तुम्हें दीन मुफ़्त में मिला है तुमने दीन के लिए कोई जद्दोजहद नही की!

तुम्हें दीन मुफ़्त में मिला है तुमने दीन के लिए कोई जद्दोजहद नही की!

Posted by

तुम्हें दीन मुफ्त में मिला है तुमने
दीन ऐ इस्लाम हासिल करने के लिए कोई जद्दोजहद नही की
और अक्सर मुफ्त में मिली चीज़ों की कद्र कम होती है।लेकिन अगर सहाबा इकराम की जिंदगी का अध्ययन करे तो पता चलेगा कि दीन तो सोने से भी ज्यादा कीमती है।
सहाबा इकराम की जमात ने दीन के लिए अपनी जान, अपना माल, अपना घ,र अपना शहर, यहां तक कि अपना मुल्क भी छोड़ा है।
आज तुम ac, कूलर पंखे वाली मस्जिदो में जाने मैं संकोच करते है
और एक वो अजीम लोग थे जो तपती रेत पर भी सजदा किया करते थे
आज तुम से 5 मिनट नंगे पैर धूप में नही चला जाता
वो हज़रत बिलाल ऱ ज़ आ थे
जो दीन ऐ इस्लाम की खातिर आग उगलती रेत पर लेटे है और छाती पर पत्थर झेल रहे है
आज तूम दीन सीखने के लिए किसी औलमा की महफ़िल में भी जाने में जोर आता है
और वो सहाबा इकराम थे।
जो अपना घर अपना माल अपनई बीवी बच्चे छोड़ पर अल्लाह की राह में हिज़रत पर निकल जाते थे
तुमसे 30 दिन के रोज़े नही रखते बनते
और वो लोग अल्लाह के लिए फाके तक करते थे
तूम सिर्फ अपने लिए अपने बाप के लिए अपने दोस्त के लिए लड़ना जानते हो
लेकिन वो लोग हमेशा इस्लाम की खातिर शहीद होने को तैयार रहते थे
अगर तूमको ज्यादा दौलत मिल जाये तो तूम 3 काम में पहले लगते है जीनाखोरी, शराबखोरी,जुआखोरी
लेकिन अल्लाह ने सैय्यदना उस्मान गनी,और सैय्यदना अब्दुर्रहमान इब्ने ऑफ रज़ियल्लाहु ताला
को आपकी और मेरी सोच से ज्यादा नवाज़ा था लेकिन ये लोग एक पल में लिए भी दीन से गाफिल नही हुए अल्लाह की राह मै दोनो हाथो से लुटाया अमीर होने पर कभी रस्क नही किया
दूसरे शाहबा की तरह हर गजवे मै
हिस्सा लिया सादी जिंदगी गुज़ारी
अगर तूम गरीब हो तो कहते है अल्लाह ने हमे कुछ नही दिया
लेकिन क्या शान थी
सैय्यदना अली और सय्यदा फातिमा की
के तीन तीन दिन के फाके है
और सजदे पर सजदे किये जा रहे है फ़क़ीर आ रहा है यूसको खिला रहे है खुद भूखे है
अल्लाह का शुक्र आता कर रहे है।
सैय्यदना अली रज़ियल्लाहु ताला अन्हो की खुद्दारी का आलम ये था कि मक्का में सब कुछ छोड़ आये
सय्यदा फातिमा से निकाह हुआ
जब मेहर देने की बारी आई तो कुछ था नही पास में लेकिन
किसी से उधार ना मंगा बल्कि अपनी तलवार सैय्यदना उस्मान को बची और जो कीमत मिली उससे मेहर अदा किया
अल्लाह हु अकबर
क्या शान है
इसलिए अल्लाह इन से राज़ी है।
अगर तूम एक ऐसी बस्ती में हो जहां 50 घर गैर मुस्लिम के है तो तुममे डर बना रहता है कहि कुछ हो ना जाये
लेकिन शाहबा इकराम की दिलेरी का आलम ये था सारे मुसलमान हिज़रत कर के मदीना चले गए
सिर्फ सैय्यदना अली वाहिद थे जो मक्का में रहे
अब तुम ये कहोगे वो लोग तो सहाबा इकराम थे इसलिए उनमे इतना जस्बा था दीन का
लेकिन वो भी तो उसी हार्ट मांस के बने है जिसके तूम बने हो
बेशक तूम सहब नही बन सकते लेकिन उनकी जिंदगी पाक से इबारत हासिल कर सकते हो
क्यों दीन अनमोल है