एंटीबॉयटिक्स का ग़लत इस्तेमाल

एंटीबॉयटिक्स का ग़लत इस्तेमाल

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अक्सर हमने देखा है कि छोटी-छोटी बीमारियाँ, जोकि सिर्फ़ कुछ दिन परहेज़ करने से ठीक हो सकती हैं, उनके लिए भी डॉक्टर से दवाई लेकर खाने में फ़ख़्र महसूस करते हैं.

इसके अलावा बहुत से ऐसे भी लोग हैं जो एंटीबॉयटिक्स के इस्तेमाल के तरीक़ों और ज़रूरतों को नहीं समझते और अपनी मर्ज़ी से जब चाहें उन्हें खाते या छोड़ देते हैं.

यहाँ तक कि कुछ लोग तो इस डर से कि बीमार ना हो जाएँ, ख़ुद भी और अपने मवेशियों को भी पहले से ही एंटीबॉयटिक्स दवाएँ खिलाते हैं. जिसका बिल्कुल उल्टा असर होता है.

किसानों और खाद्य पदार्थों से जुड़े लोगों से अपील की गई है कि स्वस्थ मवेशियों में बीमारियाँ होने से रोकने के लिए एंटीबॉयटिक्स दवाओं का इस्तेमाल बन्द कर दें.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने किसानों और खाद्य पदार्थों के क्षेत्र में सक्रिय उद्योगों से एंटीबॉयटिक्स दवाओं के सही इस्तेमाल के हालात और तरीक़े समझने का आग्रह किया है.

संगठन ने गहरी चिन्ता जताते हुए कहा है कि स्वस्थ मवेशियों को बीमारियों से बचाने के लिए एंटीबॉयटिक्स दवाओं के इस्तेमाल का चलन बढ़ता जा रहा है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बेवजह और ज़रूरत से ज़्यादा एंटीबॉयटिक्स दवाओं का इस्तेमाल करने से उनका असर कम या ख़त्म होता जा रहा है.

इंसानों के जिस्म में गम्भीर संक्रमण यानी Infection पैदा करने वाले बहुत से बैक्टीरिया पर तो एंटीबॉयटिक्स दवाओं का असर होना भी बन्द हो गया है.

उन बैक्टीरिया पर किसी भी इलाज का या तो बिल्कुल असर नहीं होता, या बहुत कम असर होता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का तो यहाँ तक कहना है कि मौजूदा शोध और अनुसन्धान को देखते हुए तो लगता है कि इन हालात में कोई तब्दीली नहीं आएगी.

यानी नए क़िस्म के एंटीबॉयटिक्स जल्दी तैयार नहीं होने वाले हैं जिनका असर इन बैक्टीरिया पर हो सके.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के Director General यानी महानिदेशक टेड्रॉस एडहनॉम ग़ैबरेयेसस का कहना है कि असरदार एंटीबॉयटिक्स का ना होना या ऐसे बैक्टीरिया की मौजूदगी एक बहुत बड़ा स्वास्थ्य ख़तरा है जिन पर एंटीबॉयटिक्स का असर नहीं होता है.

ऐसे हालात में जानलेवा बीमारियाँ बहुत तेज़ी से फैल सकती हैं.

रिपोर्ट प्रस्तुति: महबूब ख़ान