इस्लाम ने मुझे एक बेहतरीन इंसान बना दिया है : विक्टोरिया

इस्लाम ने मुझे एक बेहतरीन इंसान बना दिया है : विक्टोरिया

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Sikander Khanjada Khan
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अस्सलामु अलैकुम व रहमत उल्लाही व बराकातुह, मेरा नाम विक्टोरिया है।
मैंने पहली बार फरवरी 2014 में इस्लाम के बारे में जानना शुरू कर दिया था। मेरी पहचान एक Wiccan के रूप में थी लेकिन यह कभी मुझे सही नहीं लगा। मैंने इस्लाम के विषय में सीखना शुरू कर दिया। मैंने पहले पहले हिजाब, नकाब, बुर्का, आदि के बारे में जानने का प्रयास किया और फिर धर्म के विषय में पूरी जानकारी लेना प्रारंभ किया की मुसलमानों का विश्वास क्या है?

इस प्रक्रिया के दौरान मैं अपनी सुंदर मुस्लिम दोस्त, शाज़ा से मिली। शाज़ा से मेरी मुलाक़ात ‘वर्ल्ड हिजाब डे’ पेज के माध्यम से हुई और मैंने उससे इस्लाम के बारे में जानना शुरू कर दिया। वह मेरी यात्रा में मेरे लिए बहुत मददगार साबित हुई।

बहरहाल मैंने इस्लाम के बारे में सीखना जारी रखा। और मैंने अपने आप को ईश्वर पर विशवास के विषय में ऐसी स्थिति में पाया जो कभी भी अपने जीवन में पहले महसूस नहीं किया था। महीने बीत गए यह जून 2014 था, जब मैंने सोचा कि इस्लाम ही इश्वर का सही रास्ता है ।

मेरी दोस्त ने मुझे एक अंग्रेजी कुरान भेजा और मैंने इसे पढ़ना शुरू किया और इसने दिल को छू लिया, कभी कभी मुझे इसने निराश भी किया लेकिन मैंने पढ़ना जारी रखा अंततः मुझे इससे प्यार हो गया । इससे मुझे शिक्षा मिली कि ईश्वर को जानने का एक मात्र रास्ता यह है कि स्वयं को उसके प्रति समर्पित कर दिया जाए। उसकी (ईश्वर की) तुलना अन्य किसी से नहीं की जा सकती। वह महानतम है। वह हमेशा से था और हमेशा से था । मेरा विश्वास “कैसे एक ईश्वर हो सकता है?” बदल कर “कैसे ईश्वर नहीं हो सकता है?” हो गया।

पिछले साल जुलाई में, मैंने हिजाब हर समय पहनने के लिए चुनाव किया और इस्लाम को गले लगा लिया। इस समय मुझे 90% यकीन था कि मैं एक मुसलमान होना चाहती हूँ। मैंने अपनी स्थानीय मस्जिद में जुम्माह प्रार्थना में भाग लिया।

यह पहली बार था कि मैंने एक मुस्लिम की तरह प्रार्थना की और पहली बार मैं कभी एक मस्जिद के अंदर गई थी। उस दिन के बाद मुझे 100% यकीन हो
गया कि मैं एक मुसलमान बनना चाहती हूँ। और हिजाब पहनना जारी रखा। मैंने जल्द ही शहादाह पढ़ लिया।
इस्लाम की तरफ यह आश्चर्यजनक परिवर्तन और अदभुत यात्रा है जिससे मैं गुज़री, सुब्हान अल्लाह !!

इस्लाम ने मुझे एक बेहतरीन इंसान बना दिया है। अधिक विनम्र, दूसरों का अधिक ध्यान रखने वाली, और अधिक देने वाली। मुझे कोई परवाह नहीं कली लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं , या लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। मैं अल्लाह से प्यार करती हूँ। मैं इस्लाम से प्यार करती हूँ, मुझे अपने हिजाब से प्यार है और यह निश्चित रूप से मेरे लिए सही रास्ता है। अल्हम्दुलिल्लाह, मुझे सभी अपने प्रियजनों से मुझे समर्थन मिला है। मैं और अधिक धन्य नहीं हो सकती थी। मुझे और किसी का शुक्र नहीं अदा करना सिवाए एक अल्लाह के।