नेतनयाहू की नीतियां इस्राईलियों को मरवाएंगी : इस्राईली अख़बार

नेतनयाहू की नीतियां इस्राईलियों को मरवाएंगी : इस्राईली अख़बार

Posted by

इस्राईली अख़बार आरेत्ज़ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने जो नीतियां अपनाई हैं उनकी भारी क़ीमत इस्राईल और इस्राईलियों को चुकानी पड़ेगी।

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि नेतनयाहू ने इस मामले में जो नीति अपनाई है उसका विरोध दुनिया के अधिकांश राष्ट्राध्यक्ष यहां तक कि इस्राईल की इंटेलीजेन्स एजेंसियां भी कर रही हैं। नेतनयाहू ईरान के साथ किया गया परमाणु समझौता निरस्त कराने की कोशिश कर रहे हैं जबकि इस समझौते पर दुनिया की बड़ी ताक़तों ने हस्ताक्षर किए हैं।

अख़बार ने लिखा है कि नेतनयाहू ने अमरीकी कांग्रेस में मार्च 2015 में जो भाषण दिया और जिसमें परमाणु समझौते के ख़िलाफ़ जमकर बोले उसके चलते पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा, डेमोक्रेटिक पार्टी तथा बहुत से ज़ायोनियों से भी उनके संबंध ख़राब हो गए। इस्राईली सरकार कुछ सुन्नी अरब सरकारों से अपने संबंधों पर इतरा रही है जिनमें सऊदी अरब की सबसे आगे है, यह देश नेतनयाहू की रणनीति का समर्थन करते हैं लेकिन यह देश अब भी इस कोशिश में हैं कि इस्राईल से उनके संबंध सार्वजनिक न होने पाएं।

अख़बार का कहना है कि नेतनयाहू एकमात्र एसे इस्राईली प्रधानमंत्री हैं जो चीन, रूस, यूरोपीय संघ का विरोध मोल ले रहे हैं क्योंकि इन देशों ने बहुत खुलकर ईरान के परमाणु समझौते का समर्थन किया है लेकिन नेतनयाहू लगातार अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प को परमाणु समझौता ख़त्म कर देने या उसमें बदलाव के लिए उकसा रहे हैं। ईरान इस समझौते में कोई भी बदलाव करने के लिए तैयार नहीं है।

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पिछले महीने नेतनयाहू ने संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के अधिवेशन में भाषण देते हुए ट्रम्प की तारीफ़ों के पुल बांध दिए। उन्होंने ईरान से किया गया परमाणु समझौता ख़त्म करने या उसके बिंदुओं में बदलाव करने की मांग की। यदि ट्रम्प हर तीन महीने पर इस समझौते की पुष्टि की प्रक्रिया के तहत समझौते का समर्थन करने से इंकार करते हैं तो एक राजनैतिक बखेड़ा खड़ा हो जाएगा।

इस्राईली अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि यह तय है कि इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू को एक बार फिर पराजय का मुंह देखना पड़ेगा जिस तरह पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा के कार्यक्राल में उनकी बड़ी बेइज्ज़ती हुई थी क्योंकि उनके भारी विरोध के बावजूद ओबामा प्रशासन ने ईरान के साथ परमाणु समझौता कर लिया था। नेतनयाहू ही बार बार अमरीका को ईरान के विरुद्ध राजनैतिक विवाद बढ़ाने के लिए उकसाते रहते हैं और यह विवाद कहीं युद्ध में न बदल जाए। नेतनयाहू जो कुछ कर रहे हैं उसके परिणामों के बारे में उन्होंने भलीभांति विचार नहीं किया है। यदि परमाणु समझौता ख़त्म हो जाता है तो यह इस्राईल की सुरक्षा के लिए भी बहुत ख़तरनाक स्थिति होगी।

अख़बार ने लिखा कि वर्ष 2002 में जब नेतनयाहू के पास कोई बड़ा पद नहीं था तो उस समय भी उन्होंने अमरीकी कांग्रेस में भाषण देते हुए इराक़ के परमाणु हथियार की बात की थी और इराक़ के डिक्टेटर सद्दाम हुसैन की सरकार गिराने पर ज़ोर दिया था और कहा था कि इस तरह मध्यपूर्व के क्षेत्र में शांति व सुरक्षा की स्थिति बेहतर होगी। नेतनयाहू के पास उस समय कोई पद नहीं था तो उनका भाषण में इतना महत्वपूर्ण नहीं था लेकिन अब जो बातें वह कर रहे हैं उसका ख़मियाज़ा इस्राईल और इस्राईलियों को भुगतना पड़ सकता है।