यह सारी दौलत एक गिलास पानी के बराबर भी नहीं!

यह सारी दौलत एक गिलास पानी के बराबर भी नहीं!

Posted by

‎Salman Siddiqui‎
===============
एक बादशाह ने अपनी अवाम पर जुल्मों सितम करके बहुत खजाना सोने-चांदी इकट्ठा कर लिया था और शहर से बाहर जंगल में एक खुफिया ठिकाना बनाकर सारा खजाना वहां छुपा रखा था और उस खजाने की दो चाभियाँ थी एक चाभी बादशाह के पास और दूसरी चाबी उसके भरोसेमंद वजीर के पास हुआ करती थी और किसी तीसरे को उस खजाने के बारे में पता नहीं था एक दिन सुबह को बादशाह अकेला घूमने को निकला तो सोचा कि दरवाजा खोलकर खजाने का जायजा लिया जाए और इसी नीयत से वह उस कमरे में दाखिल हुआ जहां सोने चांदी हीरे जवाहरात का अंबार लगा हुआ था तमाम दरो-दीवार हीरे चांदी सोने से सजे हुए थे दुनिया के कोने कोने से अनमोल खजाने उसने कट्ठा कर रखे थे वह उनको देखकर बहुत खुश हुआ और उसी दौरान उसी इलाके से वजीर का गुजर हुआ उसने खजाने का दरवाजा खुला देखा तो हैरान रह गया उसे ख्याल आया कि कल रात जब वह खजाना देखने आया था शायद उसी वक्त वह दरवाजा बंद करना भूल गया हो और उसने जल्दी से दरवाजा बंद करके बाहर से ताला लगा दिया इधर बादशाह ने जब अपने दिल पसंद साज व सामान से फारिग हुआ तो वापस दरवाजे पर आया लेकिन दरवाजा तो बाहर से बंद था उसने जोर जोर से दरवाजा पीटा और चीखना शुरु किया बहुत चिल्लाया उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था, फिर वापस वह् अपने खजाने की तरफ गया और उनसे दिल बहलाने की कोशिश करने लगा लेकिन भूख और प्यास की वजह से तड़प रहा था और जोर जोर से चीख रहा था चिल्ला रहा था और फिर दरवाजे की तरफ गया लेकिन कोई फायदा नहीं कोई सुनने वाला नहीं था वह बुरी तरह तड़पने लगा तो रेंगता हुआ हीरों की तरफ गया उसने वहाँ अलमारी को खोलकर बड़े बड़े हीरे देखे जिनकी कीमत लाखों में थी उसने बड़े आजजी और इंकसारी अंदाज में कहां लखपति हीरे मुझे एक वक्त का खाना दे दो उसे ऐसा लगा जैसे हीरे जोर-जोर से हंसने लगे हो उसने उन हीरो को दीवार पर दे मारा और घसीटता हुआ मोतियों की तरफ गया और उनसे भीख मांगने लगा आबदार मोतियों मुझे एक गिलास पानी दे दो लेकिन मोतियों ने एक भरपूर कहकहा लगाया और कहा दौलत के पुजारी काश तूने दौलत की हकीकत को समझ लिया होता तो तेरी यह हालत ना होती अब तेरी सारी दौलत भी मिलकर तुझे एक वक्त का खाना और पानी ही दे सकती है बादशाह चकरा कर गिर गया जब उसे होश आया तो उसने हीरे मोती बिखेर के दीवार के पास अपना बिस्तर बनाया और उस पर लेट गया वह दुनिया को एक पैगाम देना चाहता था लेकिन उसके पास कागज और कलम नहीं था उसने पत्थर से अपनी उंगली कुछ ली और बहते हुए खून से दीवार पर कुछ लिख दिया, इधर हुकूमती ओहदे दारान बादशाह को तलाश करते रहे लेकिन बादशाह ना मिला जब कई दिन बीत गए तो वजीर खजाने का मुआइना करने आया तो बादशाह हीरे जवाहरात के बिस्तर पर मरा पड़ा है और सामने की दीवार पर खून से लिखा है यह सारी दौलत एक गिलास पानी के बराबर भी नहीं है

-Fikr-e Millat