मार दिया, कोई हमारी माँ की तस्करी करेगा तो हम क्या चुप बैठे रहेंगे

मार दिया, कोई हमारी माँ की तस्करी करेगा तो हम क्या चुप बैठे रहेंगे

Posted by

Khan Riyaz
==============
रिपोर्टर – क्यों मारा उस व्यक्ति को?
नारंगीलाल- वो गौ तस्करी कर रहे थे.. मार दिया, कोई हमारी माँ की तस्करी करेगा तो हम क्या चुप बैठे रहेंगे।
रिपोर्टर- लेकिन वो आपकी माँ कैसे हुई? आपकी माताजी तो घर पे बैठी होगी, और वो गौ तस्करी कर रहा था या नही, इसका फैसला तो न्याय प्रणाली को करना था, आपके संघटन ने क्यों हत्या कर दी?
नारंगीलाल- देखिये, वो दूध पिलाती है,तो माँ हुई ना , अब आपकी माँ को कोई लेकर जाएगा तो क्या आप पुलिस का इंतज़ार करेंगे?
रिपोर्टर – लेकीन दूध तो बकरी भी देती है, उसे तो माँ नही माना जाता।
नारंगीलाल – किन्तु गौ माता में 33 कोटि के आराध्य होते है जो की बकरी में नही होते।
रिपोर्टर- देवता का वास तो जर्रे जर्रे में है… “कण कण में ईश्वर का वास है” ये शुद्ध भारतीय अवधारणा है।
नारंगीलाल- किन्तु गाय शिव जी सवारी है.. नंदी … क्या आपको नही पता
रिपोर्टर- चूहा भी तो गणेश जी की सवारी है.. फिर उसके साथ ऐसी आस्था क्यों नही? सभी जीव किसी न किसी तरह से धार्मिक किरदारों से जुड़े है। फिर सिर्फ गाय को ही वरीयता क्यों?
नारंगीलाल- देखिये, गाय से कितने लाभ है हमें, दूध घी मक्खन मिलता है.. , इस देश के करोड़ो लोगो की आजीविका गाय चला रही है।
रिपोर्टर- यानि ये आर्थिक लड़ाई है, धार्मिक नही?
नारंगीलाल- आर्थिक नही, ये आस्था की बात है।
रिपोर्टर- तो आस्था गणेश की सवारी चूहे के साथ क्यों नही? माता की सवारी शेर के साथ नही, शिव जी के गले में लटके सांप के साथ नही, विष्णु के प्रिय वराह के साथ नही… हाथी के साथ नही जिसने गणेश जी को अपना सिर दे दिया..। कभी हाथी दांत तस्करों के पीछे दौड़े हो ऐसे लट्ठ तलवारे लेकर???
नारंगीलाल झल्ला गया – मुल्ले खाते है गाय को इसलिए आस्था है गाय में.. यदि वो “चूहा सुवर कुत्ता बिल्ली हाथी” खाते तो उनमें भी हम आस्था खोज निकालते.. बकरा मुर्गा तो हम खुद भी खाते है इसलिए उन्हें भी खाने दे रहे है………..।।।।।
“निष्कर्ष ये निकलता है कि अल्पसंख्यको की जान लेनी है, गाय तो एक बहाना है”