#जैसी_संगत_वैसी_रंगत

#जैसी_संगत_वैसी_रंगत

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by सिकन्दर कायमखानी खानजादा
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दोस्ती एक व्यक्ति की प्राकृतिक और सामाजिक आवश्यकता है, एक व्यक्ति अपने मित्रों से दिल की बातें शियर कर पाता है, उनके के साथ बेहतर समय गुज़ार पाता है और उनकी संगत से बहुत कुछ सीखता भी है। एक समय था कि दोस्ती मिल कर डाइरेक्त की जाती थी, अब सोशल मेडिया के प्रचलन से indirect दोस्ती भी होने लगी है, जैसे फसबुक और ट्वीटर आदि की दोस्ती।
एक व्यक्ति अपने दोस्त से प्रभावित होता हैः
यह सच्चाई है कि आदमी अपने दोस्त के रास्ते पर होता है, यदि उसका दोस्त अच्छा होगा तो वह भी अच्छा होगा और यदि उसका दोस्त बुरा होगा तो वह भी बुरा होगा, इसी लिए कहते हैं:
” मुझे बता दो कि तुम्हारा दोस्त कौन है मैं बता दूंगा कि तुम कौन हो”
और कहते हैं
” जैसी संगत वैसी रंगत ”
जी हाँ! एक आदमी अपने दोस्त के विचार और स्वभाव के अनुसार होता है, इसकी व्याख्या अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यूं कर दी हैः
الرجل على دين خليله، فلينظر أحدكم من يخالل الجامع الصغير : 4516: حسن
“एक आदमी अपने मित्र के धर्म पर होता है इस लिए एक आदमी को देख लेना चाहिए कि वह किससे दोस्ती कर रहा है ” ( अल-जामिअ अस्सग़ीरः 4516, हसन )
एक शराबी से पूछें कि उसने शराब का सेवन कैसे शुरू किया? एक अश्लीलकर्मी से पूछें कि उसे अश्लील की लत कैसे लगी, एक अपराधी से पूछें कि उसके जेल जाने का कारण क्या बना, एक नशाखोर से पूछें कि उसे नशे की आदत कैसे लगी, सभी का जवाब एक ही होगा कि बुरी संगत ने उन्हें यहां तक ​​पहुंचाया। अल्लाह के रसूल सल्ल. ने एक उदाहरण द्वारा अच्छी और बुरी दोस्ती को प्रकट जाहिर कर दी है, आप सल्ल. ने फरमाया :
مَثَلُ الجليسِ الصَّالحِ والسَّوءِ ، كحاملِ المسكِ ونافخِ الكيرِ ، فحاملُ المسكِ : إمَّا أن يُحذِيَكَ ، وإمَّا أن تبتاعَ منهُ ، وإمَّا أن تجدَ منهُ ريحًا طيِّبةً ، ونافخُ الكيرِ : إمَّا أن يحرِقَ ثيابَكَ ، وإمَّا أن تجدَ ريحًا خبيثةً صحيح البخارى 5534- صحيح مسلم 2628
“अच्छे और बुरे दोस्त की मिसाल खुशबू बेचने वाले और भट्टी धूंकने वाले के जैसे है कि खुशबू बेचने वाला या तो तुझे दे देता है या तुम उस से कुछ खरीद लेते हो या उसके पास रहने के कारण तुझे अच्छी खुशबू मिलती है, और भट्टी धूंकने वाला या तो तेरे कपड़े जला डालेगा या तुझे उसके पास बुरा सुगंध सूंघने को मिलेगा।”
संगत का प्रभाव सब से अधिक बच्चों पर पड़ता हैः
अच्छी या बुरी संगत से सबसे अधिक प्रभावित हमारे बच्चे होते हैं क्यों कि बाल्यावस्था से युवावस्था तक उन्हें दोस्तों से अधिक वास्ता पड़ता है, यह सच्चाई है कि हम अपने बच्चों को बुरी संगत से बहुत कम बचा पाते हैं हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों पर उनके माता पिता, बड़े भाई बहिन और रिश्तेदारों का असर केवल चालीस प्रतिशत होता है,बच्चों पर 60 प्रतिशत प्रभाव उनके अपने दोस्तों का होता है. मित्र अच्छा मिला तो बच्चा भी अच्छा बनेगा और यदि मित्र बुरा मिला तो बच्चा भी बुरा बनेगा।.
यदि कोई यह दावा करे कि मेरे बच्चे बुरे बच्चों के साथ रहते हैं लेकिन उनकी बुराई उन पर कोई असर न डाल सकी है तो मैं कहता हूँ कि वह झूठा है। ऐसा हो नहीं सकता कि एक बच्चा बुरे बच्चों के साथ रह कर अच्छा बन सके, अथवा उन से प्रभावित न हो सके।
अच्छी संगत क्यों नहीं ?
अगर हम बुरे लोगों के साथ रहते हैं तो यह याद रखें कि इसका परिणाम हमें दुनिया में भी भुगतना होगा और आखिरत में नरक की पीड़ा के रूप मैं भुगतने वाले ही हैं. बुरी संगत अपनाना मानो बुरे परिणाम को पहुंचना है. अगर साथी अच्छा होगा तो भविष्य में हमारा परिणाम अच्छा होगा, यदि साथी बुरा होगा तो भविष्य में हमारा परिणाम बुरा होगा.
फिर आपने जो संगत अपनाई है उसका उद्देश्य यही है ना कि आप सुकून और शान्ति पा सकें, सवाल यह है कि क्या सुकून बुरे लोगों की संगति में, इंटरनेट पर अश्लील दृश्यों के अवलोकन में, मदिरापान के सेवन में और शराब के अड्डे में है? नहीं और कदापि नहीं. सुकून का सृष्टा हम और आप नहीं बल्कि हमारा मालिक है, तो फिर हमें बताइए कि कया वह चाहेगा कि शान्ति ऐसे लोगों को प्रदान कर दे जो उसके अवज्ञाकारी हैं ? बल्कि अल्लाह सुकून से उन्हें सम्मानित करता है जो उसके आज्ञाकारी हैं।
फीर यहाँ केवल सांसारिक खुशी और भोग विलास का मस्ला नहीं महाप्रलय के दिन की मुक्ति उसी संगत पर आधारित है, और यह तभी प्राप्त हो सकती है जब आप बुरी संगत छोड़ेंगे. कुछ लोग यह कहते हुए नहीं थकते कि नेक बनना चाहता हूँ, बुराई से दूर होना चाहता हूँ, नमाज़ी बनना चाहता हूँ, लेकिन नहीं बन पाता. जानते हैं क्यों नहीं बन पाते? इरादा तो है, दिल में बुराई का एहसास भी है लेकिन बुरी संगत नहीं छुटी जिसके कारण नेक काम करना या बुराई से बचना संभव नहीं हो पा रहा है।
आपने सहीह बुखारी की वह प्रसिद्ध हदीस जरूर सुनी होगी कि सौ व्यक्तियों का हत्यारा जब एक विद्वान से अपनी समस्या पूछता है कि क्या 100 व्यक्तियों को क़त्ल करने के बाद भी मेरे लिए पश्चाताप और तौबा का मौक़ा है तो आलिम जवाब देता है कि हां तेरे लिए पश्चाताप का अवसर है, तेरी तौबा के रास्ते में आखिर कौन आड़े आ सकता है. लेकिन तुम जिस क्षेत्र में रहते हो उसे छोड़ कर फलाँ जगह चले जाओ जहाँ नेक लोग रहते हैं ताकि उनके साथ रह कर अल्लाह की इबादत कर सको।
यह वास्तव में सही मार्गदर्शन और अच्छी संगत का प्रभाव है कि संगत अच्छी होगी तो आप अच्छा बन सकेंगे, और संगत अच्छी नहीं होगी तो लाख चाहने के बावजूद आप अच्छा नहीं बन सकते।
बुरे दोस्तों को Delete कीजिएः
आईए कमर बांधिए, कागज और क़लम लीजिए और अपने दोस्तों की सूची तैयार कीजिए, इन में जो अनावश्यक प्रकार के दोस्त हों, जो आपका समय बर्बाद करते हों, जो आप को बुराइयों पर उकसाते हों, जो आपकी इबातों में बाध्य बनते हों, उनको अपने दोस्तों की सूची से डिलिट करें. और एक दो आदमी से दोस्ती रखें जो नमाज़ी हों, जो अच्छे हों, जो आपको भलाई के लिए आकर्षित कर सकें, जो आपको बुराई से रोक सकें, जो अच्छे व्यवहार के हों, जो समझदार हों मूर्ख न हों, ऐसे लोगों से आपकी संगत होगी तो दुनिया में अच्छे रास्ते पर चलेंगे और आखिरत में क़्यामत के दिन अल्लाह की छाया मिलेगी जिस दिन उसकी छाया के अलावा कोई दूसरी छाया न होगी, फिर आख़िरत के सारे चरणों में हिसाब किताब आसान होते जाएंगे।
अब हम देखना चाहते हैं कि हमारे इस लेख को पढ़ने के बाद कितने भाई ऐसे हैं जो साहस से कहें कि आज से मैं बुरे दोस्तों की संगत समाप्त कर लूगां। और कितनी बहिनें ऐसी हैं जो साहस से कहें कि आज से मैं अपनी बुरी सहेलियों से अलग हो जाउंगी .#जैसी_संगत_वैसी_रंगत
दोस्ती एक व्यक्ति की प्राकृतिक और सामाजिक आवश्यकता है, एक व्यक्ति अपने मित्रों से दिल की बातें शियर कर पाता है, उनके के साथ बेहतर समय गुज़ार पाता है और उनकी संगत से बहुत कुछ सीखता भी है। एक समय था कि दोस्ती मिल कर डाइरेक्त की जाती थी, अब सोशल मेडिया के प्रचलन से indirect दोस्ती भी होने लगी है, जैसे फसबुक और ट्वीटर आदि की दोस्ती।
एक व्यक्ति अपने दोस्त से प्रभावित होता हैः
यह सच्चाई है कि आदमी अपने दोस्त के रास्ते पर होता है, यदि उसका दोस्त अच्छा होगा तो वह भी अच्छा होगा और यदि उसका दोस्त बुरा होगा तो वह भी बुरा होगा, इसी लिए कहते हैं:
” मुझे बता दो कि तुम्हारा दोस्त कौन है मैं बता दूंगा कि तुम कौन हो”
और कहते हैं
” जैसी संगत वैसी रंगत ”
जी हाँ! एक आदमी अपने दोस्त के विचार और स्वभाव के अनुसार होता है, इसकी व्याख्या अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यूं कर दी हैः
الرجل على دين خليله، فلينظر أحدكم من يخالل الجامع الصغير : 4516: حسن
“एक आदमी अपने मित्र के धर्म पर होता है इस लिए एक आदमी को देख लेना चाहिए कि वह किससे दोस्ती कर रहा है ” ( अल-जामिअ अस्सग़ीरः 4516, हसन )
एक शराबी से पूछें कि उसने शराब का सेवन कैसे शुरू किया? एक अश्लीलकर्मी से पूछें कि उसे अश्लील की लत कैसे लगी, एक अपराधी से पूछें कि उसके जेल जाने का कारण क्या बना, एक नशाखोर से पूछें कि उसे नशे की आदत कैसे लगी, सभी का जवाब एक ही होगा कि बुरी संगत ने उन्हें यहां तक ​​पहुंचाया। अल्लाह के रसूल सल्ल. ने एक उदाहरण द्वारा अच्छी और बुरी दोस्ती को प्रकट जाहिर कर दी है, आप सल्ल. ने फरमाया :
مَثَلُ الجليسِ الصَّالحِ والسَّوءِ ، كحاملِ المسكِ ونافخِ الكيرِ ، فحاملُ المسكِ : إمَّا أن يُحذِيَكَ ، وإمَّا أن تبتاعَ منهُ ، وإمَّا أن تجدَ منهُ ريحًا طيِّبةً ، ونافخُ الكيرِ : إمَّا أن يحرِقَ ثيابَكَ ، وإمَّا أن تجدَ ريحًا خبيثةً صحيح البخارى 5534- صحيح مسلم 2628
“अच्छे और बुरे दोस्त की मिसाल खुशबू बेचने वाले और भट्टी धूंकने वाले के जैसे है कि खुशबू बेचने वाला या तो तुझे दे देता है या तुम उस से कुछ खरीद लेते हो या उसके पास रहने के कारण तुझे अच्छी खुशबू मिलती है, और भट्टी धूंकने वाला या तो तेरे कपड़े जला डालेगा या तुझे उसके पास बुरा सुगंध सूंघने को मिलेगा।”
संगत का प्रभाव सब से अधिक बच्चों पर पड़ता हैः
अच्छी या बुरी संगत से सबसे अधिक प्रभावित हमारे बच्चे होते हैं क्यों कि बाल्यावस्था से युवावस्था तक उन्हें दोस्तों से अधिक वास्ता पड़ता है, यह सच्चाई है कि हम अपने बच्चों को बुरी संगत से बहुत कम बचा पाते हैं हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों पर उनके माता पिता, बड़े भाई बहिन और रिश्तेदारों का असर केवल चालीस प्रतिशत होता है,बच्चों पर 60 प्रतिशत प्रभाव उनके अपने दोस्तों का होता है. मित्र अच्छा मिला तो बच्चा भी अच्छा बनेगा और यदि मित्र बुरा मिला तो बच्चा भी बुरा बनेगा।.
यदि कोई यह दावा करे कि मेरे बच्चे बुरे बच्चों के साथ रहते हैं लेकिन उनकी बुराई उन पर कोई असर न डाल सकी है तो मैं कहता हूँ कि वह झूठा है। ऐसा हो नहीं सकता कि एक बच्चा बुरे बच्चों के साथ रह कर अच्छा बन सके, अथवा उन से प्रभावित न हो सके।
अच्छी संगत क्यों नहीं ?
अगर हम बुरे लोगों के साथ रहते हैं तो यह याद रखें कि इसका परिणाम हमें दुनिया में भी भुगतना होगा और आखिरत में नरक की पीड़ा के रूप मैं भुगतने वाले ही हैं. बुरी संगत अपनाना मानो बुरे परिणाम को पहुंचना है. अगर साथी अच्छा होगा तो भविष्य में हमारा परिणाम अच्छा होगा, यदि साथी बुरा होगा तो भविष्य में हमारा परिणाम बुरा होगा.
फिर आपने जो संगत अपनाई है उसका उद्देश्य यही है ना कि आप सुकून और शान्ति पा सकें, सवाल यह है कि क्या सुकून बुरे लोगों की संगति में, इंटरनेट पर अश्लील दृश्यों के अवलोकन में, मदिरापान के सेवन में और शराब के अड्डे में है? नहीं और कदापि नहीं. सुकून का सृष्टा हम और आप नहीं बल्कि हमारा मालिक है, तो फिर हमें बताइए कि कया वह चाहेगा कि शान्ति ऐसे लोगों को प्रदान कर दे जो उसके अवज्ञाकारी हैं ? बल्कि अल्लाह सुकून से उन्हें सम्मानित करता है जो उसके आज्ञाकारी हैं।
फीर यहाँ केवल सांसारिक खुशी और भोग विलास का मस्ला नहीं महाप्रलय के दिन की मुक्ति उसी संगत पर आधारित है, और यह तभी प्राप्त हो सकती है जब आप बुरी संगत छोड़ेंगे. कुछ लोग यह कहते हुए नहीं थकते कि नेक बनना चाहता हूँ, बुराई से दूर होना चाहता हूँ, नमाज़ी बनना चाहता हूँ, लेकिन नहीं बन पाता. जानते हैं क्यों नहीं बन पाते? इरादा तो है, दिल में बुराई का एहसास भी है लेकिन बुरी संगत नहीं छुटी जिसके कारण नेक काम करना या बुराई से बचना संभव नहीं हो पा रहा है।
आपने सहीह बुखारी की वह प्रसिद्ध हदीस जरूर सुनी होगी कि सौ व्यक्तियों का हत्यारा जब एक विद्वान से अपनी समस्या पूछता है कि क्या 100 व्यक्तियों को क़त्ल करने के बाद भी मेरे लिए पश्चाताप और तौबा का मौक़ा है तो आलिम जवाब देता है कि हां तेरे लिए पश्चाताप का अवसर है, तेरी तौबा के रास्ते में आखिर कौन आड़े आ सकता है. लेकिन तुम जिस क्षेत्र में रहते हो उसे छोड़ कर फलाँ जगह चले जाओ जहाँ नेक लोग रहते हैं ताकि उनके साथ रह कर अल्लाह की इबादत कर सको।
यह वास्तव में सही मार्गदर्शन और अच्छी संगत का प्रभाव है कि संगत अच्छी होगी तो आप अच्छा बन सकेंगे, और संगत अच्छी नहीं होगी तो लाख चाहने के बावजूद आप अच्छा नहीं बन सकते।
बुरे दोस्तों को Delete कीजिएः
आईए कमर बांधिए, कागज और क़लम लीजिए और अपने दोस्तों की सूची तैयार कीजिए, इन में जो अनावश्यक प्रकार के दोस्त हों, जो आपका समय बर्बाद करते हों, जो आप को बुराइयों पर उकसाते हों, जो आपकी इबातों में बाध्य बनते हों, उनको अपने दोस्तों की सूची से डिलिट करें. और एक दो आदमी से दोस्ती रखें जो नमाज़ी हों, जो अच्छे हों, जो आपको भलाई के लिए आकर्षित कर सकें, जो आपको बुराई से रोक सकें, जो अच्छे व्यवहार के हों, जो समझदार हों मूर्ख न हों, ऐसे लोगों से आपकी संगत होगी तो दुनिया में अच्छे रास्ते पर चलेंगे और आखिरत में क़्यामत के दिन अल्लाह की छाया मिलेगी जिस दिन उसकी छाया के अलावा कोई दूसरी छाया न होगी, फिर आख़िरत के सारे चरणों में हिसाब किताब आसान होते जाएंगे।
अब हम देखना चाहते हैं कि हमारे इस लेख को पढ़ने के बाद कितने भाई ऐसे हैं जो साहस से कहें कि आज से मैं बुरे दोस्तों की संगत समाप्त कर लूगां। और कितनी बहिनें ऐसी हैं जो साहस से कहें कि आज से मैं अपनी बुरी सहेलियों से अलग हो जाउंगी .

पॉस्ट by सिकन्दर कायमखानी खानजादा