बीमारियों की बेड़ियों में जकड़ी सेहत

बीमारियों की बेड़ियों में जकड़ी सेहत

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इसमें तो कोई शक नहीं है कि सेहत सबसे बड़ी नेअमत है और सेहत ख़राब हो जाए तो अकूत दौलत भी एक सेहतमन्द ज़िन्दगी का तजुर्बा नहीं दे सकती है.

हम सभी चाहते हैं कि हमारी सेहत ठीक रहे मगर मौजूदा दौर में तरह-तरह की बीमारियों ने हमारी सेहत को जैसे जकड़ लिया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि पूरी दुनिया में ऐसी-ऐसी जटिल बीमारियाँ मौजूद हैं जिन्होंने लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जटिल चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं.

इन बीमारियों से निपटने के मामले में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सामने भी भारी चुनौतियाँ दरपेश हैं.

संगठन के मुखिया टैड्रोस गेबरेयेसस ने सदस्य देशों को सम्बोधित करते हुए कहा कि संगठन के कर्मचारी और विशेषज्ञ दुनिया भर में कम से कम 44 आपात स्थितियों का सामना कर रहे हैं.

इससे साफ़ नज़र आता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रासंगिकता और भी बढ़ी है.

ज़िम्मेदारी का बोझ

उनका कहना था, “ये स्वास्थ्य समस्याएँ इतनी जटिल हैं कि उनका समाधान भी कोई सीधा-सादा नहीं है. तमाम बीमारियाँ और स्वास्थ्य मुद्दे बहुत जटिल हैं. इनमें लड़ाई-झगड़े, अस्थिरता, युद्ध, राजनीति, आम लोगों की ज़िन्दगी से जुड़े मुद्दे सभी एक बहुत जटिल हालात पेश करते हैं.”

“Non-Communicable बीमारियों को रोकने और उनके इलाज की ज़िम्मेदारी का बोझ बढ़ता जा रहा है. क्योंकि बहुत सी Multinational कम्पनियाँ ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने की ख़ातिर ऐसे उत्पाद और सामान बाज़ार में बेचती हैं जो सेहत के लिए बहुत नुक़सान देने वाले होते हैं और उन पर क़ानूनी रोक नहीं है, या है भी तो ना के बराबर.”
“Non-Communicable बीमारियों को रोकने और उनके इलाज की ज़िम्मेदारी का बोझ बढ़ता जा रहा है. क्योंकि बहुत सी Multinational कम्पनियाँ ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने की ख़ातिर ऐसे उत्पाद और सामान बाज़ार में बेचती हैं जो सेहत के लिए बहुत नुक़सान देने वाले होते हैं और उन पर क़ानूनी रोक नहीं है, या है भी तो ना के बराबर.”

उनका ये भी कहना था कि एक और विशाल चुनौती ये है कि दुनिया भर में एंटीबॉयोटिक्स दवाओं का असर ख़त्म होता जा रहा है.

यानी दुनिया भर में मौजूद अनेक बीमारियों के बैक्टीरिया पर दवाओं का असर नहीं हो रहा है जिससे लोगों की सेहत ख़तरे में पड़ती जा रही है.

इसका मतलब ये भी है कि दवाओं के विकास और मौजूदगी के नज़रिए से आज की मानव सभ्यता सदियों पुराने दौर में पहुँच जाएगी जब असरदार दवाएँ भरपूर मात्रा में नहीं होती थीं.

संगठन के मुखिया ने तमाम सदस्य देशों के सामने अपनी कार्य योजना पेश करते हुए कहा कि इसके तहत तीन अरब का लक्ष्य हासिल किया जाएगा.

इसमें एक अरब और ज़्यादा लोगों तक स्वास्थ्य के साधन पहुँचाए जाएंगे.

एक अरब लोगों के स्वास्थ्य को और बेहतर बनाया जाएगा और दीगर एक अरब लोगों की ज़िन्दगी में सुधार लाया जाएगा.

डॉक्टर टेड्रॉस का कहना था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन क 194 सदस्य देशों को ये लक्ष्य हासिल करने में मदद के लिए संगठन के दफ़्तरों में विशेषज्ञों और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी.

उन्होंने उम्मीद जताई कि जनवरी 2018 में इस योजना पर सदस्य देशों का ठोस जवाब मिल पाएगा.

रिपोर्ट प्रस्तुति: महबूब ख़ान