“संगीत सोम को दो टूक”

“संगीत सोम को दो टूक”

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“संगीत सोम को दो टूक”
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अंग्रेजों ने बिछवाई हैं ये रेल की पटरी
ये रेल की पटरी भी गुलामी की निशाँ है.
सड़कें भी बिछाई हैं यहां शेर शाह ने
ये जी टी रोड ज़ुल्मो सितम का बयान है.
ताने हुए सीना जो खड़ा है क़ुतुब मिनार
दुनिया से कह रहा है कि भारत महान है
ये लाल किला जिससे तू तक़रीर करे है
आज़ादी के तक़रीब की धड़कन है जान है
मुग़लों ने जो बनाई ग़ुलामी की निशाँ है
तुमने भी कोई चीज़ बनाई? जो यहाँ है
ऐसा करो कि एक नया इतिहास बना दो
ये सारे निशानात गुलामी के मिटा दो.
भारत मे जितनी रेल की पटरी हैं हटा दो
ये जी टी रोड की जगह गोबर को बिछा दो
सत्ता भी हुक़ूमत भी सिंघासन भी तुम्हारा
हर चीज़ पे क़ाबिज़ हो प्रशासन भी तुम्हारा
ऐसा करो आदेश ये तुम पास करा दो
मुगलों की इमारत को खुलेआम गिरा दो.
कहते हो हमेशा तो कभी कर के दिखा दो
औक़ात अगर है तो ज़माने को बता दो
हिम्मत अगर नही है तो बोला भी मत करो
नफरत का ज़हर मुल्क में घोला भी मत करो
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झारखंड मे आधार कार्ड से राशन कार्ड लिंक न होने की वजह से सरकारी अनाज न दिये जाने पर संतोषी नाम की आदिवासी लडकी की भूख से मरने पर अगर आप सिर्फ सरकार को कोस कर संतुष्ट हैं तो एक बार फिर इसे पढ़ लीजिये। दरअसल हम सब मर चुके हैं।
~ आदमी अकेला नहीं मरता ~
आदमी अकेला नहीं मरता भूख से
उससे पहले….
मरते हैं
जूठन खाने वाले कौव्वे
मरते हैं
मेहनत की फसल हराम में उड़ाने वाले चूहे
मरती है
घात लगाकर दूध पी जाने वाली बिल्ली
मरता है
फेंके हुए टुकड़ों पर पलने वाला वफादार कुत्ता
मरता है पड़ोस
मरता है मोहल्ला
मरता है गाँव
मरता है जिला
मरते हैं अधिकारी
मरती है सरकार
मरता है देश
मरता है संसार
मरते हैं हम सब
आदमी अकेला नहीं मरता भूख से
उससे पहले
समूची सभ्यता मर चुकी होती है
#रजनीश