इस्लाम में निकाह को आसान बनाया गया ताकि ज़िना मुश्किल हो जाये!

इस्लाम में निकाह को आसान बनाया गया ताकि ज़िना मुश्किल हो जाये!

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Sikander Khanjada Khan
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#हमने_निकाह_को_बहुत_मुश्किल_बना_लिया
और जिनाह को आसान
इस्लाम में निकाह को आसान बनाया गया है..ताकी ज़िना मुश्किल हो जाये..वहीं जहेज़ (दहेज) एक ऐसी वबा (बीमारी) है जो सारे मुआशरे (समाज) के लिए खतरनाक होती जा रही है .अगर वक़्त रहते इसका इलाज ना किया गया तो ना जाने कितने घरों की निगल जाएगी .
अब तक इस वबा ने ना जाने कितनी बेटियों को और बेटियों के माँ बाप को मौत की आगोश में पहुंचा दिया है , और बदस्तूर इस का क़हर जारी है .
पहले तो ये जहेज़ नामी वबा गैर कौमों में पली बड़ी और खूब तरक्की की , फिर इसने अपने पैर फैलाने शुरू किये और उस कौम तक पहुँची जिस ने दुनिया को इंसानियत सिखाई , जब बेटियां ज़िंदा दफ़न करना एक आम बात हो गई थी
तब इसी इस्लाम नेs kकहा की बेटियां रहमत हैं जिस इस्लाम को हम मानने वाले हैं
मगर आज कौम का एक बड़ा तबक़ा इन तालीमात को भूल चुका है या नज़र अंदाज़ कर रहा है
आज जहेज़ की लाअनत के सबब क्या क्या बुराइयां और क्या क्या परेशानियां मुआशरे में हैं ये हम सब जानते हैं , ना जाने कितनी बेटियां और माँ बाप इस आस में बैठे हैं की कोई तो आएगा तो दौलत का पुजारी नहीं बल्कि इस्लाम की तालीमात को मानने वाला होगा ,
इस्लाम ही ऐसा वाहिद मज़हब है जिस में दुनिया और दुनिया की दौलत को धोखा और फरेब कहा गया है
इस्लाम में दौलत की इबातत या दौलत के लिए इबादत नहीं है, तो फिर हम क्यों दौलत के परस्तार (पुजारी) बने हुए हैं
हम तो उस कौम के लोग हैं जिस ने दुनिया को इंसानियत सिखाई , जिस ने निकाह को सबसे आसान और सरल बनाया , मगर अफ़सोस आज उसी इंसानियत के दामन को हम तार तार कर रहे हैं,
आज मुआशरे में निकाह से मुश्किल कोई काम है ही नहीं,,, आखिर ऐसा क्यों???
इस ‘क्यों’ का जवाब आप भी जानते हैं और हम भी
हमारे सामने एक रौशन रास्ता है तो फिर गैरों की तक़लीद क्यों करें
आइये आज हम मिल कर अज़्म करें की हम रौशन रास्ते का इंतेखाब केरेंगे..