! ! ! ! ! मेरा सन्यासी मेरे पीछे नहीं, मेरे साथ चलता है! ! ! ! ! !

! ! ! ! ! मेरा सन्यासी मेरे पीछे नहीं, मेरे साथ चलता है! ! ! ! ! !

Posted by

Rahul Singh
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! ! ! ! ! मेरा सन्यासी मेरे पीछे नहीं, मेरे साथ चलता है! ! ! ! ! !

*💫यहूदी फकीर झुसिया मृत्यु-शय्या पर पड़ा था। विद्रोही था, बगावती था। मैं जिन थोड़े से लोगों को प्रेम करता हूं, उनमें से एक झुसिया भी है। एक वृद्ध यहूदी धर्मगुरु ने आकर झुसिया को कहा, झुसिया, अब आखिरी समय आ गया, अब परमात्मा से सुलह कर लो।*

*झुसिया ने आंख खोली और कहा, उससे तो कभी झगड़ा ही नहीं हुआ, तो सुलह कैसी करनी? झगड़ा तुमसे था। और तुमसे झगड़ा जारी रहेगा। झूठ से कोई सुलह नहीं हो सकती, सत्य से कोई झगड़ा नहीं है।*

*धर्मगुरु ने कहा कि देख, मान, जिंदगी भर तू बगावत में गुजार दिया है, अब झुक जा। अब तो तू मूसा का स्मरण कर। क्योंकि वही काम पड़ेंगे। आखिरी क्षणों में भी अगर मूसा के चरण गह ले तो बच जाएगा, नहीं तो डूबेगा, भटकेगा। मान ले मेरी।*

*झुसिया हंसने लगा। उसने कहा, देखो, मैं तुम्हें फिर कहता हूं, यह मेरी आखिरी सांस है और यह मेरी आखिरी बात भी कि परमात्मा से जब मेरा मिलना होगा, तो मैं भलीभांति जानता हूं कि परमात्मा मुझसे यह नहीं पूछेगा कि तुम मूसा क्यों नहीं हो। वह मुझसे पूछेगा–झुसिया, तुम झुसिया क्यों नहीं हो?*

*अगर उसे मुझे मूसा बनाना था तो मूसा बनाया होता। उसने मुझे झुसिया बनाया तो मैं झुसिया ही बनने की कोशिश में लगा रहा हूं। मैं बिलकुल आश्वस्त हूं कि परमात्मा मुझसे प्रसन्न है। मूसा से मुझे क्या लेना-देना! मूसा प्यारे आदमी थे, सो ठीक है। लेकिन मैं कोई मूसा बनने की चेष्टा में नहीं हूं, न मुझे किसी के चरण गहने हैं। परमात्मा के सामने मुझे अपना झुसिया होना प्रकट करना पड़ेगा–कि उसने मुझे जो बनाया था मैं वही हूं, मैं नकल नहीं हूं।*

*मगर धर्मगुरु यूं हार जाने वाले नहीं होते। फिर भी उसे बुद्धि न आई कि यह आदमी जो मरते वक्त इस साहस की, गजब की बात कर रहा है, इससे अब और कुछ कहना ठीक नहीं। उसने फिर भी उससे कहा कि देख, तू मेरी सुन, कम से कम प्रार्थना कर ले। क्योंकि मुझे जहां तक याद पड़ता है, तूने जिंदगी में कभी यहूदी धर्म की जो स्वीकृत प्रार्थना है, वह तूने कभी नहीं की।*

*झुसिया ने कहा कि तुम क्या व्यर्थ की बकवास इस आखिरी समय में ले आए हो। मैं कोई बंधी-बंधाई प्रार्थनाएं नहीं करता, और न करूंगा। प्रार्थना भी कहीं बंधी-बंधाई हो सकती है? सहज स्फूर्त होती है। रही परमात्मा से प्रार्थना करने की बात, तो अब क्या प्रार्थना करनी! अब जा ही रहा हूं, आमना ही सामना हो जाएगा।*

*तैयारी मैंने कर रखी है। और मेरी तैयारी अपने ढंग की है। मैंने कुछ प्यारे चुटकुले चुन रखे हैं जो परमात्मा को सुनाऊंगा। क्योंकि थक गया होगा बेचारा तुम जैसे धर्मगुरुओं की बकवास सुनते-सुनते। कुछ चुटकुले, कुछ लतीफे, कि दिल खोल कर हंस लेगा, तो बस प्रार्थना स्वीकृत हो गई।*

*धर्मगुरु धर्म का शोषण करते हैं। यह धर्म नहीं है, यह अधर्म है। और ये निश्चित बुद्धू होते हैं। इनके पास अगर प्रतिभा हो तो ये बुद्ध हो जाएं, ये बौद्ध न हों।*

*अगर इनके पास प्रतिभा हो तो ये क्राइस्ट हो जाएं, क्रिश्चियन न हों। अगर इनके पास प्रतिभा हो तो ये जिन हो जाएं, जैन न हों। और यही मेरा तुमसे कहना है कि जिन बनो तो ठीक। जिन यानी जिसने अपने को जीता। जैन मत बनना। जैन का अर्थ होता है: जिन्होंने अपने को जीता उनके पीछे चलना। किसी के पीछे चलने का कोई सवाल नहीं है।*

*मेरा संन्यासी मेरे पीछे नहीं चलता है, मेरे साथ चल रहा है। साथ चलने में और पीछे चलने में जमीन-आसमान का भेद है। पीछे अनुयायी चलता है, साथ मित्र चलते हैं। यह एक भाईचारा है। यह एक दोस्ती है, एक मैत्री है। मैं तुम्हारा अगुआ नहीं हूं।💫*

💐💐💐💐💐ओशो 💐💐💐💐💐