तबाही के दौर की शुरुआत 2012 से हो जायेगी : “रोज़-ए-ग़ज़ब” की पेशीनगोई

तबाही के दौर की शुरुआत 2012 से हो जायेगी : “रोज़-ए-ग़ज़ब” की पेशीनगोई

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शेख़ सफ़र अल-ह़वाली ने अपनी किताब “रोज़-ए-ग़ज़ब” मे लिखा है कि तबाही के दौर की शुरुआत 2012 से हो जायेगी, हालांकि यह एक पेशीनगोई की तरह थी लेकिन हैरत की बात ये है कि सीरिया मे जंग की शुरुआत भी थोड़ा ही पहले यानि 2011 मे हो चुकी थी…और आज अमेरिका ने यूरोशलम को इज़्राइली राजधानी की मान्यता देकर यहूदियों की पुरानी ख़्वाहिश हैकल-सुलेमानी बनाने की खुली इजाज़त दे डाली—–दर-असल हैकल सुलेमानी की ता’अमीर ही तबाही की ख़ौफनाक जंग का नगाड़ा है

हालांकि अरब से कुछ आवाज़ें उठी हैं जार्डन और कुवैत के रहनुमाओं ने ऐलान से पहले ही ट्रंप से फोन पर अपना इह्तिजाज दर्ज करवाया था लेकिन मुझे यह बात मह़ज़ एक औपचारिकता मात्र लगती है….सिर्फ एर्दोगान ने कुछ जुर्रतमंदी का मुज़ाहरा करते हुए ऐलान किया था कि “अलक़ुद्स(यूरोशलम)” उम्मत-ए-मुस्लिमः और दुनिया के बीच सुर्ख़ लकीर है अगर अमेरिका ने उसे मान्यता दी तो तुर्की इज़्राईल से अपने राजनेयिक संबंध ख़त्म कर लेगा , बाकी आलसऊद का ह़रामज़ादा “”इब्न-सलमान”” तो पहले ही फिलिस्तीनियों को वार्निंग दे चुका है कि अगर तुम सड़क पर उतरे तो अपनी तबाही के खुद ज़िम्मेदार होगे.।
वक़्त क़रीब है अपने-अपने ख़ेमे पहचान लीजिए फिर शायद मोहलत मिले ना मिले…??