गुजरात मे अगर कांग्रेस की सरकार बनी तो….!!!

गुजरात मे अगर कांग्रेस की सरकार बनी तो….!!!

Posted by

Tbassum Siddiqui
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*गुजरात मे अगर कांग्रेस की सरकार बनी तो किसी धर्म, पार्टी, या खुद कांग्रेस को खुश होने की ज़रूरत नही है*

हा, सही पढ़ा आपने गुजरात हारना मोदी और अमित शाह का मास्टर स्ट्रॉक है, ये राजनीति है,जब तक आप समझोगे BJP 2019 का इलेक्शन जीत चुकी होगी, वोभी भारी बहुमति से,

आपको लगता होगा केसी बेवकूफी की बाते है, अगर गुजरात में कांग्रेस आई तो सीधा सीधा 2019 में कांग्रेस को इसका फायदा होगा,
आप यही सोच रहे हेना???
और मीडिया में भी यही बात चलाई गई हैं कि अगर BJP ये इलेक्शन हारती है तो इसका असर इसे 2019 में आएगा,

जी नही बिल्कुल नही यही तो मोदी और अमित शाह की राजनीति का मास्टर स्ट्रोक है,

कैसे तो सुनिये,

पहली बात

एक बार फिर गुजरात को दांव पे लगाया जाएगा,
अगर गुजरात में कांग्रेस सरकार बनेगी तो 2019 के इलेक्शन के पहले गुजरात मे इस तरह का माहौल बनाया जाएगा की गुजरात मे कर्फ़्यू लग जाये, हो सकता है हिन्दू मुस्लिम दंगे हो,और BJP और मीडिया इस बात को लोगो के दिमाग मे डाल देगी की 22 साल से गुजरात मे कोई दंगा नही हुआ,और कोई कर्फ्यू नही लगा और कांग्रेस के आते ही दंगा और कर्फ्यू सुरु हो गया,

दूसरी बात

अगर गुजरात मे कांग्रेस की सरकार बनती है तो BJP और मीडिया इस बात को चलाएगी की EVM मशीन की किसी भी किसम की कोई गड़बड़ी नही की जा सकती है, अगर EVM में गड़बड़ी होती तो मोदी खुद अपना गढ़ गुजरात क्यों हारते???
इस बात का फायदा उठा कर और EVM मामले को ठंडा कर 2019 में ये साफ हो जाएगा कि EVM में गड़बड़ी नही है और BJP पूर्ण रूप से EVM में गड़बड़ी करेगी और भारी बहुमत से आएगी।

ज़रा सोचिए वो मोदी और अमित शाह जो UP में 30% मुस्लिम वोट बैंक होने के बावजूद 80% से ज्यादा सीट ला सकते है तो गुजरात इतनी आसानी से कांग्रेस को दे देंगे???

वेसे भी गुजरात मे अब राज्य स्तर का कोई नेता bjp के पास नही है और दलित समाज,पाटीदार समाज और कई लोग bjp के खिलाफ हो गए है जो bjp से कंट्रोल में नही आ रहे है तो क्यों न इनको कांग्रेस के हवाले कर दिया जाए कि अब तुम निमटो इनसे और अनामत दो न दो और उलझे रहो इनमे,

वेसे गुजरात मे एक कहावत है बनिया कभी नुकसान का व्यापार नही करता,
और गुजरात की बलि देकर अगर दिल्ली हाथ आती है तो सौदा महँगा नही है,

ये राजनीति है, *यहाँ कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है*.

लेखक एक वरिष्ठ लेखिका है