चंद घंटों में मित्र देशों में तख्ता पलट कार्यवाहियों को नाकाम करा हमारी जांबाज़ भारतिया फौजों ने : मो. तारिक

चंद घंटों में मित्र देशों में तख्ता पलट कार्यवाहियों को नाकाम करा हमारी जांबाज़ भारतिया फौजों ने : मो. तारिक

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Mohammed Tarique
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भारत दोस्ती निभाता चंद घंटों में मित्र देशों में तख्ता पलट कार्यवाहियों को नाकाम करा हमारी जांबाज़ भारतिया फौजों ने : मो. तारिक
भोपाल ! ईराक, सीरिया फिर नार्थ कोरिया से अमेरिका को क्या लेना देना ! इन मुलकों में लोक्तन्त्र बहाल हों या नही जबकी अमेरिका के बहुत से मित्र देशों में लोक्तन्त्र बहाल नही तो ईराक से पेट्रोल, सीरिया से गेस और नार्थ कोरिया में खनिज पदार्थ ही वजह तो अमेरिका सहित संयुक्त राष्ट्र संघ के इन मंसूबों में कौन कौन से देश ! भारत और चाईना सीमा विवाद पर नार्थ कोरिया ने तो भारत का पक्ष रख चाईना को ललकारा जबकी अब अमेरिका नार्थ कोरिया को मिटाने के लिये जंग की पूरी त्यारी कर चुका तो भारत को भी खुल कर साथ न भी दे लेकिन विश्व गुरू के रूप में अपना बड़कपन्न दिखाना चाहिये !
क्या आपने कभी सोचा है कि अमेरिका ने इराक पर हमला करके सद्दाम हुसैन का तख्ता पलट क्यों किया था ? क्यों वो सीरिया से राष्ट्रपति बशर अल असद को हटाने पर तुला हुआ है और क्यों उसे अब नॉर्थ कोरिया के तानाशाह मार्शल किम जोंग उन से दिक्कत है ? इसका जवाब अगर आप ज़मीन के ऊपर ढूंढेंगे तो नहीं मिलेगा. जवाब जानना है तो ज़मीन के नीचे तलाशिए ! वहां मिलेगा क्योंकि ये सारा खेल ही ज़मीन के नीचे खेला जा रहा है. ऊपर जो होता हुआ आपको दिख रहा है वो बस दिखावा है ! असली खेल तो आज हम आपको दिखाएंगे. देखिए और समझिए दुनिया की राजनीति जैसी दिखती है वैसी होती नहीं !
भारत जैसा महान देश विश्व में कहां जहां अहिंसा-वादी स्वामी विवेकानन्द, महात्मा गांधी बापू, डा. भीमराओ अंबेडकर, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, लोह पुरूष सरदार ब्ल्लभ भाई पटेल, डा ए पी जे अबदुल कलाम सहित कई नाम चीन विश्व प्रसिद्ध हस्तियों ने जन्म लिया और जिनकी पहचान देश के नागरिकों के बीच आदर्श पुरूषों के रूप में ! उनके अनुयाईयों में से ही कुछ स्वार्थी त्तत्व आज भी हिंसक हैं तो वो अनुयाई कैसे यह एक बड़ा सवाल आपके बीच लाना चाहता हूँ कि जब 1947 में स्वार्थी त्तत्वों ने बांट लिया मेरे मादर ए वतन भारत को अब क्यों पांट रहें तुम मेरे हम वतनी हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई भाईयों को ? अगर देश आज़ाद नही अभी भी तो तुम बतला दों आखिर कब तक धर्म जात के नाम अप्रतयक्ष रूप से सत्ता सिंहासन के लिये मानवता का खून बहाओगे बतला दो ? कुर्सी की खातिर क्या और बांटना और पांटना चाहते भारत मां की संतानों को ?
एक मानवता वादी भारतिया मुसलमान मो. तारिक फिर तुम को चेता रहा, भारत के संविधान में लिखा हुआ मौलिक अधिकार की सब करों अपने अपने धर्म का पालन तो आये दिन फिर धर्मनिरपेक्षय संविधान का उल्लघन कर एक दूसरे के धर्म का अपमान कर कौन कौन और क्यों ललकार रहा ? संविधानिक मौलिक अधिकारों में लिखित स्वतंत्रता के बावाजुद खान-पान, रहन-सहन, पहनवा-शिक्षा के नाम कौन कौन कर दोहन शौषण कर अधिकारों का अतिक्रमण कर ललकार रहा ? बतला दो क्या अब संसद से कार्यपालिका संविधानिक रूपी नही रहीं जहां धर्म जात आधार पर हों रहीं उनकी खामौशी असंविधानिक नही रहीं ? आधुनिक शिक्षा केन्द्रों में धार्मिकता का पाठ पढ़ाने और उनकी अनीवार्यता जैसी घौष्णायें नही हुई ? अपने धर्मानुसार गौ का संरक्षण तो उसी समुदाय की जवाबदारी हैं, तुम तो खुद गौ माता का लालन पालन करतें नही फिर क्यों अल्पसंख्यक समुदाय के खान-पान पर प्रतिबंध लगाने की एक षणयंत्र के तहत योजना की तुमहारी त्यारी हैं ? मेरे मादर ए वतन भारत को माँ का दर्जा देते फिरते जय घौष के नारे तो वहीं लगाते हैं जो खाज़ाने से जारी एक रूपिया बीच में ही फिचहत्तर पैसा खा जाते हैं !
भारत के समस्त प्रांतों में बसने वाला भारतीय मुसलमान ही सच्चा नागरिक हैं जिसने देश की स्वतंत्रता के समय स्वार्थी तत्वों के धर्माधारित देश के बंटवारे को त्याग ही भारत को अपना मादर ए वतन माना और सेकुलर रही सरकारों के 60 वर्षिया कार्यकाल में घटित दंगा फसादों सहित वर्तमान में गठित वारदातों आर्थिक, शारीरिक, मानसिक यातनाओं के बावाजूद संविधान उल्लघन न करने की ही ठानी हैं साथ ही उसका कहना जीना यहां मरना यहां इसके सिवा जाना कहां और जायेगा तो तिरंगे की आन बान और शान के लिये अपना लहू बहा कर दे देगा अपने मादर ए वतन के लिये प्राण ! और साथ निवेदन करता यह भारतिया एक नागरिक नही चाहिये हमकों कोई ओहदा, सम्पत्ती या कोई उपहार बस इस बार स्वतंत्रता दिवस पर निष्ठा से ध्यानपूर्वक करों स्वतंत्रता संग्राम के उन वीर शहीदों के बहे हुये रक्त और दिये प्राणों की आहूती पर फिर 1947 के पूर्व के अखण्ड भारत पर विचार ! भारत माँ के बिछड़े लालों को मिला फिर बन जा तू विश्वशक्ती जिस्से बंटवारा की उठी आवाजें समाप्त वहीं सेना का न शहीद हौगा वीर जवान ! लाभ तो अनेकानेक जिसमे प्रमुख सेना सहित सुरक्षा बजट पर हों रहें अतिरिक्त खर्च बचाकर विकास, रोज़गार, स्वास्थ सहित शिक्षा पर की व्यय करायेंगें !
“अब तो यह वेचारिक द्वंद हैं !”
मो. तारिक
(स्वतंत्र लेखक)