31 जुलाई 2019 को ‘परचम पार्टी ऑफ़ इंडिया’ को नये सिरे से खड़ा किया जायेगा, देश केवल ‘संविधान’ से चलेगा!

31 जुलाई 2019 को ‘परचम पार्टी ऑफ़ इंडिया’ को नये सिरे से खड़ा किया जायेगा, देश केवल ‘संविधान’ से चलेगा!

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31 जुलाई 2019 को ‘परचम पार्टी ऑफ़ इंडिया’ को नये सिरे से खड़ा करने की कोशिश है, जो काम अहमद सलीम ख़ान पीरज़ादा ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष परचम पार्टी’ ने शुरू किया था वो रुकेगा नहीं, PPI एक तहरीक़/मिशन है, सभी पुराने साथी, दोस्त फिर एक साथ आयें, देश के राजनैतिक हालात से सभी वाक़िफ़ हैं, ‘मौत’ सर पे मंडरा रही है, अपने घर तक आग के आने का इन्तिज़ार करेंगे तो बस्तियां खाक़ हो जायेगी, देश की मुख्यधारा की राजनैतिक पार्टियां किस/कितने दबाव में है, बताने की ज़रूरत नहीं, आप की, आप के वोट की ज़रूरत अब किसी को नहीं है, आप वोट दें या न दें, मतलब कि ‘वोट का अधिकार’ अपना समाप्त समझें, लोकसभा चुनावों में वोटों की गिनती से एक दिन पहले तक पूरा विपक्ष सुप्रीम कोर्ट के चक्कर लगा रहा था, EVM पर सवाल हर तरफ से उठ रहे थे, मगर चुनावों के नतीजे आने के बाद से चारों ओर ”सन्नाटा” है, उत्तर प्रदेश में बना ‘महागठबंधन’ टूट चुका है, चुनाव नतीजे आने के बाद मायवती ने EVM को हार का ज़िम्मेदार ठहराया था मगर बाद में उन्होंने कहा कि ‘यादवों’ ने वोट नहीं दिए, कांग्रेस पार्टी के अंदर खींचतान मची है, समाजवादी पार्टी को उनके अपने ही नुक्सान पहुंचा रहे हैं, चुनावों के नतीजे आने से पहले मुलायम सिंह यादव, अखलेश यादव, मायावती के खिलाफ CBI आय से अधिक संपत्ति मामले में क्लीन चिट दे देती है, अनिल अम्बानी राहुल गाँधी और नेशनल हैराल्ड के खिलाफ 5000 करोड़ की मानहानि का केस अचानक वापस ले लेते हैं, ये अचानक जो कुछ हुआ ‘वो’ अंदर की कहानी बयान कर देता है, किन मुद्दों/मसलों को लेकर क्या ‘सौदे’ हुए हैं ये केवल समझे जा सकते हैं,

परचम पार्टी ऑफ़ इंडिया भारत की राजनीती को जी भी शक्तियां प्रभावित कर ‘संविधान’ को ख़त्म करना चाहती हैं, उनको कामयाब नहीं होने देगी, देश कानून, संविधान से चलते हैं, लोगों की अपनी आकांक्षाओं और ‘मन’ के आधार पर कभी नहीं चलते हैं, भारत केवल ‘संविधान’ से चलेगा, संविधान की रक्षा हर हाल में की जाएगी, परचम पार्टी का एजेंडा ‘संविधान’ को लागू कर हर व्यक्ति को उसके अधिकार प्राप्त करवाना है….. परवेज़ ख़ान

Amir Zuven
क़ौम जनाज़ा बहुत शान से उठाती है। मेरा जनाज़ा भी शान ही से उठाएगी। लेकिन जब मैं मरूँ तो मेरी क़ब्र पर एक तख्ती लिखवा देना कि ये शख्स उस वक़्त भी न बिका जब सियासत की मंडी में इस्लाम के बड़े बड़े दावेदार बिकने के लिए लाइन में खड़े थे- इंजीनियर सालीम पीरज़ादा मरहूम
Remembering Saleem Peerzada Er on his 65th birth anniversary.