सर सैय्यद अहमद ख़ान के मुबारक़ योमे पैदाइश पर कुछ तस्वीरें!

सर सैय्यद अहमद ख़ान के मुबारक़ योमे पैदाइश पर कुछ तस्वीरें!

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सैय्यद अहमद खां साहब का अहसान सिर्फ मुस्लिम समुदाय ही नहीं पूरा देश नहीं भुला सकता। जो शख्स किसी खास मजहब की अशिक्षा और पिछडेपन को दूर करता है वो मुल्क के बाकी सभी मजहबों समुदायों की खिदमत करता है क्योंकि इंसान की एक आंख बीमार हो जाए तो दूसरी भी जल्द ही बिमारी की चपेट में आ जाती है। सर सैय्यद साहब ने अशिक्षित और बदहाल मुस्लिम समाज को शिक्षित करने के लिए AMU की स्थापना के लिए जो तकलीफें और रुस्वाई झेली है उसका कोई सानी नहीं है।

युनिवर्सिटी बनाने को चंदा मांगते मांगते सर सैय्यद साहब मौहल्ला-ए-रक्कास तक भी गए। तव्वाइफ ने उन पर तानाकशी करते हुए कहा कि वे अपने पांव में घुंघरू बांधकर आऐं तभी उनको चंदा मिलेगा।

हैरत तो ये हुई कि सर सैय्यद अहमद खान साहब अपने पांव में घुंघरू बांध उसी रक्क्कासा के दर पे हाजिर हो गए। ये देख उसी औरत ने अपने आंसुओं से उनके पांव पगारे और चंदा भी दिया।
इतनी निष्ठा और मेहनत का क्या कोई और नजीर आप गिना पाऐंगे।
आज सर सैय्यद अहमद खान की मुबारक योमे पैदाइस पर मैं उन्हें तहे दिल से प्रणाम करता हूँ।
Sara Nilofar की पोस्ट का कुछ अंश !!

Saleem Peerzada Er
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17 اکتوبر2017 ، یوم سرسید پر خصوصی پیشکش ( شھر طرب علیگڑھ کے نام )
تیری شوریدہ مزاجی کے سبب تیرے نہیں
اے میرے شہر تیرے لوگ بھی اب تیرے نہیں
میں نے ایک اور بھی محفل میں انہیں دیکھا ہے
یہ جو تیرے نظر آتے ہیں یہ سب تیرے نہیں
یہ بہر لحظہ نئی دھن پی تھرکتے ہوئے لوگ
کسے معلوم یہ کب تیرے ہیں کب تیرے نہیں
تیرا احسان کہ جانے گئے پہچانے گئے
یہ کسی اور کہ کیا ھونگے یہ جب تیرے نہیں ….. افتخار عارف

Are we become selective about Sir Syed for Political Expediency & confined his verity of genius in the ambit of “Education Only” surely after ‘independence’??? Can we perceive any thing else other than a Bride and Her Two Beautiful Eyes from Sir Syed collective doctrine ??? In my well considered opinion during last 70 years we could not move further beyond this limit (Lakshman Rekha) perhaps it suits our beleaguered and besieged community to appease those in power and their political dispensation in India. I think It is time to replace hypocrisy of appeasement by factual course of history. Adopting pure and Institutional Secularism Sir Syed who considers India as a bride and Hindu & Muslims its two beautiful eyes, gleefully accepted to be called even as Hindu with reference to his lineage to Hindustan his motherland and banned Cow Slaughter in his college campus to sooth and assuage the religious sentiments of Hindu students of his institution on the occasion of Eid Al Adha , but in my view it is academic responsibility of Muslim Intelligentsia in general and Aligarh Muslim University fraternity in particular to research Why the legendary Indian statesman and doyen of Muslim India compelled to launch”MUSLIM DEFENSE ASSOCIATION” at the fag end of his life at the end of 19th century??? perhaps it shall be befitting tribute in Sir Syed’s bicentenary celebrations if researchers of department of History: the center of advance studies & Sir Syed Academy of AMU decide to include the proposed Topic in their respective research program. In my opinion the present generation must know HOW??? Sir Syed differentiated in between SUBMISSION & SECULARISM.
Let Truth Prevail instead cheap Opportunism & shear Hypocrisy.
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Shaikh Zareen Shaikh
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कोई चाहे कुछ भी कहे, सैयद अहमद खान ने मुसलमानों के लिये जो सोचा था, वो कोई सोच नहीं पाया है. आज भी इंडिया में मुसलमान नेता के नाम पर लोग तो हैं पर उस टक्कर का कोई नहीं है.___
“हज़ारों साल नरगिस अपनी बेनुरी पे रोती है
बङी मुश्किल से होता है चमन में दिदावर पैदा”
सर सैयद अहमद खान की 200 वीं योम ए पैदाइश पर आप सभी को मुबारक बाद 💐💐
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Tarique Khan
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा
देश और दुनिया वालों को सर सय्यद अलैह रहमा की यौमे पैदाइश की मुबारकबाद।