…बस जहां चाह वहाँ राह…ठान लिया…!!!

…बस जहां चाह वहाँ राह…ठान लिया…!!!

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■ Sara Nilofar
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सेठ रमेश मोटवानी आज कुछ परेशान थे। उसके अकाउंटेंट ने काम छोड़ दिया था। और न्यूज़ पेपर मे अकाउंटेंट के लिए इश्तहार देने के बावजूद जो दो उम्मीदवार आए थे। उनका म्यार तस्सलीबक्स नहीं था ।अकाउंटस का काम टेली सॉफ्टवेयर मे पूरा करके सी ए को जल्दी देना था।
शॉप मे एक मौलाना आते है। और फरमाते है की “मैं आप का इश्तेहार पढ़ कर आया हू “।
सेठ रमेश मोटवानी ने मन ही मन मे सोचा की यह मजहबी आदमी टेली सॉफ्टवेयर क्या जानता होगा !
सेठ रमेश मोटवानी के चेहरे के भाव को समझते हुए मौलाना ने कहा ” एक बार मुझे मौका दीजिए आप को कोई शिकायत नहीं होगी ” ।
सेठ रमेश मोटवानी असमंजस के बावजूद हाँ कर दिये। मौलाना ने टेली सॉफ्टवेयर मे अकाउंटस के काम मुक्कम्मल किया। डिजिटल फाइल सी ए तक वक़्त से पहले पहुंच गई। चेक करने के बाद सी ए ने सेठ रमेश मोटवानी से कहा की “यह काम तो एकदम सही है।पहले से कहीं अच्छा … कहीं कोई गलती नहीं है। “
सेठ रमेश मोटवानी अब रीलेक्स महसूस कर रहे थे ।
सेठ रमेश मोटवानी ने मौलाना से पूछा की “आम तौर पर मज़हबी आदमी, मज़हबी काम तक ही महदूद रहते है। लेकिन आप ?“
मौलाना ने जवाब दिया “मैं मस्जिद मे इमामत भी करता हू। बच्चों को इस्लामिक तालीम भी देता हू।
लेकिन मेरे मन मे शुरू से यह बात थी, की मैं चंदा मांगने वाला नहीं बल्कि मस्जिद में चंदा देने वाला बनू।
…बस जहां चाह वहाँ राह … ठान लिया …
तरक्की के लिए कम्फर्ट जोन से बाहर तो निकलना पड़ता है …
.. एक भाई ने अपने कंप्यूटर सेंटर मे कम फ़ीस मे टेली सॉफ्टवेयर सीखा दिया, और लगन थी.. इसलिए एक पुराना कंप्यूटर लेकर खूब मेहनत किया…
कहते है न … “जिन खोजा तीन पाइयाँ गहरे पानी पैठ” …बस गहरे पानी पैठ गया।और नतीज़ा आपके सामने है …
इतना कह कर मौलाना हँसने लगे।
सेठ रमेश मोटवानी के चेहरे के भाव साफ़ साफ़ बता रहे थे की उनकी नज़रों मे मौलाना के लिए तारीफ़ और इज़्ज़त के भाव थे ।
सेठ रमेश मोटवानी सोच रहे थे:
……“सिर्फ शिकायतें करते रहते से नहीं, अपनी बेहतरी के लिए जरूरी कदम खुद उठाना पड़ता है. जो शख्स खुद की मदद करता करता हैं, ख़ुदा उसकी मदद ज़रूर करता हैं”
■ Sara Nilofar