इटावा : जसवंतनगर में चुनाव से पहले ही मुकाबले से बाहर हो गई भाजपा!

इटावा : जसवंतनगर में चुनाव से पहले ही मुकाबले से बाहर हो गई भाजपा!

Posted by

इटावा। उत्तर प्रदेश में जसवंतनगर क्षेत्र समजवादी पार्टी का गढ़ है। यह बात एक बार फिर निकाय चुनाव में साबित हो र्गई है। कहने को तो भाजपा निकाय चुनाव पूरे जिले में मजबूती से लड़ रही है। लेकिन जसवंतनगर नगर पालिका परिषद ऐसी है जहां मुकाबले से पहले ही भाजपा मैदान से बाहर हो गई है। यहां भाजपा का कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर सपा का मुकाबला कांग्रेस, बसपा एवं निर्दलियों से है। यहां की जीत का बहुत कुछ दारोमदार पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव पर निर्भर करता है। वे जसवंतनगर विधानसभा सीट से विधायक भी हैं।

जिले में तीन नगर पालिका परिषद एवं तीन नगर पंचायतें हैं। भरथना, इटावा एवं जसवंतनगर नगर पालिकाएं हैं। इकदिल, बकेवर एवं लखना नगर पंचायत हैं। जसवंतनगर को छोड़कर भाजपा शेष पांचों स्थानाें पर चुनाव लड़ा रही है। भाजपा की प्रत्याशियों की सूची जारी हुई तो उसमें भी सिर्फ पांच ही नाम थे। जसवंतनगर को रिक्त छोड़ा गया था। बाद में श्याम बाबू शंखवार को भाजपा प्रत्याशी बनाने का निर्णय लिया। श्याम बाबू ने नामांकन भी दाखिल कर दिया। इसके बाद जब सिंबल दाखिल करने की बारी आई तो वे समय पर अपना प्रपत्र दाखिल नहीं कर सके। फलस्वरूप उन्हें भाजपा का सिंबल मिलने की संभावनाएं समाप्त हो गई।

जब उन्हें भाजपा का चुनाव निशान नहीं मिला तो नाम वापसी वाले दिन उन्होंने अपना पर्चा वापस ले लिया। भाजपा के समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ना उन्हें गवारा नहीं हुआ। इस प्रकार भाजपा यहां अपना कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतार सकी। बगैर मुकाबले के ही चुनावी मैदान से बाहर हो गई। जसवंतनगर में सपा से सत्यनारायण शंखवार, कांग्रेस से महिपाल सिंह, बसपा से शिवकुमार खलीफा, निर्दलीय सुनील जोनी, राजेंद्र दिवाकर, रामशंकर एडवोकेट, शैलेंद्र गिहार, साहब सिंह वर्मा, सत्यभान सिंह एवं मनीषा बाई किन्नर सहित कुल 16 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। बसपा और कांग्रेस ने विषम परिस्थितियों में भी अपने-अपने प्रत्याशी उतार दिए। भाजपा इस रणनीति में भी पीछे रह गई।