हज़रत उस्मान رضی اللّٰہ عنہ ने जवाब दिया, जो नफ़ा तुम मुझे दे रहे हो, मेरे रब ने मुझे उससे बहुत ज़्यादा देने का वादा किया है

हज़रत उस्मान رضی اللّٰہ عنہ ने जवाब दिया, जो नफ़ा तुम मुझे दे रहे हो, मेरे रब ने मुझे उससे बहुत ज़्यादा देने का वादा किया है

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अल्लाह जिसके अमल को चाहता है बढ़ा देता है, वो फराख़ दस्त भी है और अलीम भी”
Firoj Khan
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एक दफा मदीना मुनव्वरा में क़हत पड़ गया- आसमान ने पानी बरसाना छोड़ दिया था और ज़मीन ने अनाज उगाने से इनकार कर दिया था- इस क़हत की वजह से पूरे शहर में गुरबत फैल गई थी लोग दाने दाने के लिए मुहताज हो गए थे-

हज़रत उस्मान गनी رضی اللّٰہ عنہबहुत बड़े ताजिर थे- उनकी तिजारत पूरे अरब में फैली हुई थी- उस दौरान उनका एक तिजारती क़ाफिला शाम से लौटा- उस क़ाफिले में एक हज़ार ऊंट थे- खाने पीने की अशियां के साथ जब ये क़ाफिला मदीना को पहुंचा तो लोगों को थोड़ी राहत हुई- बच्चे बूढ़े खुश हुए लेकिन जैसे ही ये क़ाफिला मदीने पहुंचा ताजिरों का एक वफ्द भी साथ साथ यहां पहुंच गया-

उस वफ्द ने हज़रत उस्मान رضی اللّٰہ عنہ से पूछा कि :क्या वो अपना माल फरोख्त करना चाहेंगे ? उनका इरादा था कि सारा माल खरीद लें और क़हत की वजह से मजबूर लोगों को महंगे दामों फरोख्त करके बहुत सारा नफा कमाएं- हज़रत उस्मान رضی اللّٰہ عنہ ने उनसे पूछा कि: आप इसकी क्या क़ीमत लगाते हैं? उन्होंने जवाब दिया कि: हम आपको दुगना नफा देंगे- यानी एक दीनार का माल दो दीनार में खरीदेंगे ! हज़रत उस्मान رضی اللّٰہ عنہ ने कहा कि: इतना नफा तो मुझे पहले से ही मिल रहा है- हज़रत उस्मान का जवाब सुनकर उन्होंने नफा और बढ़ा दिया-

फिर भी हज़रत उस्मान رضی اللّٰہ عنہ ने वही जवाब दिया कि: इतना तो मुझे पहले से ही मिल रहा है- उन्होंने नफा और बढ़ा दिया लेकिन अब भी हज़रत उस्मान ने यही कहा कि: इतना तो मुझे पहले से ही मिल रहा है- ये सुनकर वो ताजिर हैरान हुए- उन्होंने पूछा कि: उस्मान हम अहले मदीना को खूब जानते हैं, यहां कोई ताजिर ऐसा नहीं जो तुम्हारे माल को हमसे ज़्यादा क़ीमत में खरीदे- आखिर वो कौन है जो तुम्हे हम से ज़्यादा नफा दे रहा है?

हज़रत उस्मान رضی اللّٰہ عنہ ने जवाब दिया: *#अल्लाह* जो नफा तुम मुझे दे रहे हो, मेरे रब ने मुझे उससे बहुत ज़्यादा नफा देने का वादा किया है- ये कहकर हज़रत उस्मान ने अपने लोगों को हुक्म दिया कि: तमाम माल अहले मदीना और ज़रूरतमंदों के दरमियान तक़सीम कर दिया जाए- हज़रत उस्मान के सामने उस वक़्त क़ुरआन की ये आयत थी:

“जो लोग अपना माल अल्लाह की राह में सर्फ करते हैं उनके खर्च की मिसाल ऐसी है, जैसे एक दाना बोया जाए, और उससे सात बालें निकलें और हर बाल में सौ दाने हों, इसी तरह अल्लाह जिसके अमल को चाहता है बढ़ा देता है, वो फराख़ दस्त भी है और अलीम भी” البقرہ261