ग्वालियर में बना महत्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोड़से का मंदिर!

ग्वालियर में बना महत्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोड़से का मंदिर!

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राष्ट्रपिता महत्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोड़से का महिमा मंडान तो संघ और बीजेपी हमेशा से ही करते आये है, सत्ता के लालच में यह लोग गाँधी के सम्मान करने का भी पाखंड करते हैं| इसे अभिव्यक्ति की अज़ादी नहीं हत्या की संस्कृति को बढ़ावा देना और हत्यारे और अपराधी का महिमामंडन करना कहते हैं। मोदी भक्तों से इससे ज्यादा उम्मीद भी नहीं की जा सकती है। हम सब तो संघ और बीजेपी की असलियत जानते हैं लेकिन कुछ लोगों को भ्रम था शायद उनकी आंख खुल जाए। वैसे मोदी और शिवराज को गांधी के सम्मान का ढोंग अब छोड़ देना चाहिए।

आरएसएस और बीजेपी के असली मंसूबे अब सामने आ रहे हैं। बीजेपी शासित मध्य प्रदेश के ग्वालियर में गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाया गया है। इस काम को आज गोडसे की फांसी की बरसी के दिन हिंदू महासभा ने अंजाम दिया है। बता दें कि नाथूराम गोडसे को आज ही के दिन यानी 15 नवंबर 1949 को अंबाला जेल में फांसी दी गई थी। हिंदू महासभा इस दिन को बलिदान दिवस के रूप में मना रही है।

बताय जा रहा है कि महासभा ने पहले इसके लिए प्रशासन से जमीन मांगी थी। जमीन न मिलने पर उसने ग्वालियर स्थित अपने दफ्तर को ही गोडसे मंदिर में तब्दील कर दिया। और फिर उसमें गोडसे की प्रतिमा स्थापित कर दी। लेकिन सब कुछ जानते हुए भी न तो प्रशासन ने इसका विरोध किया और न ही मुख्यमंत्री शिवराज और उनके मंत्रियों के इसका कोई संज्ञान लिया। एतराज की बात तो दूर इस कृत्य की बीजेपी की तरफ से निंदा भी नहीं की गयी।

इस मौके पर महासभा के कार्यकर्ताओं ने गोडसे की मूर्ति की आरती उतारी उसके बाद मौजूद लोगों में प्रसाद का वितरण किया गया।

नवजीवन वेबसाइट के मुताबिक महासभा के नेता जयवीर भारद्वाज ने माना कि गोडसे के मंदिर को बनाने के लिए प्रशासन से इजाजत मांगी गयी थी। लेकिन प्रशासन ने उसकी इजाजत नहीं दी। ऐसे में महासभा ने दफ्तर को ही मंदिर का रूप दे दिया। भारद्वाज का कहना है कि गोडसे जब भी ग्वालियर आते थे तो वो हिंदू महासभा के इसी दफ्तर में रुकते थे। ऐसे में अब इसे मंदिर का रूप दे दिया गया है।

आरती के दौरान मौजूद कुछ लोगों का कहना है कि आरती के समय दो पुलिस वाले आए थे, लेकिन आस-पास के लोगों से मामूली पूछताछ कर चले गए।

नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 की शाम दिल्ली के बिड़ला हाऊस में महात्मा गांधी को गोली मारी थी। उस समय गांधी जी शाम की प्रार्थना के लिए जा रहे थे, जब गोडसे ने उन पर नजदीक से तीन गोलियां चलाईं थी, जिससे गांधी जी की मौत हो गई थी।