//\\कितनी मोहक है हँसी तेरी….जैसे बादलों से छलकतीं बूँदें//\\

//\\कितनी मोहक है हँसी तेरी….जैसे बादलों से छलकतीं बूँदें//\\

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@रश्मि शाक्य #
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कितनी मोहक! है हँसी तेरी/
जैसे किसी अमराई में कोयल कूकती/
जैसे बादलों से छलकतीं बूँदें/
छमाछम गिरतीं करतीं हैं तरंगित/
नदी के जल को/
जैसे खन से खनकी हो कोई चूड़ी/
किसी गोरी कलाई में /
जैसे कमल सर में/
खिल रहा हो धीरे- धीरे…./
जैसे महाकवि के हृदयसे /
छलका हो कोई श्लोक /
या फिर भोर में /
कोमल से पत्ते पर गगन से चू पड़ी हों/
ओस की बूँदें /
ढुलक कर गिर पड़ी हों/
मेरी पलकों पर /
जैसे बज रही हों घंटियाँ मंदिर में /
होकर तरंगित /
गूंजतीं हों धरा से लेकर गगन तक/
बिन्दु में …अणु में …कणों में …/
जड़ में …चेतन में …./
@रश्मि शाक्य #