11 लोगों ने मिलकर एक बूढ़े पिता को सिर्फ इसलिए बेरहमी से मार डाला कि वे अपनी बेटी को दरिंदों से बचा रहे थे। ध्यान दीजिएगा कि, वे लड़ नहीं रहे थे बल्कि लड़के के पिता से शिकायत करने गए थे। अभी उनका बेटा icu में है। पता नहीं है कि बचेगा या नहीं।

आप विश्वास कीजिये कि ये पोस्ट लिखते हुए ही गुस्से और दुःख के मारे आँखें गीली हो रही हैं।

ये मसला हिन्दू मुस्लिम का नहीं है बल्कि ये मसला है हिंदुस्तान का आप कैसा हिंदुस्तान बना रहे हैं इसको, मैं जानता हूँ आज मैं अपनों से ही गालियां खाने वाला हूँ, उसकी फिक्र नहीं है, बात आती है सच के साथ खड़े होने की, बात आती है एक नई पीढ़ी को प्रेम सद्भाव वाला हिंदुस्तान देने की और अगर आप अब भी इन बातों से एग्री नहीं है तब आपको सच में जरूरत है अपना मानसिकता बदलने की।

मैं #ध्रुव_त्यागी के साथ उसकी जात देख कर के नहीं बल्कि उसकी लाचारी देखकर के खड़ा हूं मैं उस बहन का भाई हूं जिसके बाप ने अपनी बेटी की इज्जत के खातिर तड़प तड़प कर अपना दम तोड़ दिया है । 

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Disclaimer : लेखक के निजी विचार हैं, तीसरी जंग हिंदी का कोई सरोकार नहीं है