और ख़ाक़ी वर्दी, नेता जी के कुर्ते को छू गई!

और ख़ाक़ी वर्दी, नेता जी के कुर्ते को छू गई!

Posted by

Afroz Alam Sahil
================
उस दिन यमुना किनारे धोबी घाट पर एक रस्सी पर नेताजी जी का सफ़ेद खादी कुर्ता और एक पुलिस अधिकारी की खाकी वर्दी एक विचारधारा की तरह टंगे हुए थे.
इतने में हवा का एक झोंका आया और खाकी वर्दी, नेता जी की कुर्ते को छू गई.
इतना होना था कि इस सफ़ेद कुर्ते को गुस्सा आ गया और चिल्लाकर बोला -तुम्हारी इतनी हिम्मत! तुम जानते नहीं मैं कौन हूँ??? दूर रह मुझसे…
इतना सुनना था कि खाकी वर्दी जोश में आ गई… – ‘तुम्हारी ये सफ़ेदी किसके दम पर बरक़रार है? मेरे… तुम्हारी इस सफ़ेदी को बरक़रार रखने के लिए न जाने मैंने कितने धब्बे झेले हैं. अगर इन धब्बों का थोड़ा सा भी अंश तुम पर लग गया ना तो तुम अर्श से सीधे फ़र्श पर आ जाओगे… तुम्हारे कारनामें कहां तक गिनाऊं… अमित शाह, भोपाल फ़र्ज़ी एनकाउंटर से लेकर नजीब के आरोपियों तक को बचाने का काम मैंने किया है….
‘बस… बस… तुम ऐसे ही चमकते रहो… और हाँ! अपना मुंह थोड़ा कम ही चलाओ. नहीं तो तुम्हारा बंगला, कार और सारे ऐशों आराम सब छिन जाएंगे… और तुम तो इस पद के लायक भी नहीं थे…’
वातावरण में पूरी तरह से सन्नाटा छा गया. धोबी खाकी वर्दी को रस्सी से उतारने लगा… तभी नेता जी के कुर्ते ने चिल्ला कर कहा – ‘प्रमोशन के लिए अगले महीने आ जाना. और हां! अगली बार किसानों के नाम पर हड़ताल करने वालों से अच्छे से निपटना… दो-चार जान भी जाए तो इसकी फ़िक्र मत करना… हम सब संभाल लेंगे…’