संवेदनाएँ मर चुकी हैं हमारी : हम रक्षाबंधन मना रहे हैं और कुछ परिवार मातम!

संवेदनाएँ मर चुकी हैं हमारी : हम रक्षाबंधन मना रहे हैं और कुछ परिवार मातम!

Posted by

Rizwan Aijazi – Jaipur ·
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कितनी संवेदनाएँ मर चुकी हैं हमारी
हम रक्षाबंधन मना रहे हैं और कुछ परिवार मातम
सोशल मीडिया चुप हैं आप चुप हैं ,मैं चुप हूँ
क्या क़ुसूर था इन बेगुनाहों का
बस ये शासन ,प्रशासन ,रेलवे
की लापरवाही का शिकार हुए हैं ।
क्या किसी को यह ख़बर नहीं होती कि रक्षाबंधन
दीपावली ,होली, ईद जैसे त्योहारों पर सभी अपने
परिवार के पास जाना चाहते हैं ।
एक मंत्री के लिये ट्रेन की व्यवस्था हो जाती है
एक मंत्री के लिये तमाम प्रशासनिक तंत्र नतमस्तक
हो जाता है
और आम आदमी इस तरह ख़ामोशी से मर जाता है
ओर मार डालता है अपने परिजनों का, बहनों का
मातापिता का जो उनका इंतज़ार करते हुए
अपना सब कुछ खो चुके हैं ।
???????
अभी यहाँ दोष किसी सियासत का, किसी मज़हब का
किसी भीड़ का,किसी धर्म का होता
हर कोई कितना संवेदनशील हो जाता
धिक्कार है हम सभी पर ।
जो भी इस घटना के ज़िम्मेदार हैं ,तुरंत उन्हें
ऐसी सज़ा मिले कि ऐसी घटना दूबारा घटित न हो ।