दाइश_से_आज़ाद होने के बाद #सद्दाम_हुसैन का महल : देखें फ़ोटो

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वर्ष 2003 में इराक़ पर अमरीका के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय सैनिकों के हमले के बाद और सद्दाम के महल को इराक़ी अधिकारियों के हवाले करने से पहले तक अमरीकी सैनिक सद्दाम के हमलों को अपने काम के लिए प्रयोग करते थे।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार इराक़ से अतिग्रहणकारी सैनिकों के निकलने के बाद इराक़ सरकार ने इन महलों का हुलिया बदल दिया और इन्हें सरकारी कार्यालयों और सैन्य छानियों में बदल दिया किन्तु वर्ष 2014 में इराक़ पर दाइश के हमले के बाद इन महलों पर दाइश का नियंत्रण हो गया और यह महल तिकरीत पर दाइश के नज़र रखने के मुख्य स्थान में बदल गया।

वर्ष 2015 और इराक़ के विभिन्न क्षेत्रों में सेना और स्वयं सेवी बलों की प्रगति के बाद दाइश के हाथों से अधिकतर इलाक़े निकल गये और इसी प्रकार सद्दाम के महलों पर भी सेना का नियंत्रण हो गया।

सद्दाम हुसैन का जन्म 28 अप्रैल 1937 को बग़दाद के उत्तर में स्थित तिकरित के पास अलऔजा गांव में हुआ था। उसके पिता मज़दूर थे जिसका निधन उसके जन्म से पहले ही हो गया था। उस दौर का तिकरित अपनी वीभत्सताओं के लिए कुख्यात था। इन परिस्थितियों ने सद्दाम को बचपन में ही भयानक रूप से शक्की और निर्दयी बना दिया। बच्चों के हाथों पिटने के भय से बाल सद्दाम हमेशा अपने पास एक लोहे की छड़ रखता था।

नायक या खलनायकः
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किशोरावस्था में कदम रखते-रखते वह विद्रोही हो गया और ब्रिटिश नियंत्रित राजतंत्र को उखाड़ फेंकने के लिए चल रहे राष्ट्रवादी आंदोलन में कूद पड़ा। शुरुआत में वह बड़ा उदार था किन्तु धीरे धीरे वह अपने असली रूप में आ गया। 16 जुलाई 1979 को हसन अलबक्र को सत्ता से हटा कर वह स्वयं इराक़ की गद्दी पर बैठ गया। उसने एक के बाद एक 66 विरोधियों को मौत के घाट उतार दिया।

सद्दाम हुसैन ने 1982 में दुजैल गांव पर स्वयं पर जानलेवा हमले के आरोप में 148 को मौत के घाट उतरवा दिया। उन्होंने इराक़ी कुर्दों पर भी बेपनाह अत्याचार किए।