1984 सिखों का क़त्ले आम में एक को सज़ाए मौत और दूसरे को उम्र क़ैद

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फैसला सुनाने के लिए तिहाड़ जेल के अंदर ही अदालत लगाई गई। अदालत ने यशपाल को फांसी और नरेश सहरावत को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है।

भारत में 1984 में भड़के सिख विरोधी दंगे के मामले में महिलापुर इलाक़े में दो सिखों की हत्या के लिए दोषी ठहराए गए दो अभियुक्तों की सज़ा पर अदालत ने मंगलवार को अपना फ़ैसला सुनाया। अदालत ने अपने फ़ैसले में एक अभियुक्त को फांसी तो दूसरे को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है।

फैसला सुनाने के लिए तिहाड़ जेल के अंदर ही अदालत लगाई गई। अदालत ने यशपाल को फांसी और नरेश सहरावत को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है।

फैसला सुनाए जाने से पहले अदालत के बाहर सैकड़ों की तादाद में मौजूद सिखों ने प्रदर्शन किया। हर हालत से निपटने के लिए पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गये थे। हंगामे के आसार को देखते हुए पीड़ित व आरोपियों के परिवार के 2-2 सदस्यों के आलावा किसी को कोर्ट रूम में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गयी।

ज्ञात रहे कि अदालत ने पहली नवंबर 1984 को महिलापुर इलाके में दो सिख युवाओं की हत्या के आरोप में दो स्थानीय लोगों नरेश सहरावत व यशपाल सिंह को दोषी ठहराया था। इन अभियुक्तों पर घटना वाले दिन पीड़ित परिवार की दुकान में लूट करने, दंगा फैलाने, दो सिख युवकों को जिंदा जलाकर मारने, मृतकों के भाइयों पर जानलेवा हमला करने का दोष साबित हुआ था। अदालत ने अपने फैसले में माना था कि बेशक इस मामले में फैसला आने में 34 साल लगे, लेकिन पीड़ितों को आखिर इंसाफ मिला है। अभियोजन ने अभियुक्तों के लिए फांसी की सजा मांगी थी। (