ये किसी भी देश के लिए बेहद ख़तरनाक़ संकेत है!

ये किसी भी देश के लिए बेहद ख़तरनाक़ संकेत है!

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Izhar Sayyed Arif
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सेकंड अलवर-कांड जैसी घटनाओं से वैसे तो किसी भी समाज को कोई भी फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि इससे कई गुना अधिक तो प्रतिदिन.अप्राकृतिक मौतों से मर जाते है अथवा उन्हें डॉक्टरों की संवेदनहीनता मार डालती है लेकिन अगर इसे संवैधानिक परिपेक्ष में देखा जाये तो ये किसी भी देश के लिए बेहद खतरनाक संकेत है इससे विश्व समुदाय को यह सन्देश जाता है के आप यहाँ किसी को भी अपनी निजी कुंठा अथवा शत्रुता के लिए जान से मार
सकते है और ऐसी घटनाओं में किसी के ऊपर भी कोई कार्यवाही नहीं होती बल्कि मात्र एक छोटी सी सरकारी औपचारिकता के बाद मामला वही खत्म करके उसे सरकारी रूप से पुरस्कृत और किया जाता है . मैंने अक्सर विदेशी लोगों के इस तरह के की खिल्ली उड़ाने अथवा हमारे देश की संस्कृति को जंगली-संस्कृति साबित करने वाली पोस्ट्स देखी है जिन्हें वहां सर्वाधिक चाव से पढ़ा जाता है .
ये देश क्योंकि विभिन्न धर्म और संस्कृतियों से सजा है इसलिए सभी को ऐसी घटनाओं का विरोध इसलिए भी करना चाहिए क्योंकि कही जिसकी लाठी उसकी भैस वाली संस्कृति जो आदि काल में प्रचलित थी फिर से न उत्पन्न हो जाये और हज़ारों सालो का मानव विकास चंद दिनों में नष्ट न हो जाये.
मैं आपको याद दिला दूँ के फासिस्ट विचारधारा की बुराई की अच्छाई पर हावी हो जाने की कोशिश हमेशा से रही है और जब कोई दूसरा नहीं मिलता तो वो आपस में लड़ मरने लगते है जैसे के श्री कृष्ण और राम और शिव भक्तों में भी कत्ले आम हो चुका है . इसकी अधिक जानकारी के लिए मैं “अरुण प्रकाश मिश्र” जी को उद्घृत करना चाहूंगा …………” बौद्धों तथा जैनियों ने क्या कम धर्मान्तरण और कत्लेआम किये … हिन्दुओं में ही वैष्णवों-शैवों-शाक्तों ने आपस में कितने कत्लेआम किये … यही नहीं राम और कृष्ण के भक्त आपस में ही कट मरे – राम को केवल अर्चावतार घोषित कर दिया गया और कृष्ण को पूर्णावतार …….शिव को तृतीय स्तर का देवता बना दिया गया और शक्ति की पूजा करने वाले शाक्तों को शूद्रों से भी गया गुजरा घोषित कर दिया गया “