जंगल मिटता जा रहा था लेकिन पेड़ कुल्हाड़ी को वोट दे रहे थे : अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

जंगल मिटता जा रहा था लेकिन पेड़ कुल्हाड़ी को वोट दे रहे थे : अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

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Joher Siddiqui
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जनता ने मोदी जी को जनादेश दिया है।

जी, ये सच है, लोकतंत्र में जनता ही सबकुछ है, वो जिसे चाहे अपना वोट जनादेश के रूप में दे कर किसी भी पार्टी को सत्ता की कुर्सी तक पहुँचा सकती है।

इतना तय है, देश मे मोदी जितना शक्तिशाली नेता शायद कोई नहीं है, हज़ार झूठ और जूठे वादों के बावजूद जनता उन्हें चुन कर सत्ता तक पहुँचाया है। हालांकि मोदी सरकार पिछले 5 साल में पूरी तरह से नाकाम रही थी, फिर भी जनता ने मोदी को जनादेश दिया, क्यों दिया इसका विश्लेषण किसी और दिन करेंगें।

लोकतंत्र में यक़ीन रखने वाले लोगों को चुनी गई सरकार से क्या चाहिए? संविधान और लोकतंत्र की हिफाज़त, करप्शन से आज़ादी, अच्छी अर्थव्यवस्था, रोज़गार, व्यवसाय में सहायता, कर में छूट और साम्प्रदायिकता से आज़ादी के साथ सामाजिक सौहार्द।

अगर मोदी इन सभी चीजों मुद्दों पर ईमानदारी से काम करते है, और देश को खुशहाली की तरफ़ लेकर जाते है, फिर देश को और क्या चाहिए।

लोकतंत्र के सहारे जनता द्वारा चुनी गई सरकार के नेता मोदी जी को प्रधानमंत्री बनने की बधाई, उम्मीद है, वो जिस लोकतंत्र के सहारे चुने गए है, उसकी हिफाज़त करते हुए देश हित मे काम ज़रूर करेंगे।।

Benjamin Netanyahu

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@netanyahu
ברכות מקרב לב לך, ידידי @Narendramodi, על ניצחונך המרשים בבחירות!
תוצאות הבחירות הן אישור נוסף למנהיגותך ולדרך בה אתה מוביל את הדמוקרטיה הגדולה בעולם. יחד נמשיך לחזק את הידידות הגדולה בינינו ובין הודו וישראל ולהובילה לפסגות חדשות.

כל הכבוד, ידידי! 🇮🇱👐🇮🇳

Dr. S.Y. Quraishi

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@DrSYQuraishi
Results declared 188 after counting of approximately 6600 vvpats. Still no mismatch. Great going.

डा.सीमा

@seematri6
बुआ के आशीर्वाद से जीती हुई सीट भी हार गई,, , , और छूओ पैर. . . 😜😜😜

Manak Gupta

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@manakgupta
मोदी लहर ने TRS का क़िला भी नहीं छोड़ा. BJP ने तेलंगाना में 4 सीटें जीत ली हैं. निजामाबाद में मुख्यमंत्री KCR की बेटी ‘के कविता’ को भी BJP उम्मीदवार अरविंद धर्मापुरी ने 70,875 वोटों से हरा दिया है

Munza Mushtaq

@munza14
You mean you look forward to continuing the warm and constructive relationship with India for just a few more months, because no one with a functioning brain will ever elect you again, even if you tried to buy the racist votes by releasing the master of racism today.

Narendra Modi

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@narendramodi
धन्यवाद काशी!

इस महान भूमि की सेवा करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। लोकसभा में एक बार फिर काशी का प्रतिनिधित्व करने को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं। काशी के विकास के लिए हम सब मिलकर काम करेंगे।

काशी के भाजपा कार्यकर्ताओं ने जो कठिन परिश्रम किया है, इसके लिए उन सबका आभार।

1. Misa Bharti- Lost
2. Prakash Ambedkar- Lost
3. Prakash Raj- Lost
4. Kanhaiya- Lost
5. Urmila- Lost
6. Shatrughan- Lost
7. Yakub Qureshi- Lost
8. Supriya- Lost
9. Dimple Yadav- Lost
10. Deve Gowda- Lost
11. Digvijaya- Lost
12. Atishi- Lost
13. Jyotiraditya- Lost

Ramlal

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@Ramlal
देशवासियों, आपने मुझे इतनी बड़ी जिम्मेवारी दी है, तो मैं फिर से कहूंगा कि मैं मेरे लिए कुछ नहीं करूंगा।

मैं सार्वजनिक रूप से कहना चाहूंगा कि मेरे समय का पल-पल, मेरे शरीर का कण-कण सिर्फ और सिर्फ देशवासियों के लिए है: प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी


Youth Congress

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@IYC
हमारी लड़ाई एक विचारधरा की लड़ाई है। हम एक साथ लड़ कर अपनी विचारधारा को जिताएंगे।

जय हिन्द l

Dimple Yadav

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@dimpleyadav
मैं विनम्रता के साथ जनादेश को स्वीकार करती हूँ और अपनी सेवा का अवसर देने के लिए कन्नौज को धन्यवाद देती हूँ।

I humbly accept Kannauj’s mandate and thank the people of Kannauj for having given me the opportunity to work for them.

Rofl Punya

@RoflPunya
जेल में सजा काट चुकी गोडसे जिंदाबाद कहने वाली हमारे देश की सांसद बन गई है?

अब आप ही सोच सकते है हमारे देश को क्या चाहिए? फ़ालतू का हम लोग सच और इंसाफ के लिए सबको जागरूक करते है।

हमे भी सच्चाई का साथ छोड़ के देश के बर्बादी में शामिल होकर ऐसे लोगो को बढ़ावा देना चाहिए।

Wasim Akram Tyagi
यूपी गठबंधन में दलित मुस्लिम गठबंधन तो दिख रहा है, लेकिन यादव वोट गठबंधन को नही मिल पाया है, वह भगवे चोले में रंग गया है।

Sambhal
जहाँ प्रदेश व देश मे भाजपा को बड़ा बहुमत मिला है वही मुरादाबाद मण्डल मे सपा-बसपा को प्रचंड समर्थन मिला, मण्डल की सभी छः सीटों पर गठबंधन का हुआ क़ब्ज़ा :-

१) सम्भल से सपा के डॉ. शफीक उर रहमान बर्क
२) रामपुर से सपा के मौहम्मद आज़म ख़ान
३) मुरादाबाद से सपा के डॉक्टर एस टी हसन
४) अमरोहा से बसपा के दानिश अली
५) बिजनौर से बसपा के मलूक नागर
६) नगीना से बसपा के गिरीश चन्द

सभी को जीत की दिली मुबारकबाद।

Abhay Pandey
·
राहुल गांधी
आपने एक बहुत बड़ी लड़ाई लड़ी। साथ दिखने वाले लोग भी आपके साथ नहीं थे। आप अपने नियंत्रण से बाहर अनुचित साधनों और चीजों से हार गए थे। अब लोग आपको और नीचा दिखाने का प्रयास करेंगे। लड़ाई बहुत बड़े लोगों से थी। आपने जो न्याय और सत्य का रास्ता पकड़ा है, उसे मत छोड़ना।

Saleem Akhter Siddiqui
ये विशुद्ध रूप से मोदी की जीत है। इसमें भारतीय जनता पार्टी गायब है। एक-एक वोट मोदी को पड़ा है। अंध राष्ट्रवाद, सापं्रदायिकता की जीत है। रोजी, रोजगार, महंगाई, भ्रष्टाचार, खेती किसानी मुद्दे देश की जनता के लिए अहम नहीं हैं। इसलिए अब वो जाने जिन्होंने मोदी को वोट दिया और मोदी जानें। आज के बाद लंबे अरसे तक कोई राजनीतिक पोस्ट नहीं होगी। जब देश में यह हालत हो जाए कि रोजगार की बात करो तो वह मोदी और देश विरोध कहलाए तो हम जैसे लोगों को साइड हो जाना ही चाहिए। और हां, जिन लोगों ने सांसद नहीं, प्रधानमंत्री चुना, उन्हें अपने सांसद से कोई शिकायत करने हक नहीं रहा।

Mohd Naseem Urf Gulzar
बंगाल टाइगर नुसरत जहा जी को सांसद बनने पर बहुत बहुत बधाई एवं


Ashutosh Kumar
“तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा
तिरे सामने आसमाँ और भी हैं”
— अल्लामा इक़बाल की एक ग़ज़ल
————–

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं
अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं

तही ज़िंदगी से नहीं ये फ़ज़ाएँ
यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी हैं

क़नाअत न कर आलम-ए-रंग-ओ-बू पर
चमन और भी आशियाँ और भी हैं

अगर खो गया इक नशेमन तो क्या ग़म
मक़ामात-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ और भी हैं

तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा
तिरे सामने आसमाँ और भी हैं

इसी रोज़ ओ शब में उलझ कर न रह जा
कि तेरे ज़मान ओ मकाँ और भी हैं

गए दिन कि तन्हा था मैं अंजुमन में
यहाँ अब मिरे राज़-दाँ और भी हैं!

Pradeep Kasni

जंगल मिटता जा रहा था लेकिन पेड़ कुल्हाड़ी को वोट दे रहे थे.

क्यों, उन्हें लगता था कि कुल्हाड़ी का हत्था उनकी अपने ही ज़ात और मज़हब का है !

Ashutosh Kumar
यह पूरी तरह मैन्युफैक्चर्ड यानी विनिर्मित जनादेश है। इसे पिछले पांच वर्षों में टीवी और व्हाट्सएप के सहारे विनिर्मित किया गया।

इस प्रक्रिया की शुरुआत जेएनयू को देशद्रोह के अड्डे के रूप में प्रचारित करने से हुई और यह पुलवामा में उरूज पर पहुंची।

जेएनयू और पुलवामा कैसे घटित हुए, कोई नहीं जानता। जानना जरूरी भी नहीं है। जनादेश के विनिर्माण में महत्व घटना का नहीं, उसके विरचित वृतांत का होता है।

वृत्तांत चूंकि वृत्तांत है, वह घटना पर निर्भर नहीं है। वह घटना को परिकल्पित कर सकता है। वृत्तांत को विश्वसनीय बनाने के लिए जरूरत सिर्फ़ सक्षम माध्यम की है। टीवी और सोशल मीडिया के रूप में यह माध्यम मौज़ूद था और मोदीजी की मुट्ठी में था।

वृत्तांत यह रचा गया कि देश संकट में है। वह भीतरी और बाहरी दुश्मनों से घिरा हुआ है। दोनों तरह के दुश्मन एक दूसरे के साथ तालमेल में काम कर रहे हैं। इस महान संकट से देश को केवल मोदी जैसा छप्पन इंच वाला बचा सकता है।

विपक्ष के पास इसकी कोई काट न थी। हो भी नहीं सकती थी, क्योंकि टीवी और सोशल मीडिया पर वर्चस्व के मामले में वह मोदी जी का मुक़ाबला नहीं कर सकता था।

देश ख़तरे में के वृत्तांत की काट विपक्ष ने रोजगार, राफेल और किसान प्रश्न के वृत्तांत से करनी चाही। उसने इसे नागरिक ख़तरे में का वृतांत बनाना चाहा। इस काट को नाकाम होना ही था।

निजी संकट कभी भी देश के संकट से बड़ा नहीं हो सकता। इसीलिए इस चुनाव में बारबार यह सुनने को मिला कि एक जून खाएंगे पर मोदी को जिताएंगे।

विपक्ष कुछ भी कर लेता, वह राज्य के इशारे पर मीडिया द्वारा निर्मित संकट के इस वृतांत की काट नहीं कर सकता था। ऐसे विरचित वृत्तांतों की काट केवल जमीनी जनांदोलनों से हो सकती है।

लेकिन पिछले पांच वर्षों में आपने विपक्ष को किसी जनांदोलन की तैयारी करते देखा? राजनीतिक विपक्ष था कहाँ? सिर्फ़ छात्रों, बुद्धिजीवियों और किसानों ने विपक्ष का कुछ आभास पैदा किया, लेकिन वे राजनीतिक विपक्ष की जगह नहीं ले सकते थे।

जहां तक वाम की भूमिका का सवाल है, बंगाल में वाम के कम से कम 20 फ़ीसद वोट बीजेपी को गए। यह विडंबना बंगाल में वाम राजनीति के खोखलेपन के बारे में बहुत कुछ कह देती है।

आंदोलन कौन करेगा? सामाजिक न्याय की राजनीति अपनी आन्दोलनी धार खो चुकी। कांग्रेस जमाने पहले आंदोलन से उपराम हो चुकी। वाम आंदोलन की रही सही ऊर्जा भी खो चुका।

नहीं तो मौका सामने है। बेरोजगारी और मॉब लिंचिंग पर आंदोलन खड़े कीजिए। मोदी जीते हैं, मगर पहले से कमजोर हैं।विपक्ष हारा, मगर पहले से मजबूत है। आप चाहें तो उनका जीना हराम कर सकते हैं। बशर्ते ख़ुद अपना जीना भी हराम कर सकें।

Dharmendra Azad
अपनी शर्मनाक हार के लिए ईवीएम को दोष देना गलत है । म प्र में तो काँग्रेस की अपनी सरकार है, फिर ये सब कैसे सम्भव है ?

मुझे ये स्वीकार करने में बिल्कुल भी संकोच नहीं कि काँग्रेस ने जनता की आवाज को नहीं सुना, ज़रूरी मुद्दों से भटकते रहे और संगठन के जिम्मेदार लोग अपनी चापलूसी प्रदर्शित करने के लिए हाई प्रोफाइल सीटों पर फोटो खिचाने में लगे रहे ।

जनादेश में बदल रहे रुझानों को देखकर मैं बहुत निराश हूँ, लेकिन हताश नहीं!

जनता ने अगर मोदीजी को प्रचण्ड बहुमत दिया है तो निश्चित तौर पे विपक्ष में जिम्मेदार नेता का अभाव दिखा होगा। ऐसे समय में काँग्रेस और बाकी दलों को आत्म मंथन की जरूरत है ।


चुनाव में मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं था: कन्हैया कुमार
बेगूसराय से सीपीआई के उम्मीदवार कन्हैया कुमार ने कहा, ‘‘जनता के जनादेश से स्पष्ट है कि मतदान के समय लोगों के मन में यह बात रही होगी कि विपक्ष में विकल्प कौन बन सकता है। इसी का लाभ भाजपा को मिला है। 2014 में भाजपा को उत्साह के साथ वोट मिला था। इस बार ऐसा नहीं था। जहां तक बेगूसराय के चुनाव का सवाल है तो मेरे पास खोने के लिए कुछ भी नहीं था। जो भी जनादेश मिलेगा, वो निश्चित रूप से कुछ पाने जैसा ही होगा।’

 

Om Thanvi

@omthanvi
6h6 hours ago
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राष्ट्रवाद को रोग की संज्ञा तो प्रेमचंद ने दी थी: ‘कोढ़’ बताया था। राष्ट्रवाद 19वीं सदी में यूरोप में पनपा। बरबादी के दो-दो विश्वयुद्ध लड़े। राष्ट्रवाद की अवधारणा पर ही पाकिस्तान बना। संघ को भी राष्ट्रवाद भाता है। उग्र राष्ट्रवाद फासीवाद लाता है। इसके उदाहरण देखने को मिल रहे हैं।

 

Disclaimer : लेख सोशल मीडिया में वॉयरल है, लेखक/लेखिका के निजी विचार हैं, तीसरी जंग हिंदी का कोई सरोकार नहीं है!