#साहिर लुधियानवी_”जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा”

#साहिर लुधियानवी_”जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा”

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Izhar Sayyed Arif
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घटना शायद 1963 की है जब साहिर लुधियानवी को फिल्मफेयर बेस्ट सांग ” जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा” के गीतकार पुरुस्कार के लिए चुना गया था . साहिर को जब पता चला तो उन्होंने पुरुस्कार लेने से इंकार करते हुवे कहा के इस गाने से बेहतर तो गीतकार शैलेन्द्र का गीत ” मत रो माता लाल तेरे बहुतेरे” फिल्म ” बंदिनी” १९६३ है इसलिए पुरुस्कार के असली हक़दार ” शैलेन्द्र” है .

ये मैंने इसलिए लिख दिया के ” सकीर्णता के स्वर्णयुग” में जीने वालो कभी एक चक्कर “संवेदना और प्रेम के स्वर्णयुग” में भी एक चक्कर लगा कर देखो के जीवन प्राकृतिक रूप से प्रेम और उदारता का ही प्रतिनिधित्व करता है फिर इस देश में इतनी नफरत, इतनी घृणा कहाँ से आयी.

खैर आगे चलते है १९६३ के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए चुने गए ” जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा” के अलावा जिन गीतों को बिनाका ने टॉप पायदान दी उसमे दूसरा नंबर ” दिल एक मंदिर है” हसरत जयपुरी ( 3 ) और ( ४ ) नंबर फिर साहिर का था जो क्रमशः इन हवाओं में इन फ़िज़ाओं में तुझको मेरा प्यार पुकारे तथा चलो एक बार फिर अजनबी बन जाएँ हम दोनों ( दोनों फिल्म, गुमराह ) के लिए पांचवा ( 5 ) और सातवां ( ७ ) फिर हसरत जयपुरी को क्रमशः आवाज़ देके हमें तुम बुलाओ, मुहब्बत में इतना न हमको सताओ ( फिल्म; फिल्म प्रोफेसर ) और मुझको अपने गले लागलो ए मेरे हमराही को मिला. इस वर्ष की लिस्ट में दसवे ( १० ) नंबर पर शैलेंद्र ज़रूर थे मगर वो फिल्म बंदनी के गाने ” ओ जाने वाले वाले हो सके तो लौट के आना ” के लिए. और इसी फिल्म के लिए पहले बार चुने गए थे गुलज़ार सत्रहवें नंबर के लिए गीत “

वैसे शैलेन्द्र को १९५९ में यहूदी के ” ये मेरा दीवानापन है ” के लिए 1960 में अनाड़ी के गाने “सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी” तथा 1969 में फिल्म ब्रह्मचारी के गाने ” मैं गाऊं तुम सो जाओ ” के लिए बेस्ट गीतकार के अर्थात कुल “तीन” फिल्मफेयर अवार्ड मिले . 1967 में तीसरी क़सम के गाने ” साजनरे झूठ मत बोलो” को पिछाड़ के हसरत जयपुरी का गाना फिल्म सूरज ” बहारो फूल बरसाओ ” बाज़ी मार ले गया .

साहिर लुधियानवी को कुल दो ही फिल्म फारे अवार्ड मिले 1977 में फिल्म कभी-कभी के गाने ” कभी-कभी मेरे दिल ख्याल आता है और 1963 फिल्म ताज महल का ” जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा”