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These photographs depict the families working in the sea buckthorn field and shows their living conditions in a ger (Mongolian traditional tent).

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वैश्विक तापमान की बढ़ोत्तरी के असर को कम करना है तो ज़रूरत है साफ़-सुथरी एनर्जी की

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हर तरफ़ मशीनों के बढ़ते चलन और पर्यावरण के लिए ख़तरनाक़ तरीक़ों के इस्तेमाल की वजह से वैश्विक तापमान में चिन्ताजनक स्तर पर बढ़ोत्तरी देखी गई है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटॉनियो गुटेरेस ने बुआगाह करते हुए कहा कि दुनिया को अगर वैश्विक तापमान की बढ़ोत्तरी के असर को कम करना है तो साफ़-सुथरे, और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा संसाधनों को विकसित करना और उनका इस्तेमाल बढ़ाना होगा.

इनमें सौर ऊर्जा और वायु ऊर्जा जैसे संसाधन प्रमुख हैं. महासचिव ने ये विचार एक Symposium में व्यक्त किए जिसका आयोजन 17 टिकाऊ विकास लक्ष्यों में तालमेल बिठाने पर विचार करने के लिए किया गया था.

इसका आयोजन संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (DESA) ने किया था.

महासचिव ने ऊर्ज को एक ऐसा Golden Thread यानी स्वर्णिम धागा क़रार दिया जो सभी टिकाऊ विकास लक्ष्यों को आपस में जोड़ता है.

महासचिव का कहना था, “ग़रीबी का ख़ात्मा करने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, सभी के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएँ पक्की करने के लिए आधुनिक ऊर्जा सेवाएँ बहुत ज़रुरी हैं.”

“आधुनिक ऊर्जा सेवाएँ टिकाऊ औद्योगिकरण, और ज़्यादा बेहतर बुनियादी ढाँचे बनाने और बस्तियाँ और शहर बसाने के लिए ज़रूरी हैं. साथ ही जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना पर्यावरण अनुकूल तरीक़े से करने के लिए भी आधुनिक ऊर्जा सेवाएँ बहुत अहम हैं.”
“आधुनिक ऊर्जा सेवाएँ टिकाऊ औद्योगिकरण, और ज़्यादा बेहतर बुनियादी ढाँचे बनाने और बस्तियाँ और शहर बसाने के लिए ज़रूरी हैं. साथ ही जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना पर्यावरण अनुकूल तरीक़े से करने के लिए भी आधुनिक ऊर्जा सेवाएँ बहुत अहम हैं.”

उनका अफसोस जताते हुए कहा कि इन चुनौतियों को समझने के बावजूद अब भी दुनिया टिकाऊ विकास लक्ष्य नम्बर 7 को हासिल करने के तरीक़ों को पूरी तरह नहीं समझ पा रही है.

“ये लक्ष्य नम्बर 7 ऐसी ऊर्जा सेवाएँ तैयार करना है जो पर्यावरण के नज़रिए से बिल्कुल साफ़-सुथरी हों और सभी को मिल भी सकें.”

उनका ये भी कहना था कि ये बहुत ज़रूरी है कि पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते से सम्बद्ध तमाम पक्ष वैश्विक तापमान बढ़ोत्तरी को 2 डिग्री सेल्सियस तक ही सीमित रखने के लिए एकजुट होकर मुस्तैदी से काम करें.

उन्होंने चिन्ताजनक अन्दाज़ में कहा कि मौजूदा चलन दिखाता है कि दुनिया 3 डिग्री सेल्सियस या उससे भी ज़्यादा की बढ़ोत्तरी की तरफ़ बढ़ रही है जोकि बेहद ख़तरनाक साबित हो सकता है.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम UNEP के मुखिया एरिक सोलहायम ने कहा है कि पर्यावरण अनुकूल माहौल बनाने के लिए कोयले और गैस से चलने वाले उद्योगों को मिलने वाली सब्सिडी बन्द करने की ज़रूरत है.

ऐसा इसलिए ज़रूरी है ताकि ये धन पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोतों यानी Renewable Energy के साधन विकसित करने में तेज़ी लाई जा सके.

जिनेवा में मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की Emissions Gap Report जारी करते हुए उन्होंने कहा कि कोयला, गैस या तेल से बनने वाले ईंधन को सब्सिडी देना तुरन्त बन्द करना होगा क्योंकि जिस चीज़ की ज़रूरत ही नहीं है तो उस पर धन ख़र्च करना बिल्कुल ग़लत है.

इसके बदले वायु, सौर, Geothermal और पानी से बनने वाली ऊर्जा पर धन ख़र्च करने की बहुत ज़रूरत है जिससे सभी को फ़ायदा होगा.

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बहुत से देश इस दिशा में पहले ही ठोस क़दम उठा रहे हैं और हर साल 52 गिगाटन ऊर्जा Renewable Sources से बन रही है.

इन देशों में चीन भी शामिल है जहाँ तंगशान शहर में विश्व का पहला Hybrid Tram शुरू हुआ है.

भारत में भी दक्षिणी राज्य केरल में एक ऐसा हवाई अड्डा बनाया गया है जिसकी पूरी ऊर्जा Solar Energy यानी सूरज की गर्मी से मिलेगी.

रिपोर्ट प्रस्तुति : महबूब ख़ान