क्या ईरान फ़ार्स खाड़ी में अमरीकी छावनियों पर हमला करेगा?

क्या ईरान फ़ार्स खाड़ी में अमरीकी छावनियों पर हमला करेगा?

Posted by

अमरीकी सिनेट में विदेशी मामलों की कमेटी के प्रमुख रिपब्लिकन सेनेटर बाब क्रोकर ने जो चेतावनी दी कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की धमकियां अमरीका को तीसरे विश्व युद्ध के मार्ग पर पहुंचा देंगी वह हमारे विचार में अतिशयोक्ति नहीं है।

क्रोकर ने ट्रम्प के बारे में कहा कि वह मुझे चिंतित कर रहे हैं और उनसे हर उस व्यक्ति को चिंतित होना चाहिए जिसे हमारी सुरक्षा से रूचि है।

उत्तरी कोरिया को मिटा देने की धमकी के बाद ट्रम्प अब मध्यपूर्व की दो बड़ी ताक़तों यानी ईरान और तुर्की के साथ नये विवाद की आग भड़का रहे हैं। इसलिए कि यह दोनों देश केवल इराक़ी कुर्दिस्तान में हुए जनमत संग्रह के विषय में ही नहीं बल्कि सीरिया संकट के बारे में भी एक दूसरे से क़रीब दृष्टिकोण अपना चुके हैं।

यदि हम तुर्की की बात करें तो इस समय अमरीका और तुर्की के संबंध गंभीर संकट में पड़ गए हैं। अमरीका ने तुर्क राष्ट्रपति अर्दोग़ान के उन तीन गार्डों पर मुक़द्दमा दायर कर दिया जिन्होंने अर्दोग़ान की अमरीका यात्रा के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था। अमरीका ने तीनों गार्डों को हवाले करने की मांग कर दी है। इसी के साथ अमरीका ने तुर्क नागरिकों को वीज़ा जारी करना भी स्थगित कर दिया है क्योंकि तुर्क सरकार ने इस्तांबूल में अमरीकी वाणिज्य दूतावास के लिए काम करने वाले स्थानीय कर्मचारी को जासूसी के मामले में गिरफ़तार कर लिया था इसके अलावा तुर्की ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम का सौदा कर लिया है।

अमरीका और तुर्की दोनों ही नैटो के सदस्य हैं लेकिन अब यह स्ट्रैटेजिक सहयोग ध्वस्त होने वाला है क्योंकि जब तुर्क राष्ट्रपति ने कहा कि अमरीका को चाहिए कि तुर्की अथवा कुर्दों में से किसी एक का चयन कर ले तो अमरीकी प्रशासन ने कुर्दों का चयन किया। कुछ रिपोर्टों में भी तो यह भी कहा जा रहा है कि ट्रम्प ने ज़ाहिरी तौर पर इराक़ी कुर्दिस्तान में हुए जनमत संग्रह का विरोध किया है लेकिन गुप्त रूप से वह इसका समर्थन कर रहे हैं।

अगर हम परमाणु मामले में अमरीका और ईरान के मतभेद की बात करें तो यह भी नए चरण में पहुंच गया है क्योंकि संभावित रूप से अमरीका ने आगामी 15 अकतूबर को परमाणु समझौते से एकपक्षीय रूप से निकल जाने का फ़ैसला किया है, यह ख़बरें भी हैं कि अमरीका ईरान की क्रांति संरक्षक फ़ोर्स आईआरजीसी को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने का भी इरादा बनाया है।

आईआरजीसी के प्रमुख मुहम्मद अली जाफ़री ने कहा है कि यदि आईआरजीसी को आतंकी संगठनों की सूचि में शामिल करने की अमरीकी मूर्खता की ख़बरें सही हैं तो फिर अमरीका को कठोर जवाबी कार्यवाही का प्रतीक्षा में रहना चाहिए। आईआरजीसी अमरीकी सेना को सारी दुनिया में आतंकी संगठन मानेगी और मध्यपूर्व में उसे दाइश के समान संगठन समझेगी। उन्होंने कहा कि अमरीका को 2 हज़ार किलोमीटर के दायरे से अपनी सैनिक छावनियां ख़त्म करनी पड़ेंगी।

आईआरजीसी को आतंकी संगठनों की सूचि में शामिल करने के फ़ैसले से फ़्रांस भी चिंता में पड़ गया है, फ़्रांस परमाणु समझौते से अमरीका के बाहर निकलने के फ़ैसले से भी चिंतित है। क्योंकि इस प्रकार के फ़ैसलों से मध्यपूर्व के इलाक़े में संकट बढ़ेगा।

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे एकमात्र नेता हैं जो ट्रम्प की मूर्खतापूर्ण धमकियों और बयानों का समर्थन कर रही है। उनके प्रवक्ता ने कहा कि वह इस्राईल प्रधानमंत्री नेतनयाहू के विचारों से सहमत हैं और मध्यपूर्व तथा फ़ार्स खाड़ी के क्षेत्र के लिए ईरान की ओर से पैदा होने वाले ख़तरों पर विश्व समुदाय को ध्यान देना चाहिए।

यह कितनी हास्यास्पद बात है कि इस्राईल को मध्यपूर्व और फ़ार्स खाड़ी के क्षेत्र की शांति व सुरक्षा की चिंता सताने लगी है और इस चिंता में ब्रिटेन भी शामिल है और विश्व समुदाय से मांग कर रहा है कि वह ईरान पर अंकुश लगाए। इस्राईल जो पिछले साठ वर्षों में आठ युद्ध कर चुका है वह फ़ार्स खाड़ी और मध्यपूर्व के क्षेत्र की शांति का समर्थक बन गया है और ईरान ख़तरों का एकमात्र स्रोत!!

सेनेटर क्रोकर ने सही कहा कि ट्रम्प अमरीका को तीसरे विश्व युद्ध के मार्ग पर ले जा रहे हैं, काश उन्होंने यह बात पूरी करते हुए यह भी कह दिया होता कि नेतनयाहू उन्हें इस खाई की ओर खींच रहे हैं।

क्रोकर ने जो कुछ कहा है वह हवा में बात नहीं की है और इसी तरह टेरीज़ा मे जो कह रही हैं कि वह फ़ार्स खाड़ी और मध्यपूर्व के लिए ईरान की ओर से उत्पन्न होने वाले ख़तरों पर नेतनयाहू की चिंता से सहमत हैं, वह भी हमारे विचार में सही नहीं है। यह सब कुछ ईरान को परेशान करने की पूर्व योजना के तहत किया जा रहा है। मगर इन ताक़तों को यह यक़ीन है कि इस बार की लड़ाई पिछली लड़ाइयों जैसी नहीं होगी।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के प्रख्यात टीकाकार व लेखक