तीन प्रयोग करके देखिये और उनके परिणाम नोट कीजिये!

तीन प्रयोग करके देखिये और उनके परिणाम नोट कीजिये!

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— संजय जोठे via Suryansh Mulnivashi
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तीन प्रयोग करके देखिये और उनके परिणाम नोट कीजिये
१. पहला प्रयोग:- गाँव के पचास दलित युवा इकट्ठे होकर चौराहे पर घोषणा करें कि हम नास्तिक हो रहे हैं.
२. दुसरा प्रयोग:- घोषणा करें कि हम क्रांतिकारी हो रहे हैं.
३. तीसरा प्रयोग:- घोषणा करें कि हम बुद्ध की सरण जा रहे हैं.
इसके बाद नोट कीजिये कि पूरे गाँव में खलबली किस बात से मचती है ? सामाजिक राजनितिक मोलभाव (बारगेनिंग) के लिए आपको किस घोषणा के बाद गंभीरता से लिया जाता है ?
बाबा साहेब अंबेडकर ने जो रणनीति अपनाई उसे ठीक से समझिये. जब तक बाबा साहेब अंबेडकर ने धर्म परिवर्तन की घोषणा नहीं की थी तब तक उन्हें उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया था जितना घोषणा के बाद में लिया गया था. इस घोषणा के तुरंत बाद न सिर्फ राजनीतिक सत्ताओं ने बल्कि सभी धर्म सत्ताओं ने उन्हें गंभीरता से लेना शुरू कर दिया था.
इसका साफ़ मतलब है, अगर आपके सामाजिक राजनीतिक आन्दोलनों के पीछे एक सबल धार्मिक आन्दोलन नहीं है तो आपके सामाजिक राजनीतिक आन्दोलन को कोई गंभीरता से नहीं लेगा.
आप क्रांतिकारी प्रगतिशील नास्तिक इत्यादि बन सकते हैं लेकिन पुराने शोषक घाघ लोग जानते हैं कि क्रान्ति, प्रगतिशीलता और नास्तिकता से कुछ होने वाला नहीं है, ऐसी प्रगतिशीलता को वे रोज चबाकर थूकते हैं. क्रान्ति, प्रगति आदि जैसे इन बड़े बड़े नामों का चोगा पहनकर दलितों को कैसे लूटा जाए ये भी उन्होंने सीख लिया है.
उन्हें आपके प्रगतिशील, नास्तिक या क्रांतिकारी होने से अधिक फर्क नहीं पड़ता. लेकिन प्रगतिशीलता, क्रान्ति और नास्तिकता के साथ ‘नास्तिक धर्म’ अर्थात बौद्ध धर्म का आन्दोलन भी चलता है तब वे पुराने शोषक एकदम से भरभरा के गिर जायेंगे.
यहाँ एक और सबसे जरुरी बात याद रखिये, दलित और (ओबीसी) शूद्र को धर्म परिवर्तन नहीं करना है. बाबा साहेब अंबेडकर के अनुसार वे बौद्ध ही हैं. उन्हें सिर्फ बौद्ध जीवन शैली और आंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं को जीना शुरू करना है. आधिकारिक धर्मांतरण की कोई जरूरत नहीं है. आप आज से अभी से बुद्ध का मार्ग अपनाकर जीना शुरू कर दीजिये. गाँव गली मुहल्लों में युवाओं को समझाइये और बुद्ध सहित बौद्ध धर्म के बारे में अध्ययन कीजिये.
— संजय जोठे