ओवैसी भाइयों का विरोध बीजेपी – संघ से ज़यादा मुस्लिम “नामधारी” बुद्धिजीवी करते नज़र आते हैं! .

ओवैसी भाइयों का विरोध बीजेपी – संघ से ज़यादा मुस्लिम “नामधारी” बुद्धिजीवी करते नज़र आते हैं! .

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Mohammad Arif Dagia
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ओवैसी भाइयों का जितना विरोध बीजेपी -संघ के लोग या हिन्दू भी नहीं कर रहे हैं , उससे ज्यादा उनका विरोध मुस्लिम ” नामधारी ” बुद्धिजीवी करते नज़र आ रहे हैं .
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ओवैसी अगर कहीं से अपने उम्मीदवार खड़ा करे तो विरोध—
ओवैसी अगर अवलिया की मज़ार पर जाये तो विरोध …
ओवैसी किसी मुस्लिम-मुद्दे पर कुछ न बोले तो विरोध( कि बोल क्यों नहीं रहा)
ओवैसी याकूब मेमन के मामले में बोले तो विरोध ( कि वोट बैंक की राजनीती कर रहा ) ….///
और तो और …ओवैसी अगर लालू प्रसाद यादव से गठबंधन की बात करे तो भी ये सेक्युलर दल्ले उसी तरह लालू को भड़काने के लिए पहुच जाते हैं जैसे दीन से फेरने के लिए शैतान बन कर अबू जहल पहुंच जाता था ///
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अरे मियां भाई लोगों—–अब तो अपना मुनाफिकाना चेहरा दिखाना बंद करो .
आज़ादी के बहुत अरसे बाद एक सही और कद्दावर लीडर मिला है कौम को , जो कौम की आवाज़ को पूरी दमदारी के साथ उठा कर कौम के एक मुद्दे को ” राष्ट्रीय मुद्दा ” बना देने की कुव्वत रखता है .
वह जो कोई बात कहता है तो मीडिया सुनती है , उसकी बात पर मीडिया में हिन्दू-बुद्धिजीवी भी सहमत हो कर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ मुसलमानों के हक में बात करते दिखाई देते हैं , जिसके कारण उन चेनलों के खिलाफ नोटिस तक जारी हो जाती है .
आखिर तुम ओवैसी के खिलाफ ज़हर उगल कर क्यों कौम की नज़रों में गिरना चाह रहे हो ?
ओवैसी अगर बिहार में या कहीं भी अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतार रहे हैं तो उनकी विपक्षी-पार्टियों के पहले आप खुद क्यों उनकी मुखालिफत करने पे पेश-पेश हो रहे हो ?
आपके-हिसाब-से-ओवैसी-अपने-उम्मीदवार-न-उतारे-तभी-ठीक-होगा ?
याने-मुसलमान राजनीती में -ना-आयें-तभी-ठीक-होगा ?
याने-मुसलमान- अब-भी-मुलायम-लालू-नितीश-कांग्रेस-आदि-आदि-को-वोट-दें-वही-मुसलमानों-के-हक-में-सही-होगा ?/// अगर-ऐसा-ही-है-तो-अफ़सोस-है-मुझे-आपके-इस-विचार-पर कि ओवैसी अगर अपने उम्मीदवार उतारते हैं तो इससे भाजपा कि जीत पक्की हो जाएगी ///
पिछले लोकसभा चुनाव में ओवैसी ने कितने उम्मीदवार उतारे थे जिसके कारण बीजेपी को भारी बहुमत हासिल हुआ था ?
बीजेपी-के-डर-को-कांग्रेस-ने-बहुत-भुनाया-है-भाई—कम-से-कम-आप-तो-ऐसा-न-करिए///

इसलिए अब आप जैसे गुमराह बुद्धिजीवियों से गुज़ारिश है कि ओवैसी का विरोध कर खुद को संघी-भाजपाई सिद्ध न करें , कौम की नज़रों में गिरने का कुप्रयास न करें .अगर ओवैसी का समर्थन नहीं कर सकते तो कम से कम अपनी जुबान को बंद रखें और देखें कि ओवैसी जो कुछ कर रहे हैं उसका नतीजा क्या सामने आता है , //
याद रखिये—–मुसलमानों ने कांग्रेस , सपा , बसपा, लालू, मुलायम सब को वोट दे कर जिताया है …मगर इनको जिताने के बाद हर बार और हमेशा मुसलमान हारा ही है .
इसलिए आज के बाद चाहे हम चुनाव न जीत पायें , मगर हमारा वोट सिर्फ और सिर्फ MIM को जाएगा

लेकिन अपना वोट उनको किसी कीमत पर नहीं देंगे ….
जिन्होंने हमारे वोट की कभी कीमत नहीं समझी ,
जिन्होंने हमारा वोट ले कर भी हमारी पीठ में छुरा भोंका ///
( मोहम्मद आरिफ दगिया )
10/08/2017