दाइश के बाद मध्यपूर्व में अमरीका का अगला लक्ष्य क्या है?

दाइश के बाद मध्यपूर्व में अमरीका का अगला लक्ष्य क्या है?

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अमरीकी समाचारपत्र वाॅशिंग्टन एग्ज़ामिनर ने अपने एक लेख में दाइश के पतन की ओर संकेत करते हुए कहा है कि अमरीका को अन्य देशों में सैन्य हस्तक्षेप बंद कर देना चाहिए।

बोनी क्रिस्टियन ने अपने लेख में कहा है आतंकी गुट दाइश एक पराजित गुट है। यह गुट उन इलाक़ों में हारा है जिन्हें वह अपना बताता था। इन इलाक़ों के उसके हाथ से निकल जाने का मतलब यह है कि उसकी संपत्ति भी उसके हाथ से निकल गई है। अनुमान है कि दाइश की स्वयंभू ख़िलाफ़त को करों और तेल के कुओं से जो आय होती थी उसका लगभग 80 प्रतिशत भाग कम हो गया है। यहां तक कि अब लूटमार और अपहरण से भी दाइश को कोई लाभ नहीं होने वाला है। दाइश की पराजय से यह सवाल सामने आने लगा है कि अमरीका दाइश की समाप्ति के बाद क्या करेगा?

वाॅशिंग्टन लापरवाही के साथ आगे बढ़ता जा रहा है मानो आगे भी स्थिति इसी प्रकार की रहेगी। शायद इस चरण में नीति निर्धारिकों की सबसे बड़ी ग़लती यह हो कि वे इराक़ में अमरीका के सैन्य हस्तक्षेप के संबंध में अपनी गलत धारणाओं पर आग्रह करते रहें और यह सोचते रहें कि इसी सैन्य हस्तक्षेप के कारण दाइश को क्षेत्र से निकलना पड़ा है और इराक़ में शांति बहाल हुई है।

दाइश के निकलने के बाद इराक़ को जिस हिंसा का सामना करना पड़ेगा वह आंतरिक, राजनैतिक व जातीय समस्याओं पर आधारित होगी और इसका संबंध न तो अमरीका की सुरक्षा से है और न ही इस देश में विदेशी हस्तक्षेप से इसका समाधान होगा। अब इस बात का समय आ गया है कि मध्यपूर्व में स्थानीय राजनैतिक समस्याओं के समाधान के लिए साढ़े दस साल के विदेशी सैन्य हस्तक्षेप की विफलता से पाठ सीखा जाए। अब इस बात का समय है कि इराक़ में हस्तक्षेप की पिछली ग़लतियों को दोहराने से दूर रहें और इसके बजाए राष्ट्रीय सुरक्षा की सही नीतियों पर ध्यान दें।

साभारः समाचारपत्र वाॅशिंग्टन एग्ज़ामिनर (washington examiner)