#पांच सितारा शादी और हम….#हादसे और सोनाली

#पांच सितारा शादी और हम….#हादसे और सोनाली

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सोनाली मिश्र
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पांच सितारा शादी और हम
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अब शादी का कार्ड आने पर पहले की तरह नहीं होता कि जाया जाए! अजनबीपन की एक दीवार जैसे सामने खड़े हो जाती है. एक चमक, चमकीली दुनिया, महंगे से महंगे डिज़ाईनर परिधानों से सजी औरतें, सब एक आर्टिफिशियल सा! सेल्फी लिए जाने की ललक, खूबसूरत से खूबसूरत लगने की जद्दोजहद से जूझती महिलाएं! नया नया हेयर स्टाइल, और अंत में हर मेज पर आपके द्वारा पिए गए या खाए गए का हिसाब लगाने वाला एक इम्प्लोयी! वह ताकता है देखता है कि आपके साथ आए हुए बच्चों ने कितना कोल्ड ड्रिंक पिया! “मैडम, कैन आई सर्व यू समथिंग?” वह बहुत ही विनम्रता से पूछता है, आप जैसे ही उठकर दूल्हे से मिलने जाओ, पीछे से आपकी मेज पर नज़र लगाए हुए वह लड़का, अपने हाथ में पकड़ी हुई बिल्बुक में एक और प्लेट दर्ज करता है और प्लेट हटाकर ले जाता है. आप दूल्हे से मिलकर आए, और वह प्लेट गायब! “मैडम, और कुछ लाऊँ आपके लिए?” और आपके सामने होस्ट की याचनापूर्ण हिदायत आ जाती है “भाभी, कैन यू यूज़ ओनली वन प्लेट विथ योर किड्स?”

ओह! ऐसे में इटावा में होने वाली वो सब शादियाँ याद आ जाती हैं, जिनमें बच्चों पर खाने और पीने को लेकर कोई भी प्रतिबन्ध नहीं होता था, महंगी प्लेट प्रणाली और डिज़ाईनर शादियों ने मेहंदी और हल्दी तो डिज़ाईनर कर दिए, मगर हल्दी में कौन बैठेगा, हल्दी की रस्म कौन करेगा, यह भी तय कर दिया! अब गली के किसी भी कोने पर स्थित कोई भी चाची अपने मन से अपने मोहल्ले की लड़की को हल्दी या तेल चढाने नहीं आ सकती! डिज़ाईनर फोटो फ्रेम में वो फिट नहीं होते हैं. इधर हम प्लेट को खोजते हुए इटावा और इटावा की शादियों में विचरण कर रहे हैं, इधर बच्चे उकता रहे हैं. तभी पीछे से बच्चे कहते हैं “माँ, प्लीज़ ऐसी शादियों में मत आना! शादी की पार्टी कहीं ऐसी होती है!” महानगरों में मात्र दो घंटे की डिज़ाईनर शादियों में हम क्या देख पाते? सवाल यही कि आखिर हम शादी की पार्टी क्यों देते हैं? मुझे इस पांच सितारा चमक से न जाने क्यों अजीब सी वितृष्णा होती है. इस चकाचौंध में शादियों में पल्ला आने की सारी संस्कृति समाप्त हो गयी है. अब हर इवेंट की तरह शादी भी एक इवेंट हो गयी है. अब पूरी में लड्डू रखकर कोई न्योता देने नहीं आता! मट्ठे के आलू और खट्टा मीठा कद्दू को पत्तल पर रखकर कोई नहीं खिलाता! बस बचा है तो बस यही पांच सितारा डिज़ाईनर शादी! प्लेट सिस्टम और यह याचना “प्लीज़ यूज़ वन प्लेट ओनली!” और पांच सितारा संस्कृति से मेरी विरक्ति और बढ़ जाती है. घर पर आकर मैं अपने बच्चों के साथ जमीन पर बिछे हुए अपने गद्दे पर जब लेटती हूँ, और आद्या का मासूम सवाल आता है “माँ, क्या आपके बचपन की तरह नहीं हो सकता सब कुछ, जब आपके पास फोन नहीं थे, बस दोस्त थे! और शादियों में उछलकूद थी”
जब डिज़ाईनर लहंगे नहीं हुआ करते थे, बल्कि हम मामा चाचा की बहनों में एक लहंगा आता था, तो हम सब उसे साधिकार पहनते थे! शादी सीज़न में मम्मियां और मामियां मिलकर अपना आना जाना तय करती थीं, भात की बातें करती थी! लेडीज़ संगीत की बातें होती थीं. अब तो वाकई सब इन्हीं दो तीन घंटों में सिमट गया है!

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हादसे और सोनाली
एक हादसे के बाद सांस लेने की थोड़ी सी मोहलत सी लेने का मन होता है, वैसे ही कोई न कोई घटना सहजता को तोड़ने के लिए तुरंत ही आ जाती है. और फिर कहती है, बचो, बचो! तो हुआ यूं कि आज थोड़ी सी शॉपिंग के बाद वापस लौटे, ठण्ड के कारण स्कूटी घर पर ही थी. क्योंकि आद्या मना कर देती हैं. तो लौटते हुए, भरे दिन में शाम साढ़े चार बजे, ऑटो के मुड़ते ही, ऑटो के बगल में एक बाइक पर बैठे हुए दो लड़के आए! शायद नौसिखिये रहे होंगे, या अभी ट्रेनी होंगे, हाथ में पकड़ा हुआ बैग तो नहीं, पर फोन पर एकदम से झपट्टा सा मारा! मगर जब चेन खींचने की घटना हुई थी, तब जिस तरह से धक्का दिया था, उसी तत्परता से मेरे बाएँ हाथ ने उसे धक्का दिया और सीधे हाथ में थमा हुआ फोन, ऑटो में ही गिर गया! मेरे धक्का देते ही एकदम से उनकी बाइक लड़खड़ाई मगर जल्द ही तेजी पकड़ ली! अगर आज स्कूटी होती तो हम भी थोडा पीछा करते, हालांकि मेरे ऑटो वाले ने भरसक प्रयास किया, मगर इस मामले में वे अनुभवी थे तो तेजी से भाग गए! हे यूपी पुलिस, गाज़ियाबाद पुलिस, दिन दहाड़े इस तरह, मोबाइल खिंचना, या प्रयास होना, ये अच्छी बात नहीं है! शायद परसों चुनाव संपन्न हुए हैं, तो आज पुलिस भी कम ही थी. ऑटो वाला बोला “मैडम, स्पीड बढ़ाकर पकडूँ क्या?” तो जैसे जब वी मेट में शाहिद कपूर टैक्सी चला रहा था, वैसे ही हमारे ऑटो वाले ने कोशिश तो की, मगर ये तो वे गए और वे गए! चेहरे पर हैलमेट था, और बाइक “एज यूज्युअल, एक दम नई थी” अस्थायी नंबर वाली”. तो कहाँ से खोजते……….