#इस्लाम को लेकर जापान के बारे में ग़लत बयानी : #RSS का फैलाया झूठ!

#इस्लाम को लेकर जापान के बारे में ग़लत बयानी : #RSS का फैलाया झूठ!

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एक भी #मस्जिद नहीं  मस्ज़िद है

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जापान मे मुस्लिमो का आधुनिक इतिहास सिर्फ़ १०० साल का मिलता है |जबकि जापान से उष्मानिया सलतनत से ही सम्बन्ध थे | १९३५ मे कॉरबे मस्ज़िद और १९३८ मे टोकियो मस्ज़िद का निर्माण हुई थी ,उसके बाद और शहरो और जगहो मे इस्लामिक सेंटर और मस्ज़िदो की स्थापना होती गयी है | जहाँ जहाँ लोगो ने इस्लाम अपनाया वाहा वाहा एबादत करने के लिए मस्ज़िद भी बनाए |उन्नीस्वी शदी से पहले मुस्लिम जापान मे कम थे मगर इसके बाद जापानी मुस्लिम लाखो के संख्या मे है और आज तेज़ी के साथ जापानी लोग इस्लाम अपना रहे है | उनका मानना है कि ह्म लोगो ने इस्लाम को ना अपना कर एक बहुत कीमती चीज़ गवा दी थी | आज ३०-४० तो सिर्फ़ सिंगल स्टोरी मस्ज़िदे है|सैकड़ो के संख्या मे उँची उँची इमारतो के अंदर अपार्टमेंट टाइप मस्ज़िदे मौज़ूद है |इस्लामिक सेंट्रो मे क़ुरान के साथ धर्म की शिक्षा भी दी जाती है|

जापान मे सरकारी आकड़ो के अनुसार लोगो की जनसंख्या तो बताई जाती है, मगर धर्म के नाम पर नही , इस लिए इस्लाम के साथ साथ किसी अन्य धर्म का भी जनसख्या सरकारी आकड़ो मे चिन्हित नही होता है | जापान मे सिर्फ़ बीस लाख विदेशी है जिस मे आठ देश (चीन, कोरीया , फिलीपींस,ब्राज़ील विएतनाम , पेरू, यू.एस.ए और थाइलॅंड ) का अनुपात 87 % अर्थात (२०,००,०००*.87=१७,४०,०००) ज़्यादातर गैर-मुस्लिम है | एक अध्ययन के अनुसार , विदेशी मुस्लिम ज़्यादा, इंडोनेषिया (३५%) पाकिस्तानी (१५%) और बांग्लादेशी (१०%) है |सरकार ने दो लाख विदेशी मुस्लिमो को अस्थाई निवास दे रखा है | जो अन्य देशो ,जिनकी २३% विदेशी है मे शामिल है | इसके विपरीत वीकीपेदिया मे सिर्फ़ १,८५,००० मुस्लिमो की जनसख्या जापान मे बातई गयी मगर यह भी नही बताया गया है कि उस मे कितने लोकल जापानी मुस्लिम है और कितने विदेशी मुस्लिम|

अन्य धर्मो के साथ साथ इस्लाम के प्राचार प्रसार पर लगे धन पर ,सरकार टॅक्स से छूट दे रखी है|सरकार ऐसे आलिम और धर्म प्रचारक को सम्मान के तौर पर विशेष वीसा से सम्मानित करती है जो जापान आकर धर्म गयाँ को प्रसारित करते है | जापान सरकार हाल ही मे आफ्गानिस्तान मे बहुत सारे मस्ज़िदो और मदरसो का निर्माण कराई | खुद जापान के अंदर जगह जगह मस्ज़िदे है जहा क़ुरान और अन्य इस्लामिक ग्रंथ आसानी से उपलब्ध है और इसके एलावा बुक स्टोर्स पर भी क़ुरान जापानी भाषा मे सात लोगो द्वारा अनुवादित , भी मिल जाती है | हर साल जापानी लोग हज करने मक्का को जाते है और सरकार भरपूर साथ देती है |हलाल खाना आसानी से उपलब्ध है | सरकार के शाएेद ऐसे ही नेक कामो से ईश्वर ने उसे तृतीय अर्थ व्यवस्था और दुनिया का सबसे आधुनिक टेक्नालजी से नवाजा है| अल्लाह सुबहानु ओ ताला जापान को और भी प्रगति से नवाज़े| और किसी सूनामी जैसे विपदा से दूर रख कर, सुरक्षा प्रदान करे | भारत के विपरीत , वाहा के किसी भी कार्यालय , मुद्रा या झंडा मे किसी भी तरह के किसी धर्म विशेष का देवी देवता का मूर्ति लगाने की मनाही है|
जापान मे अन्य देशो के तरह तक़रीबन हर देश की एंबसी है और जापान के बाहर जापान की हर देशो मे एंबसी है | आज कल जापान मे इस्लाम को लेकर इंटरनेट पर एक पर्ची छपी है जिस मे आपको १८ सूत्री, भर्म और इस्लाम से नफ़रत दिलाने वाली बाते कही गयी है और विशेष तौर पर हिन्दी ब्लॉग मे अक्सर दूषित मानसिकता के लोग अपने अपने ब्लॉग पर चिपकाए है ताकि इस्लाम जैसे शीतल और स्वच्छ धर्म को बदनाम कर उस से जनता को लाभ लेने से रोका जा सके मगर इंटरनेट के दुनिया मे रह कर भी वे लोग अंधेर काल मे जी रहे है और खुद तो कन्फ्यूज़्ड है ही दूसरो को अंधेरा मे रखने की नाकाम कोशिश कर रहे है |
#चलते है उनके #सोलह_सूत्रीय_भ्रम की पोल खोला जाए ताकि हक़ीक़त से जनता रूबरू हो सके|

#फैलाया_गया_झूट_और_उनके_जवाब
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क्या आप जानते है?
* क्या आपने कभी यह समाचार पढ़ा है कि मुस्लिम राष्ट्र का कोई प्रधानमंत्री या कोई बड़ा नेता कभी जापान या टोकियो कि यात्रा पर गया हो?

* क्या आपने कभी किसी अख़बार में यह भी पढ़ा है कि ईरान या सउदी अरब के राजा ने जापान कि यात्रा कि हो?
#उत्तर-आज के युग मे कोई भी देश अपने आप को दरवाजा बंद करके नही रख सकता है और जब जापान जैसे देश को इस बारे मे कहा जाए तो इस से बढ़ कर और क्या झूठ होगा | जापान के कई नेता मुस्लिम देशो के यात्रा पर जाते है और कई मुस्लिम देशो समेत दुनिया के हर देश के नेता जापान जाते है और अगर हर विज़िट की लिस्ट दिया जाए तो लेख लंबी हो जाएगी | कुछ देश के अध्यक्षो का दौरा निम्न है जो उदाहरण के तौर पर है |
१- हाफ़िज़ वहबा सौदी के दूत थे जो १९३८ मे टोकियो मस्ज़िद के आधार शीला रखने गये थे|
१-सुल्तान बिन अब्दुल अज़ीज़ १९६० मे जापान गये|
२-फ़ैसल बिन अब्दुल अज़ीज़ १९७१ मे जापान गये |
३- प्रिन्स अब्दुल्लाह विज़िटेड जापान इन 1998.
१- जापानी प्रिन्स अकिहितो ने १९८१ मे के एस ए ( सौदी अरेबिया) गये थे|
२- प्रिन्स नरिहितो १९९४ मे मे के एस ए ( सौदी अरेबिया) का दौरा किए |
३- सयेद अहमद खतामी ईरान के राष्ट्र पति ने अक्टोबर २००० मे जापान की सरकारी यात्रा पर गये थे|

* दुनिया में जापान ही एकमात्र ऐसा देश है जो मुसलमानों को जापानी नागरिकता नहीं देता |
* जापान में अब किसी भी मुस्लमान को स्थायी रूप से रहने कि इजाजत नहीं दी जाती है |
* जापान में इस्लाम के प्रचार-प्रसार पर कड़ा प्रतिबन्ध है |
* जापान के विश्वविधालयों में अरबी या अन्य इस्लामी राष्ट्रों कि भाषाए नहीं पढाई जाती|

* जापान में अरबी भाषा में प्रकाशित कुरान आयत नहीं कि जा सकती|
#उत्तर- यह तो सत्य है कि पड़ोस के चीन और विएतनाम के लोगो की जनसख्या नागरिकता दिए जाने मे ज़्यादा है मगर यह भी सत्य है कि इंडोनेषिया,ईजिप्ट,और पाकिस्तान जहा ९० % से ज़्यादा मुस्लिम आबादी है , वाहा के लोगो को भी हर साल सैकड़ो के तादाद मे नागरिकता दी जाती है जो मुस्लिम ही है |एक अध्ययन के अनुसार , मुस्लिम नागरिकता लेने वालो मे ज़्यादा, इंडोनेषिया (३५%) पाकिस्तानी (१५%) और बांग्लादेशी (१०%) है|
जापान का कॉन्स्टिट्यूशन आर्टिकल 14

” क़ानून के नज़र मे सभी इंसान बराबर है और किसी को भी किसी तरह के नसल लिंग,फॅमिली या सामाजिक आधार पर रज़ीनीटिक, आर्थिक और सामजिक भेदभाव नही होगा “
जापान का कॉन्स्टिट्यूशन आर्टिकल 20
“किसी को भी धर्म के संबंध मे दबाव नही है |
किसी भी धार्मिक आयोजन मे सरकार इन्वॉल्व नही होगी|”
जापान का कॉन्स्टिट्यूशन आर्टिकल २३
“किसी को भी किसी भी विषय पर अध्ययन करने की पूरी आज़ादी है | “
कई यूनिवर्सिटी मे अरबी और इस्लामिक स्टडीस की पढ़ाई होती है जैसे टी यू एफ एस यूनिवर्सिटी के पेज पर जा कर कोई देख सकता है |
इस तरह जापानी संबिधन धर्म निरपेक्ष तौर सभी को सम्मान और प्रगति का मौका देता है | धर्म के आड़ मे कही भी और किसी भी छेतर मे भेदभाव जापानी समाज और क़ानून मे नही है |

जापान सरकार हाल ही मे आफ्गानिस्तान मे बहुत सारे मस्ज़िदो और मदरसो का निर्माण कराई | खुद जापान के अंदर जगह जगह मस्ज़िदे है जहा क़ुरान और अन्य इस्लामिक ग्रंथ आसानी से उपलब्ध है और इसके एलावा बुक स्टोर्स पर भी क़ुरान जापानी भाषा मे सात लोगो द्वारा अनुवादित , भी मिल जाती है | हर साल जापानी लोग हज करने मक्का को जाते है और सरकार भरपूर साथ देती है |हलाल खाना आसानी से उपलब्ध है |
इस्लाम से दुरी

* सरकारी आकड़ों के अनुसार, जापान में केवल दो लाख मुसलमान है. और ये भी वही है जिन्हें जापान सरकार ने नागरिकता प्रदान कि है |
#उत्तर- ग़लत आकड़ा है. दो लाख तो आस्थाई निवास वीसा है जो दी है | इस मे लोकल जापानी मुस्लिमो की जनसंख्या वर्णित नही है \

* सभी मुस्लिम नागरिक जापानी भाषा बोलते है और जापानी भाषा में ही अपने सभी मजहबी व्यवहार करते है |
#उत्तर- जापान मे रहे तो वाहा का भाषा भी सिख जाते है और लोकल भाषा मे सभी को आसानी होती है और यह आदेश सिर्फ़ जापानी मुस्लिमो पर ही नही बल्कि हर धर्म पर समान लागू है |

* जापान विश्व का ऐसा देश है जहाँ मुस्लिम देशों के दूतावास न के बराबर है |
#उत्तर – सच यह है कि हर देश के तकरीबन सभी दूत्वाहस है |

* जापानी इस्लाम के प्रति कोई रूचि नहीं रखते. आज वहा जितने भी मुसलमान है वे विदेशी कंपनियों के कर्मचारी ही है |परन्तु आज कोई बाहरी कंपनी अपनें यहाँ के मुस्लिम डाक्टर, इंजीनियर या प्रबंधक आदि को जापान में भेजती है तो जापान सरकार उन्हें जापान में प्रवेश कि अनुमति नहीं देती है
#उत्तर- हर साल नये नये जापानी लोग इस्लाम कबूल कर रहे है और सिर्फ़ लोकल जापानी कई हज़ार की तादाद मे हर साल बढ़ रहे है | दो लाख तो रेसिडेन्स वीसा पर विदेशी मुस्लिम है|
मुस्लिम नागरिकता और जॉब लेने वालो मे ज़्यादा, इंडोनेषिया (३५%) पाकिस्तानी (१५%) और बांग्लादेशी (१०%) मुस्लिम ही है |

* अधिकतर जापानी कंपनियों ने अपने नियमों में यह स्पष्ट लिख दिया है कि कोई मुसलमान उनके यहाँ नौकरी के लिए आवेदन न करे |
#उत्तर- किसी भी सरकरी या गैर सरकारी नौकरी फॉर्म मे धर्म का कॉलम होता नही है और धर्म और नसल के आधार पर अगर कोई भेदभाव करता है तो जापानी कोर्ट बहुत सज़ा देती है | इस लिए उपरोक्त बात भी एक बहुत अफवाह है | हर साल सैकड़ो मुस्लिमो को जापान मे जॉब मिलती है |

* जापान सरकार यह मानती है कि मुसलमान कट्टरवाद के पर्याय है, इसलिए आज के वैश्विक दौर में भी वे अपने पुराने नियम बदलना नहीं चाहती |
#उत्तर – इसका कोई वजह और सबूत नही है और अफवाह के सिवा कुछ नही है | जापान का मुस्लिम देशो के साथ विशेष तौर से सौदी और यू ए ई और ब्रुनई के साथ सैकड़ो साल पुराना और प्रगाढ़ संबंध है | और आज दीनो दिन कई मुस्लिम देशो के साथ और बढ़ती जा रही है | साथ ही मुस्लिमो को ज़्यादा से ज़्यादा सुविधा जैसे हलाल मीट और हज इत्यादि की सुविधा बढ़ाती जा रही है |

* जापान में किराये पर किसी मुस्लिम को घर मिलेगा, इसकी तो कल्पना भी नहीं कि जा सकती. यदि किसी जापानी को उसके पडौस के मकान में मुस्लिम के किराये पर रहने कि खबर मिल जाये तो सारा मौहल्ला सतर्क हो जाता है|
#उत्तर- यह भी अफवाह है |

* जापान में कोई इस्लामी या अरबी मदरसा नहीं खोल सकता |
#उत्तर- सारे मदरसा, इस्लामिक सेंटर और मस्ज़िद मौजूद है जहाँ धार्मिक पढ़ाई के साथ साथ , दुनिया के भी पढ़ाई हो रही है और तेज़ी के साथ बढ़ते जा रहे ताकि नये नये जापानी मुस्लिमो की ज़रूरत को पूरा किया जा सके| इस मे सरकार कोई भी रुकावट नही डालती है क्योंकि संबिधान के अनुसार सरकार को किसी धार्मिक क्रिया और उसके प्रासार मे दखल अंदाज़ी का अधिकार नही है और यही वजह है कि इस्लाम तेज़ी के साथ लोगो का अज़ीज़ बनता जा रहा है और लोग खूब अपना रहे है